PlayBreaking News

शंकराचार्य को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत :गिरफ्तारी पर रोक, अगली सुनवाई मार्च में

वहीं, शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की ओर से पेश अधिवक्ता ने तर्क दिया कि कथित पीड़ित की ओर से मुकदमा संरक्षक के माध्यम से दर्ज कराया गया है, जबकि उसके माता-पिता या विधिक अभिभावकों की कोई स्पष्ट जानकारी नहीं बताई गई है।
Follow on Google News
गिरफ्तारी पर रोक, अगली सुनवाई मार्च में
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है।  जमानत याचिका पर आदेश सुरक्षित रख लिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई मार्च के तीसरे सप्ताह में होगी। शंकराचार्य की ओर से 24 फरवरी को बटुकों के कथित यौन उत्पीड़न प्रकरण में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दाखिल की गई थी। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के अधिवक्ता ने जमानत का विरोध करते हुए आरोपों की गंभीरता पर जोर दिया।

    वहीं, बचाव पक्ष ने दलील दी कि यह मामला एक प्रतिष्ठित धर्मगुरु से जुड़ा है और उन्हें साजिशन फंसाया गया है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फिलहाल गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक जारी रखते हुए अंतिम निर्णय सुरक्षित रखा है।

    वकील बोले- शंकराचार्य काफी पावरफुल इंसान

    अदालत में सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष ने कड़ा रुख अपनाया। राज्य के वकील ने दलील दी कि शंकराचार्य प्रभावशाली व्यक्ति हैं और यदि उन्हें अग्रिम जमानत दी गई तो वे मामले की जांच या गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं । वहीं गिरफ्तारी तरिम रोक के बाद उनके मठ में समर्थकों के बीच खुशी का माहौल देखा गया। अनुयायियों ने इसे राहत भरा कदम बताया।

    यह भी पढ़ें: शंकराचार्य बोले : झूठ ज्यादा दिनों तक नहीं टिकता, नार्को टेस्ट के लिए भी तैयार हूं, बस सच सामने आए

    कैसे सामने आया मामला

    पूरा मामला तब सामने आया जब तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्रचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 173(4) के तहत जिला अदालत में याचिका दायर की। इसके बाद रेप और पॉक्सो स्पेशल कोर्ट के जज विनोद कुमार चौरसिया के आदेश पर झूंसी थाने में शंकराचार्य के खिलाफ बच्चों से यौन शोषण के आरोप में केस दर्ज किया गया।

    कोर्ट में दोनों पक्षों ने क्या कहा

    इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने याचिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अग्रिम जमानत के लिए सीधे हाई कोर्ट में याचिका लगाना सहीं नहीं है। उनके अनुसार, पहले निचली अदालत का दरवाजा खटखटाया जाना चाहिए। इस दलील के समर्थन में उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के कई निर्णयों का हवाला दिया।

    यह भी पढ़ें: “टीआई ने पूछा — कितने बजे? जवाब मिला 11… और पुलिस ने पब की बजा दी 12”

    शंकराचार्य के वकील- पीड़ित के अभिभावक द्वारा जानकारी नहीं बताई गई

    वहीं, शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की ओर से पेश अधिवक्ता ने तर्क दिया कि कथित पीड़ित की ओर से मुकदमा संरक्षक के माध्यम से दर्ज कराया गया है, जबकि उसके माता-पिता या विधिक अभिभावकों की कोई स्पष्ट जानकारी नहीं बताई गई है। बचाव पक्ष ने इसे प्रक्रिया संबंधी गंभीर प्रश्न बताया।

    Aakash Waghmare
    By Aakash Waghmare

    आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

    नई दिल्ली
    --°
    बारिश: -- mmह्यूमिडिटी: --%हवा: --
    Source:AccuWeather
    icon

    Latest Posts