
नई दिल्ली। दिल्ली की राजनीति में एक बार फिर ‘बंगला पॉलिटिक्स’ सुर्खियों में है। पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नए सरकारी आवास को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तीखा हमला बोला है। लोधी एस्टेट स्थित इस बंगले की तस्वीरें सामने आने के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। बीजेपी नेताओं का आरोप है कि, सादगी की राजनीति का दावा करने वाले केजरीवाल अब आलीशान जीवन जी रहे हैं, जबकि आम आदमी की समस्याएं जस की तस हैं।
अरविंद केजरीवाल 24 अप्रैल को 95 लोधी एस्टेट स्थित नए सरकारी आवास में शिफ्ट हुए हैं। यह बंगला उन्हें राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष के तौर पर आवंटित किया गया था। इससे पहले वह पंजाब से आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल को दिए गए आवास में रह रहे थे। बताया जा रहा है कि, इस सरकारी आवास के लिए केजरीवाल ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अदालत को भरोसा दिया था कि, उन्हें जल्द आवास उपलब्ध कराया जाएगा। इसी प्रक्रिया के तहत यह बंगला उन्हें आवंटित हुआ।
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दिल्ली सरकार में मंत्री प्रवेश वर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केजरीवाल पर तीखा हमला बोला। उन्होंने नए घर को ‘शीशमहल 2’ करार दिया और कहा कि यह पिछले विवादित ‘शीशमहल’ का ही अगला संस्करण है।
वर्मा ने आरोप लगाया कि, इस बंगले को बेहद आलीशान बनाया गया है, इसके इंटीरियर और सुविधाओं पर करोड़ों रुपए खर्च हुए हैं। केजरीवाल की सादगी वाली छवि अब सिर्फ दिखावा रह गई है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि, आम आदमी पार्टी का नाम बदलकर आलीशान आदमी पार्टी रख देना चाहिए।
प्रवेश वर्मा ने कोविड-19 महामारी के दौर का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि, जब दिल्ली के लोग दवाइयों और ऑक्सीजन के लिए संघर्ष कर रहे थे, तब भी केजरीवाल के पुराने ‘शीशमहल’ का निर्माण कार्य जारी था। उन्होंने कहा कि, उस कठिन समय में सरकार की प्राथमिकता जनता की मदद होनी चाहिए थी, लेकिन इसके बजाय बंगले को सजाने पर ध्यान दिया गया।

BJP नेता ने इस विवाद को पंजाब तक भी खींचा। उन्होंने आरोप लगाया कि, पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत मान के आवास के आसपास के सरकारी बंगलों में केजरीवाल और उनके करीबी नेता रह रहे हैं। उनके मुताबिक,
वर्मा ने दावा किया कि, पंजाब में भी इसी तरह का ‘शीशमहल’ तैयार किया गया है, जिससे वहां की राजनीति में भी दबाव बढ़ा है।

इस पूरे विवाद का केंद्र केजरीवाल की राजनीतिक छवि है। आम आदमी पार्टी खुद को आम लोगों की पार्टी बताती रही है और सादगी की राजनीति को अपना मुख्य आधार मानती है। ऐसे में बीजेपी इस मुद्दे को सादगी बनाम लग्जरी के रूप में पेश कर रही है। सवाल उठ रहा है कि, क्या नेताओं की जीवनशैली उनके दावों के अनुरूप है या नहीं। यह बहस अब सिर्फ एक बंगले तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि व्यापक राजनीतिक मुद्दा बन गई है।
फिलहाल आम आदमी पार्टी की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, राजनीतिक जानकार मानते हैं कि पार्टी जल्द ही इस मुद्दे पर अपनी सफाई दे सकती है और आरोपों का जवाब देगी। दूसरी ओर बीजेपी इस मुद्दे को लगातार उठाकर राजनीतिक दबाव बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रही है।