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युद्ध से हिला भारत का व्यापार!इन पोर्ट पर अटका लाखों टन माल, कितना होगा नुकसान?

मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध और तनाव का असर अब भारत के व्यापार पर साफ दिखाई देने लगा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और पर्शियन गल्फ से गुजरने वाले समुद्री व्यापार मार्गों में रुकावट आने से भारत के पश्चिमी तट के बड़े बंदरगाहों पर भारी दबाव बन गया है।
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इन पोर्ट पर अटका लाखों टन माल, कितना होगा नुकसान?
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध और तनाव का असर अब सिर्फ उस क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा। इसका प्रभाव दुनिया भर के व्यापार मार्गों पर पड़ रहा है। खास तौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और पर्शियन गल्फ से गुजरने वाली समुद्री सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। भारत के पश्चिमी तट पर स्थित बड़े बंदरगाह भी इस संकट की चपेट में आ गए हैं।

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    नवी मुंबई का JNPT (जवाहरलाल नेहरू पोर्ट) और गुजरात का मुंद्रा पोर्ट इस समय भारी लॉजिस्टिक दबाव का सामना कर रहे हैं। हजारों कंटेनर बंदरगाहों पर अटक गए हैं, जिससे व्यापारियों, किसानों और उद्योगों की चिंता बढ़ गई है।

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    जहाजों के रूट बदलने से बढ़ी समस्या

    मिडिल ईस्ट में संघर्ष बढ़ने के बाद कई बड़ी शिपिंग कंपनियों ने उस क्षेत्र के लिए बुकिंग रोक दी है। कुछ कंपनियों ने अपने जहाजों का रास्ता भी बदल दिया है। अब कई जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की जगह अफ्रीका के दक्षिणी हिस्से से होकर केप ऑफ गुड होप के लंबे रास्ते से जा रहे हैं।
    इस बदलाव से यात्रा का समय कई दिनों तक बढ़ गया है। इसके कारण भारत से भेजा जाने वाला माल बंदरगाहों पर ही रुक गया है। कई कंटेनर ऐसे भी हैं जो समुद्र में ट्रांज़िट के दौरान फंस गए हैं।

    कृषि निर्यात पर सबसे ज्यादा असर

    मिडिल ईस्ट भारत के कृषि निर्यात के लिए एक बड़ा बाजार है। लेकिन मौजूदा हालात के कारण सबसे ज्यादा नुकसान इसी क्षेत्र को हुआ है। बड़ी मात्रा में कृषि उत्पाद बंदरगाहों और रास्ते में अटके पड़े हैं।

    फंसे हुए प्रमुख कृषि उत्पाद इस प्रकार हैं:

    • बासमती चावल: लगभग 4 लाख टन, 2 लाख टन भारतीय बंदरगाहों पर, 2 लाख टन ट्रांजिट में
    • ताजा अंगूर: 5,000 से 6,000 टन (300 से ज्यादा कंटेनर)
    • प्याज: लगभग 5,400 टन (150-200 कंटेनर, ज्यादातर नासिक से)
    • केला और अनार: सैकड़ों टन माल, 1,000 से ज्यादा रीफर कंटेनरों में
    • फ्रोजन बफेलो मीट: 300 से ज्यादा पेरिशेबल कंटेनरों में

    यानि मिडिल ईस्ट जाने वाले लगभग 23,000 कंटेनर भारत के अलग-अलग पश्चिमी बंदरगाहों पर फंसे हुए हैं।

    वाशी APMC में ‘रिवर्स फ्लो’ की स्थिति

    निर्यात रुकने के कारण माल वापस घरेलू बाजारों में आने लगा है। इससे मुंबई के पास स्थित वाशी APMC जैसे थोक बाजारों में रिवर्स फ्लो क्राइसिस की स्थिति बन गई है। जब निर्यात के लिए तैयार माल देश के अंदर ही बिकने लगता है, तो बाजार में सप्लाई अचानक बढ़ जाती है। इसका सीधा असर कीमतों पर पड़ता है।

    उदाहरण के लिए-  कोई फल पहले लगभग 25 रुपए प्रति किलो बिक रहा था जिसकी कीमत अब घटकर 15 रुपए प्रति किलो तक आ गई है। इससे किसानों और व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

    आयात पर भी दिख रहा असर

    इस संकट का असर सिर्फ निर्यात पर ही नहीं, बल्कि आयात पर भी पड़ रहा है। मिडिल ईस्ट से आने वाले कई जरूरी उत्पादों की सप्लाई प्रभावित हुई है।

    प्रमुख आयात प्रभावित:

    • सल्फर और जिप्सम: लगभग 3 लाख टन शिपमेंट में देरी
    • ड्राई फ्रूट्स और खजूर: 600-700 कंटेनर बंदर अब्बास जैसे बंदरगाहों पर अटके
    • LPG: 5 बड़े गैस कैरियर जहाजों का रूट बदला या शिपमेंट टला

    ऊर्जा सुरक्षा पर भी खतरा

    भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा मिडिल ईस्ट से आता है। भारत के 85% LPG आयात और 55% LNG आयात स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते से ही आते हैं। अगर यह संकट लंबा चला, तो गैस और ऊर्जा की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। इससे उद्योगों की लागत और घरेलू गैस की कीमतें बढ़ने का खतरा है।

    बंदरगाहों पर बढ़ता आर्थिक दबाव

    बंदरगाहों पर फंसे कंटेनरों की वजह से लॉजिस्टिक कंपनियों और व्यापारियों पर अतिरिक्त खर्च का बोझ भी बढ़ रहा है। केवल JNPT पोर्ट पर ही करीब 5,000 से ज्यादा कंटेनर ग्राउंडेड पड़े हैं। इन कंटेनरों को रखने और ठंडा रखने के लिए बिजली का खर्च भी देना पड़ता है। प्रति कंटेनर रोजाना लगभग 8,500 रुपए तक का खर्च आ रहा है।

    लंबा चला संघर्ष तो बढ़ सकती है परेशानी

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मिडिल ईस्ट में इजरायल और ईरान के बीच तनाव लंबा चलता है, तो इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था पर और गहरा हो सकता है।

    कृषि निर्यात, औद्योगिक उत्पादन, ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू कीमतों पर इसका प्रभाव लंबे समय तक दिखाई दे सकता है। इसलिए भारत के व्यापार और लॉजिस्टिक सेक्टर की नजर फिलहाल मिडिल ईस्ट के हालात पर टिकी हुई है।

    Garima Vishwakarma
    By Garima Vishwakarma

    गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...Read More

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