आमला में इंसानियत की मिसाल:ट्रेन हादसे में मरे बेटे का शव नहीं ले जा सके परिजन, जनसेवा कल्याण समिति के सहयोग से हुआ अंतिम संस्कार

आमला। हादसा 20 जुलाई 2026 को जौलखेड़ा रेलवे ट्रैक के पास हुआ था। यहां ट्रेन से गिरने से जीतू पिता जितेन्द्र 35 की दर्दनाक मौत हो गई थी। घटना के बाद आमला पुलिस ने शव को मर्चुरी में रखवाकर शिनाख्त शुरू की थी। आमला पुलिस की कड़ी मशक्कत और खोजबीन के बाद मृतक की पहचान फतेहपुर (इलाहाबाद, यूपी) निवासी के रूप में हुई। सूचना मिलने पर मृतक के पिता जितेंद्र, माता राजे देवी और भाई अभिषेक, आनंद और अक्षय बदहवास हालत में आमला पहुंचे।
समाजसेवियों के सहयोग से हुआ अंतिम संस्कार
मृतक के परिजनों ने बताया कि उनकी आर्थिक स्थिति बेहद खराब है। करीब 700-800 किलोमीटर दूर उत्तर प्रदेश के फतेहपुर तक शव ले जाने के लिए एंबुलेंस का भारी-भरकम खर्च उठाने के लिए उनके पास पैसे नहीं थे। परिवार की इस बेबसी को देखते हुए स्थानीय जनसेवा कल्याण समिति के सदस्यों ने आगे बढ़कर जिम्मेदारी संभाली। परिवार ने अंतिम संस्कार के लिए लकड़ियों का खर्च उठाया वहीं समिति ने मोक्ष धाम में अंतिम संस्कार की अन्य सामग्री और व्यवस्थाएं नि:शुल्क उपलब्ध कराईं। नगरपालिका ने शव वाहन और लकड़ियों के लिए ट्रैक्टर ट्रॉली निशुल्क उपलब्ध कराई। मृतक की पत्नी के आमला पहुंचने पर दोपहर बाद अंतिम संस्कार किया गया।
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करुणा बुद्ध बिहार समिति ने भी सहयोग दिया
मानवता के इस कार्य में जनसेवा कल्याण समिति के अध्यक्ष राहुल धेंडे, बंटी प्रजापति, पवन मसतकर और नितिन ठाकुर सक्रिय रहे। वहीं, करुणा बुद्ध विहार प्रबंधन समिति के विनोद नागले और शिव प्रसाद गुजरे ने भी व्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण योगदान दिया। समिति के सदस्यों की मौजूदगी में परिजनों ने नम आंखों से जीतू को अंतिम विदाई दी।
आमला पुलिस की सक्रियता से मिल सका परिवार
इस पूरे मामले में आमला पुलिस की भूमिका भी सराहनीय रही। युवक की मौत के बाद उसकी जेब से मिले दस्तावेजों और तकनीकी जांच के आधार पर पुलिस ने प्रयागराज (इलाहाबाद) के पास फतेहपुर में परिजनों से संपर्क साधा। यदि समय पर पहचान न होती, तो युवक का अंतिम संस्कार लावारिस के रूप में कर दिया जाता।
Edited By : Rohit Sharma












