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क्या केजरीवाल को मिला 'अशुभ' बंगला...जिस दिन नए घर में शिफ्ट हुए, उसी दिन पार्टी में बड़ी टूट, सांसदों ने छोड़ा साथ

AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को दिल्ली के लोधी स्टेट में 95 नंबर बंगला मिला है। केजरीवाल शुक्रवार को इस बंगले में शिफ्ट भी हो गए। अब यह बंगला उनके लिए अशुभ माना जा रहा है, क्योंकि उनके नए बंगले में जाते ही आम आदमी पार्टी के सात सांसद अलग हो गए और भाजपा में शामिल होने का ऐलान कर दिया।
जिस दिन नए घर में शिफ्ट हुए, उसी दिन पार्टी में बड़ी टूट, सांसदों ने छोड़ा साथ

नई दिल्ली। दिल्ली की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी को राजधानी के वीवीआईपी इलाके में सरकारी बंगला अलॉट किया गया है, जहां पार्टी सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल शुक्रवार को शिफ्ट हो गए। 95 लोधी एस्टेट स्थित यह टाइप-7 बंगला उन्हें कोर्ट के निर्देशों के बाद आवंटित किया गया है। हालांकि राजनीतिक गलियारों में इस बंगले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं, जिसमें इसे अशुभ बंगला भी बताया जा रहा है।

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कोर्ट के आदेश के बाद मिला आवास

अरविंद केजरीवाल ने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि केंद्र सरकार ने उनकी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक के पद को देखते हुए उन्हें यह बंगला दिया है। उन्होंने लिखा, “पिछले कुछ दिनों में केंद्र सरकार ने आम आदमी पार्टी के नेशनल कन्वीनर के तौर पर मेरी स्थिति को देखते हुए, कोर्ट के आदेश पर मुझे एक घर अलॉट किया। अब मैं अपने परिवार के साथ उस घर में शिफ्ट हो गया हूं।” इससे पहले अक्टूबर में ही इस बंगले का अलॉटमेंट हो चुका था, जिसे लेकर दिल्ली हाई कोर्ट की टिप्पणी के बाद प्रक्रिया तेज हुई थी।

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सीएम आवास छोड़ने के बाद मित्तल के घर रह रहे थे

मुख्यमंत्री रहते हुए केजरीवाल सिविल लाइंस स्थित फ्लैग स्टाफ रोड के सरकारी आवास में रहते थे। सितंबर 2024 में पद छोड़ने के बाद उन्होंने अशोक मित्तल को आवंटित सरकारी बंगले में शिफ्ट किया था। अब लोधी एस्टेट में उनका नया ठिकाना बन गया है। खास बात यह रही कि जिस दिन केजरीवाल नए घर में पहुंचे, उसी दिन अशोक मित्तल ने आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया, जिससे सियासी संकेतों को लेकर चर्चाएं और तेज हो गईं।

मुख्यमंत्री निवास 'सजाने' पर हुआ था विवाद

जब अरविंद केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री थे, तब उनके सिविल लाइंस स्थित सरकारी आवास के नवीनीकरण को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हुआ था। आरोप लगे कि इस घर के रेनोवेशन पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, जिसमें महंगे इंटीरियर, लक्जरी सुविधाएं और सजावट शामिल थी। विपक्षी दलों ने इसे शीशमहल बताते हुए निशाना साधा और कहा कि आम आदमी की बात करने वाली सरकार खुद वैभव में डूबी है। वहीं AAP ने इन आरोपों को राजनीतिक बताया था और कहा था कि सुरक्षा व आधिकारिक जरूरतों के तहत यह काम किया गया था। 

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Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...

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