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अमित शाह का जबलपुर दौरा : बलिदान दिवस पर गृहमंत्री का कार्यक्रम और अचानक दिग्विजय सिंह की एंट्री, जानें इस दिन को भुनाने में क्यों लगी है भाजपा-कांग्रेस

भाजपा द्वारा राजा शंकर शाह व रघुनाथ शाह के बलिदान दिवस पर कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
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अमित शाह का जबलपुर दौरा : बलिदान दिवस पर गृहमंत्री का कार्यक्रम और अचानक दिग्विजय सिंह की एंट्री, जानें इस दिन को भुनाने में क्यों लगी है भाजपा-कांग्रेस
जबलपुर. 18 सितंबर को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह जबलपुर आ रहे हैं। यहां वे कई कार्यक्रमों में शामिल होंगे। प्रमुख रूप से वे गोंड राजा शंकर शाह व रघुनाथ शाह के बलिदान दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में शिरकत करेंगे पर अचानक मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) की एंट्री से यहां राजनीति गर्मा गई है।

पहले 5 सितंबर को था शाह का जबलपुर दौरा

इससे पहले अमित शाह का जबलपुर दौरा (Amit Shah's visit to Jabalpur) 5 सितंबर को तय हुआ था फिर इस कार्यक्रम में फेरबदल कर 18 सितंबर कर दिया गया। भाजपा द्वारा राजा शंकर शाह व रघुनाथ शाह के बलिदान दिवस पर कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। प्रमुख रूप से आदिवासी व जनजातीय समाज को जोड़ना भाजपा का फोकस एरिया है। इसी कड़ी में अमित शाह बलिदान दिवस में शिरकत कर रहे हैं।

एक ही दिन जबलपुर में शाह और दिग्विजय

अमित शाह का जबलपुर दौरा काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरे के जरिए भाजपा आदिवासियों को लुभाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। इसे लेकर 5 सितंबर को सीएम शिवराज सिंह चौहान ने जबलपुर पहुंचकर तैयारियों का जायजा लिया, वहीं सांसद राकेश सिंह लगातार पार्टी कार्यकर्ताओं, पुलिस व प्रशासन के साथ बैठक ले रहे हैं। हालांकि, दिग्विजय सिंह के भी उसी दिन जबलपुर पहुंचने से पुलिस के लिए प्रोटोकॉल व व्यवस्थाओं को देखना किसी चुनौती से कम नहीं होगा।

लगाएंगे अतिरिक्त पुलिस बल : एसपी

अमित शाह व दिग्विजय सिंह के जबलपुर दौरे को लेकर एसपी सिद्धार्थ बहुगुणा (Siddharth Bahuguna) ने पीपुल्स से कहा कि दोनों कार्यक्रमों को अच्छे से संपादित कराया जाएगा। इस दौरान अतिरिक्त पुलिस बल लगाया जाएगा और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे, जिससे किसी भी तरह का सिक्योरिटी ब्रीच न हो। उन्हाेंने आगे कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जारी वीआईपी सुरक्षा की गाईडलाइंस को फॉलो किया जाएगा।

आदिवासियों को लुभाने की होड़

अमित शाह के गोंड राजा शंकर शाह व रघुनाथ शाह के बलिदान दिवस में शामिल होने की चर्चा के बाद कांग्रेस भी फ्रंट फुट पर आ गई। दरअसल, जबलपुर व समीपवर्ती जिलों में आदिवासियों की अच्छी खासी तादाद है। 2018 के चुनाव में कांग्रेस ने ऐसी सीटों पर अच्छी पकड़ बनाई थी, जिससे भाजपा को नुकसान हुआ था और कुछ ही सीटों से सत्ता उसके हाथों से निकल गई थी। भले ही प्रदेश में भाजपा ने कुछ ही समय में वापस सत्ता हासिल कर ली हो पर वह 2018 की गलती दोहराना नहीं चाहती। इसी वजह से आदिवासी वोटरों को जोड़ने के लिए इस अभियान की शुरुआत की जा रही है। वहीं कांग्रेस दिग्विजय की एंट्री कराकर डिफेंसिव मोड में नजर आ रही है।
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तैयारियों की लगातार समीक्षा कर रहे राकेश सिंह

अमित शाह के जबलपुर दौरे को लेकर सांसद राकेश सिंह (Rakesh Singh) लगातार विधायकों, पार्टी कार्यकर्ताओं, पुलिस व प्रशासन के साथ समीक्षा बैठकें कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का कार्यक्रम गैरिसन ग्राउंड में आयोजित किया जाएगा। इस दौरान वे आजादी पर केंद्रित प्रदर्शनी, राजा शंकर शाह के जीवन पर केंद्रित लघु फिल्म व आजादी पर केंद्रित ई-एल्बम का लोकार्पण करेंगे।

राजा शंकर शाह व रघुनाथ शाह का इतिहास

राजा शंकर शाह व रघुनाथ शाह का इतिहास
अमित शाह का जबलपुर दौरा गोंड राजा शंकर शाह व रघुनाथ शाह पर केंद्रित होगा। शंकर शाह गोंडवाना साम्राज्य के राजा थे, उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह का बिगुल बजाया था, जिसमें उनका बेटा रघुनाथ शाह भी शामिल था। विद्रोह की आग भड़की तो अंग्रेजों ने 18 सितंबर 1858 के दिन दोनों को तोप के मुंह पर बांधकर उड़ा दिया था। जबलपुर के आदिवासी समाज में राजा शंकर शाह व रघुनाथ शाह को लेकर भावनात्मक जुड़ाव है। बता दें कि जबलपुर के अलावा, डिंडोरी, मंडला, उमरिया, शहडाेल, अनूपपुर, छिंदवाड़ा, बालाघाट आदि जिलों में आदिवासी वोटरों की बड़ी तादाद है।
Piyush Singh Rajput
By Piyush Singh Rajput
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