लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ पक्षपात का आरोप!अविश्वास प्रस्ताव हुआ पेश, 50 विपक्षी सांसदों ने वोटिंग की
सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस मुद्दे पर पॉइंट ऑफ ऑर्डर उठाया। उन्होंने कहा कि जब स्पीकर को हटाने से जुड़ा प्रस्ताव सदन में चर्चा के लिए आता है, तो उस समय स्पीकर को कार्यवाही की अध्यक्षता करने का अधिकार नहीं होता।
Publish Date: 10 Mar 2026, 2:55 PM (IST)Updated On: 12 Mar 2026, 1:16 PM (IST)Reading Time: 4 Minute Read
यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।
नई दिल्ली। लोकसभा में मंगलवार को विपक्ष ने स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। इस प्रस्ताव के समर्थन में 50 से अधिक सांसद खड़े हुए, जिसके बाद पीठासीन अधिकारी ने इसे स्वीकार कर लिया। अब इस प्रस्ताव पर सदन में करीब 10 घंटे तक चर्चा होगी। विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर ने सदन की कार्यवाही के दौरान पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया है।
विपक्ष की मांग: स्पीकर की गैरमौजूदगी में डिप्टी स्पीकर नियुक्त हो
बहस के दौरान कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने डिप्टी स्पीकर की नियुक्ति न होने का मुद्दा भी उठाया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि स्पीकर की गैर-मौजूदगी में कार्यवाही चलाने के लिए डिप्टी स्पीकर होना जरूरी है। फिलहाल यह पद खाली है, इसलिए सवाल उठाया गया कि चेयर पर बैठे पीठासीन सदस्य जगदंबिका पाल इस स्थिति में सदन की कार्यवाही कैसे संचालित कर सकते हैं। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि देश का नेतृत्व कमजोर और डरपोक दिखाई दे रहा है।
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ओवैसी ने उठाया पॉइंट ऑफ ऑर्डर
सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस मुद्दे पर पॉइंट ऑफ ऑर्डर उठाया। उन्होंने कहा कि जब स्पीकर को हटाने से जुड़ा प्रस्ताव सदन में चर्चा के लिए आता है, तो उस समय स्पीकर को कार्यवाही की अध्यक्षता करने का अधिकार नहीं होता। उन्होंने यह भी कहा कि अभी तक डिप्टी स्पीकर की नियुक्ति नहीं की गई है और चेयर पर बैठे सदस्य भी स्पीकर की अनुमति से ही वहां पहुंचे हैं। ऐसे में यह स्पष्ट होना चाहिए कि इस बहस के दौरान सदन की अध्यक्षता कौन करेगा।
विपक्ष के आरोपों पर सत्ता पक्ष के नेताओं ने नियमों का हवाला देते हुए जवाब दिया। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि नियमों के मुताबिक, चेयर पर बैठा कोई भी सदस्य स्पीकर की तरह ही अधिकारों के साथ कार्यवाही चला सकता है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी इसी बात का समर्थन किया। वहीं कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने दोबारा मांग की कि बहस शुरू करने से पहले सदन की सहमति से अध्यक्ष तय किया जाना चाहिए। इस पर भाजपा नेता रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि चेयर पर मौजूद व्यक्ति को सदन की कार्यवाही संचालित करने का पूरा अधिकार है।
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गोगोई- LOP को बोलने से कई बार रोका
बहस के दौरान गौरव गोगोई ने आरोप लगाया कि सदन में नेता विपक्ष को कई बार बोलने से रोका गया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान भी विपक्ष के नेताओं को बार-बार टोका गया। गोगोई ने सरकार पर हमला करते हुए कहा कि जब देश को मजबूत नेतृत्व की जरूरत होती है, तब सरकार की प्रतिक्रिया कमजोर नजर आती है। उनके इस बयान के बाद सदन में कुछ समय के लिए तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली।