दुनिया के अलग-अलग कोनों में आस्था और परंपरा के ऐसे रंग देखने को मिलते हैं जो कभी हैरान करते हैं, तो कभी डरा देते हैं। लेकिन क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि जिस जगह को हम गंदगी और अशुद्धता का प्रतीक मानते हैं उसे भी भगवान का दर्जा दिया जा सकता है? जी हां, चीन के कुछ हिस्सों में एक ऐसी प्राचीन और विचित्र परंपरा आज भी जीवित है, जहां लोग टॉयलेट (शौचालय) की बाकायदा पूजा करते हैं। सुनकर भले ही आपको यकीन न हो लेकिन इसके पीछे की वजह एक रोंगटे खड़े कर देने वाली लोककथा है।
चीन में जब लैंटर्न फेस्टिवल (लालटेन उत्सव) की धूम होती है, तो ग्रामीण इलाकों में एक बेहद अलग ही नजारा देखने को मिलता है। चीनी लूनर कैलेंडर के पहले महीने के 15वें दिन जब पूरा देश रोशनी में नहाया होता है तब महिलाएं हाथों में अगरबत्ती और धूप लेकर घर के टॉयलेट की ओर बढ़ती हैं। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार यह कोई साधारण सफाई अभियान नहीं बल्कि 'जिगु देवी' (Zigu Goddess) की आराधना है। इन्हें वहां टॉयलेट देवी के रूप में भी जाना जाता है। वसंत महोत्सव के समापन पर होने वाली यह रस्म सदियों पुरानी है और आज भी वहां के जनजीवन का एक अटूट हिस्सा है।
ये भी पढ़ें: खुदाई में मिलीं 300 साल पुरानी खौफनाक कब्रें ; गले पर हंसिया और पैरों में ताले देख कांप गए लोग
अब सवाल यह उठता है कि आखिर टॉयलेट जैसी जगह को देवी से क्यों जोड़ा गया? इसके पीछे एक बेहद दुखद और खौफनाक इतिहास छिपा है। प्राचीन चीनी लोककथाओं के अनुसार जिगु नाम की एक अत्यंत सुंदर और गुणी महिला थी। कहा जाता है कि सदियों पहले एक ईर्ष्यालु दरबारी की पत्नी ने जिगु की बेरहमी से हत्या कर दी थी। सबसे दर्दनाक बात यह थी कि यह हत्या शौचालय के पास ही अंजाम दी गई थी। जिगु की अकाल और क्रूर मृत्यु के बाद स्थानीय लोगों का मानना था कि उसकी आत्मा वहीं भटक रही है। उसकी भटकती आत्मा को शांति देने और उसे सम्मान दिलाने के उद्देश्य से लोगों ने उसे 'शौचालय की देवी' का दर्जा दे दिया। समय के साथ वह अंधविश्वास से निकलकर एक रक्षक और देवी स्वरूप में स्थापित हो गईं।
यह रस्म सिर्फ माथा टेकने तक सीमित नहीं है। यहां महिलाएं एक विशेष अनुष्ठान करती हैं जिसे देखकर कोई भी बाहरी व्यक्ति दंग रह जाए। महिलाएं सबसे पहले टॉयलेट की अच्छे से सफाई करती हैं और वहां एक छोटा सा पुतला रखती हैं। इसके बाद धूप-अगरबत्ती जलाई जाती है और देवी से अपनी शादी, आने वाली फसल, स्वास्थ्य और भविष्य से जुड़े सवाल पूछे जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि यदि अनुष्ठान के दौरान वह पुतला जरा सा भी हिल जाता है, तो उसे देवी का 'हां' या कोई गुप्त संकेत माना जाता है।
ये भी पढ़ें: दाल में कीड़ा, दही खराब… वंदे भारत में खराब भोजन पर बवाल, IRCTC पर 10 लाख और कंपनी पर 50 लाख का जुर्माना
भले ही आज का विज्ञान इसे कोरा अंधविश्वास कहे, लेकिन चीन के इन इलाकों में इसे आस्था और सफाई के मिलन के रूप में देखा जाता है। वहां के लोगों के लिए यह अपनी पूर्वजों की आत्मा को सम्मान देने और अपने घर की शुद्धि सुनिश्चित करने का एक तरीका है। इतिहासकारों का मानना है कि प्राचीन काल में जब स्वच्छता की कमी से महामारियां फैलती थीं, तब शायद इस तरह की धार्मिक मान्यताओं के जरिए लोगों को शौचालय साफ रखने के लिए प्रेरित किया जाता होगा। कारण जो भी हो लेकिन आज भी 'टॉयलेट देवी' की यह परंपरा दुनिया के सबसे अजीबोगरीब रिवाजों में शुमार है।