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नेपाल में 'बालेन' सुनामी:RSP 108 सीटों पर आगे, क्या खत्म हो जाएगा पुराना सियासी दौर?

नेपाल में इस बार युवा मतदाताओं के बीच बालेन शाह की लोकप्रियता बहुत तेजी से बढ़ी है। वह इस चुनाव के बड़े फैक्टर माने जा रहे हैं। भ्रष्टाचार विरोध, पारदर्शी राजनीति और नई सोच के एजेंडे के साथ उन्होंने लोगों को खासकर युवाओं और पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही रुझान जारी रहा, तो नेपाल की राजनीति में एक बड़ा बदलाव आना निश्चित है।
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RSP 108 सीटों पर आगे, क्या खत्म हो जाएगा पुराना सियासी दौर?
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    भारत के पड़ोसी देश नेपाल की राजनीति का पुराना सियासी दौर पूरी तरह से बदलता हुआ नजर आ रहा है। दो दिन पहले नेपाल में हुए चुनाव के बाद से ही वोटों की गिनती लगातार जारी है। देर रात तक चुनावी रूझान चले। और इस रूझान के आधार पर अब नेपालवासी भी अपने देश में बदलाव चाहते हैं। जिसके लिए वह पुरानी सियासी सत्ता को छोड़ नए उम्मीद से भरे नेता की ओर अपना हाथ थांभने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। रूझान के अनुसार, काठमांडू के पूर्व मेयर बालेन शाह का प्रधानमंत्री बनना लगभग तय हो गया है। देश के नए युवा, नई पीढ़ी, रैपर बालेन शाह  नेपाल के हीरो बनकर उभरे हैं। युवाओं को उनसे ढेर सारी उम्मीद है। वह आज के Gen-Z के लिए प्रेरणा के स्त्रोत हैं। हालिया रिपोर्ट के अनुसार, उनकी पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी नेपाल की 108 सीटों पर लीड कर रही है। अभी तक उनके नेतृत्व RSP की पार्टी के 5 उम्मीदवार चुनाव जीत चुके हैं। काउंटिंग में यह साफ दिख रहा कि बालेन शाह भी जीत के बहुत करीब हैं। बालेन शाह इस बार प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के विपक्ष में खड़े थे। और ओली इस बार अपनी सीट झापा से बुरी तरह हारते नजर आ रहे हैं। 

    नेपाल के ही नहीं, एशिया के भी सबसे युवा नेता बनेंगे रैपर बालेन शाह

    इस बार नेपाल की जनता अपने सियासी मुल्क में एक बड़ा बदलाव चाह रही है। जिसके लिए उन्होंने एकतरफा वोट देकर बालेन शाह की 3 साल पहले बनी पार्टी को नेपाल की सत्ता पर काबिज करने का निर्णय ले लिया है। बालेन अगर नेपाल के प्रधानमंत्री बनते हैं तो वह नेपाल के साथ साथ पूरे एशिया के भी सबसे युवा प्रधानमंत्री बन जाएंगे। 

    पूर्व पीएम दहल रुकुम से जीत तो गए लेकिन पार्टी को मिली करारी हार

    अगर पूर्व प्रधानमंत्री की बात की जाए तो, प्रधानमंत्री पुष्प कमल अपनी सीट रुकुम से चुनाव जीत तो गए हैं, लेकिन उनकी पार्टी इस चुनाव में सिर्फ़ एक सीट से ही चुनाव जीत सकी है। इस बार के नेपाल के चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभर कर सामने आ रही है RSP  के पीएम उम्मीदवार बालेन शाह हैं।

    कांग्रेसी नेपाली भी मात्र 10 सीटों पर सिमटे

    35 साल के युवा नेता बालेन शाह एक उम्मीद की किरण बनकर वहां के लोगों के लिए उभरे हैं, वहीं केपी शर्मा ओली की पार्टी सीपीएन यूएमएल सिर्फ 10 सीट पर आगे चल रही है। वहीं, पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली भी चुनाव हारते हुए ही नजर आ रहे हैं। नेपाली कांग्रेस भी 10 सीट से ज्यादा लाते हुए नजर नहीं आ रहे। नेपाल का चुनावी रिजल्ट दो दिनों के अंदर सबके सामने होगा।

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    ओली और गगन थापा रह गए सबसे पीछे

    अभी तक आए चुनावी रुझानों को देखकर लगता है कि 2-3 बहुमत से रवि लामेचन की पार्टी नेपाल में अकेले अपने दम पर सरकार बना लेगी। नेपाल की जनता इस बार देश में बड़ा सियासी बदलाव चाह रही। यही वजह है कि कई नए चेहरे इस बार नेपाल की संसद में जीत कर आएंगे। साथ ही जितने पुराने सियासी नेता हैं जैसे- ओली, प्रचंड और गगन थापा सब के सब इस चुनावी रेस में पीछे होते नजर आ रहे हैं।

    क्या है नेपाली चुनाव का पूरा खेल? 

    नेपाल में कुल 275 चुनावी सीटे हैं। जिसमें 165 सीटों पर डायरेक्ट इलेक्शन होता है वहीं बाकी बची 110 सीटों पर प्रपोशनल रिप्रेजेंटेशन सिस्टम से सदस्य चुने जाते हैं। प्रपोशनल रिप्रेजेंटेशन सिस्टम में प्रत्याशी के बदले पार्टी को वोट दिया जाता है। जिस पार्टी को जितने प्रतिशत वोट मिलते हैं, उसे उन सीटों में उतनी ही हिस्सेदारी मिलती है। 

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    165 सीटों पर होते हैं डायरेक्ट इलेक्शन

    नेपाल में कुल 165 सीटों पर डायरेक्ट इलेक्शन होते हैं। इस बार के चुनाव में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी 108 सीटों पर आगे चल रही है। जिस पार्टा के पास 50 फीसदी सांसद होंगे, वहीं सरकार बनाएगी। अभी तक के रुझान से यह साफ है कि आरएसपी पार्टी को डायरेक्टर इलेक्शन वाली 165 में 108 सीटें मिल रही है। इसके अलावा प्रपोशनल रिप्रेजेंटेशन सिस्टम से भी पार्टी को लगभग 70 सीटें मिल जाएगी। ऐसे में RSP के पास सरकार बनाने का स्पष्ट बहुमत होगा। जानकारी के मुताबिक नेपाल में कुल 1.89 करोड़ मतदाता हैं। बीते 5 मार्च को यहां चुनाव हुआ था।

    Geetanjali Sharma
    By Geetanjali Sharma
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