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अलास्का समिट : ना सीजफायर, ना कोई डील... 3 घंटे चली बैठक, पुतिन ने ट्रंप को दिया रूस आने का न्योता

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अलास्का समिट : ना सीजफायर, ना कोई डील... 3 घंटे चली बैठक, पुतिन ने ट्रंप को दिया रूस आने का न्योता
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    अलास्का। दुनिया की नजरें जिस बैठक पर टिकी थीं, वह शुक्रवार देर रात पूरी हुई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की यह ऐतिहासिक मुलाकात करीब तीन घंटे तक चली, लेकिन यूक्रेन युद्ध खत्म करने पर कोई ठोस डील नहीं हो सकी। दोनों नेताओं ने बैठक को सकारात्मक बताया, लेकिन प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों के सवाल लिए बिना ही मंच से चले गए।

    तीन घंटे की बैठक, 12 मिनट की प्रेस कॉन्फ्रेंस

    ट्रंप और पुतिन की बातचीत ढाई घंटे से ज्यादा चली। इसके बाद मात्र 12 मिनट की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई। इसमें ट्रंप ने कहा कि "बैठक सकारात्मक रही और कुछ मुद्दों पर सहमति बनी है, लेकिन अभी कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ।" वहीं पुतिन ने दोहराया कि "यूक्रेन युद्ध की जड़ कारणों को खत्म किए बिना स्थायी शांति संभव नहीं।"

    पुतिन बोले- अगर ट्रंप राष्ट्रपति होते तो युद्ध नहीं होता

    प्रेस वार्ता में पुतिन ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि यदि 2022 में डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति होते तो यूक्रेन में युद्ध शुरू ही नहीं होता। उन्होंने कहा कि "अब समय है बातचीत का, न कि टकराव का।" पुतिन ने अगली मुलाकात मॉस्को में करने का भी सुझाव दिया।

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    ट्रंप बोले- लोगों को मरते नहीं देख सकता

    बैठक के बाद ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा, "मैं लोगों को मरते हुए नहीं देखना चाहता। पुतिन और जेलेंस्की दोनों चाहते हैं कि मैं शांति प्रक्रिया में शामिल रहूं।" ट्रंप ने यह भी माना कि उन्होंने सोचा था कि यूक्रेन जंग खत्म कराना आसान होगा, लेकिन यह अब तक की सबसे कठिन चुनौती साबित हुई है।

    जमीन की अदला-बदली और सुरक्षा पर चर्चा

    ट्रंप ने इंटरव्यू में यह भी खुलासा किया कि बैठक में यूक्रेन की सुरक्षा और जमीन की अदला-बदली जैसे मुद्दों पर बातचीत हुई। हालांकि उन्होंने विस्तार से जानकारी साझा नहीं की। ट्रंप ने बातचीत को "10 में से 10" अंक देते हुए कहा कि वे जल्द ही नाटो सहयोगियों और जेलेंस्की से इस पर चर्चा करेंगे।

    अमेरिकी मीडिया और विशेषज्ञों की तीखी प्रतिक्रिया

    अमेरिकी मीडिया ने इस मुलाकात को "बिना ठोस समझौते के खत्म हुई बैठक" बताया। वॉशिंगटन पोस्ट ने लिखा कि "अलास्का समिट सीजफायर तक भी नहीं पहुंच सकी।" वहीं, नाटो में अमेरिका के पूर्व राजदूत डगलस ल्यूट ने कहा कि "पुतिन को सब मिला अंतरराष्ट्रीय मंच, रेड कार्पेट स्वागत और अमेरिकी राष्ट्रपति की कार लेकिन ट्रंप को कुछ खास नहीं मिला।" पूर्व NSA जॉन बोल्टन ने भी कहा कि "इस बैठक में पुतिन जीत गए हैं।"

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    अमेरिका में पुतिन का 10 साल बाद आगमन

    करीब 10 साल बाद पुतिन अमेरिका पहुंचे। अलास्का के एल्मेंडॉर्फ एयर बेस पर उनका रेड कार्पेट बिछाकर स्वागत किया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप खुद एयरपोर्ट पर मौजूद रहे और पुतिन को अपनी गाड़ी ‘द बीस्ट’ में लेकर मीटिंग स्थल पहुंचे। इस दौरान अमेरिकी वायुसेना ने F-22 लड़ाकू विमानों से शक्ति प्रदर्शन भी किया।

    इतिहास और पड़ोसी होने का जिक्र

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुतिन ने अलास्का के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि "रूस और अमेरिका महासागरों से अलग जरूर हैं, लेकिन असल में पड़ोसी हैं।" उन्होंने कहा कि अलास्का में आज भी मौजूद रूसी ऑर्थोडॉक्स चर्च दोनों देशों की साझा विरासत की निशानी है, जो रिश्तों को फिर से मजबूत कर सकती है।

    अभी भी लंबा सफर बाकी

    ट्रंप और पुतिन की यह सातवीं मुलाकात थी और 2019 के बाद पहली बार दोनों आमने-सामने मिले। हालांकि बैठक से पहले "Pursuing Peace" (शांति की खोज) का बैनर लगाया गया था, लेकिन नतीजा उम्मीद के मुताबिक नहीं निकला। अब सारी निगाहें इस बात पर हैं कि क्या जल्द ही पुतिन, ट्रंप और जेलेंस्की एक साथ शांति वार्ता की टेबल पर बैठेंगे या फिर यूक्रेन जंग और लंबी खिंचेगी।

    ये भी पढ़ें: बिना किसी ठोस नतीजे पर पहुंचे खत्म हुई ट्रंप और पुतिन की बातचीत, यूक्रेन पर नहीं बन सकी सहमति

    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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