मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और वैश्विक तेल सप्लाई में आई रुकावट का असर अब पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। पहले से आर्थिक संकट झेल रहे पाकिस्तान में सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक साथ ₹55 प्रति लीटर की बड़ी बढ़ोतरी कर दी है। इस फैसले के बाद आम लोगों पर महंगाई का दबाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
कीमतों में इस भारी बढ़ोतरी के बाद पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत करीब ₹321 प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल की कीमत लगभग ₹336 प्रति लीटर तक पहुंच गई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ता है और तेल सप्लाई सामान्य नहीं होती तो आने वाले समय में कीमतों में और इजाफा हो सकता है।
ईधन की कीमतों में इस तेज बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह खाड़ी क्षेत्र में बढ़ता सैन्य तनाव है। इस जंग के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। विश्व के सबसे प्रमुख तेल मार्गों में शामिल ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से तेल की उपलब्धता कम हो गई है जिससे वैश्विक बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। पाकिस्तान अपनी ईधन जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है ऐसे में वैश्विक कीमतों में उछाल का सीधा असर वहां के घरेलू बाजार पर देखने को मिल रहा है।
पाकिस्तान की जनता पहले ही महंगाई से जूझ रही है। बिजली, दवाइयों और रोजमर्रा की जरूरतों की चीजों की कीमतें पहले से ही काफी बढ़ चुकी हैं। ऐसे में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹55 प्रति लीटर की बढ़ोतरी से परिवहन लागत बढ़ेगी जिसका असर खाने-पीने के सामान से लेकर अन्य वस्तुओं की कीमतों पर पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि डीजल महंगा होने से माल ढुलाई का खर्च बढ़ जाएगा जिससे सब्जियां, फल और राशन जैसे जरूरी सामान भी महंगे हो सकते हैं।
पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पहले से कमजोर है और विदेशी मुद्रा भंडार भी सीमित है। ऐसे में वैश्विक तेल संकट ने उसकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। सरकार पर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की शर्तों का दबाव भी बना हुआ है, जिसके चलते सब्सिडी कम करने और टैक्स बढ़ाने जैसे कदम उठाने पड़ रहे हैं।
फ्यूल की कीमतें बढ़ने से उद्योगों और कृषि क्षेत्र पर भी असर पड़ सकता है। ट्रांसपोर्ट, मशीनरी और खेती से जुड़े कई कामों में डीजल का उपयोग होता है। ऐसे में लागत बढ़ने से उत्पादन महंगा हो सकता है जिसका असर पूरे बाजार पर पड़ेगा।
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ऊर्जा सुरक्षा के मामले में भारत की स्थिति पाकिस्तान से कुछ बेहतर मानी जा रही है। भारत ने रणनीतिक भंडार बनाने और कुछ देशों से रियायती दरों पर तेल खरीदने जैसे कदम उठाए हैं। वहीं पाकिस्तान के पास सीमित भंडार और कमजोर विदेशी मुद्रा स्थिति के कारण वैश्विक तेल संकट का असर ज्यादा तेजी से देखने को मिल रहा है।