नेशनल डेस्क। महाराष्ट्र के नासिक में खुद को धार्मिक गुरु बताने वाले अशोक खरात उर्फ भोंदू बाबा के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। एसआईटी और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने कनाडा कॉर्नर स्थित उसके ओकस प्रॉपर्टी कार्यालय पर दूसरे दिन छापेमारी की। जांच के दौरान फोरेंसिक टीम को ऐसी सामग्री मिली, जिसने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। पुलिस ने दफ्तर को सील कर जब्त सामान को फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है।
छापेमारी के दौरान पुलिस को महिलाओं के कटे हुए बाल, जानवरों के अवशेष, तंत्र-मंत्र से जुड़ी सामग्री और कई आपत्तिजनक किताबें मिलीं। अधिकारियों का मानना है कि इन वस्तुओं का उपयोग लोगों में डर और अंधविश्वास फैलाने के लिए किया जाता था। फोरेंसिक विशेषज्ञ अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि इन सामग्रियों का इस्तेमाल किन परिस्थितियों में और किस उद्देश्य से किया गया। पुलिस का कहना है कि बरामद साक्ष्य मामले की जांच में अहम कड़ी साबित हो सकते हैं।
जांच के दौरान यह भी पता चला कि करीब डेढ़ साल पहले अशोक खरात को अत्यधिक शक्तिवर्धक दवाओं के सेवन के कारण लकवे का अटैक आया था। हालांकि एक डॉक्टर की मदद से उसकी जान बच गई, लेकिन उसके चेहरे और हाथ पर आज भी उस अटैक का असर दिखाई देता है। पुलिस के अनुसार उसने धार्मिक अनुष्ठान और भविष्य बताने के नाम पर 150 से अधिक महिलाओं का शोषण किया। बड़ी संख्या को देखते हुए उसका एचआईवी टेस्ट कराया गया, जिसकी रिपोर्ट निगेटिव आई है।
[featured type="Featured"]
प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए अशोक खरात का गन लाइसेंस भी रद्द कर दिया है, जो उसे वर्ष 2012 में जारी हुआ था। पुलिस हिरासत में उसका व्यवहार असामान्य बताया जा रहा है, वह लगातार मंत्र जाप करता रहता है। पूछताछ के दौरान उसने कहा कि 'मेरे अंतर्मन ने मुझे धोखा दिया, अब मैं सिर्फ दिमाग की सुनूंगा।' उसने अपने कृत्यों को धार्मिक प्रक्रिया बताकर बचाव करने की कोशिश भी की, लेकिन पुलिस का कहना है कि मामले की जांच तथ्यों और सबूतों के आधार पर आगे बढ़ेगी।
जांच में सामने आया है कि अशोक खरात किसी चमत्कारी शक्ति वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक तरकीबों का इस्तेमाल करने वाला एक चालाक व्यक्ति था। पुलिस के अनुसार वह ‘हॉट रीडिंग’ और ‘कोल्ड रीडिंग’ जैसी तकनीकों से लोगों को प्रभावित करता था। ‘हॉट रीडिंग’ में पहले से जुटाई गई जानकारी का इस्तेमाल किया जाता था, जबकि ‘कोल्ड रीडिंग’ में सामने वाले की प्रतिक्रियाओं के आधार पर अनुमान लगाकर उसे भ्रमित किया जाता था। इस तरह वह लोगों का विश्वास जीतकर उन्हें अपने प्रभाव में ले लेता था।