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पितृपक्ष में रेवा-कुब्जा संगम पर उमड़ेगा आस्था का सैलाब, गया के समान बताया गया है महत्व

पितृपक्ष में सोहागपुर के अजेरा स्थित रेवा-कुब्जा संगम पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु तर्पण के लिए पहुंचेंगे। धार्मिक मान्यताओं में इसे गया के समान महत्व वाला तीर्थ बताया गया है।
पितृपक्ष में रेवा-कुब्जा संगम पर उमड़ेगा आस्था का सैलाब, गया के समान बताया गया है महत्व

सोहागपुर। पितृपक्ष की शुरुआत के साथ ही सोहागपुर क्षेत्र के नर्मदा तटों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। नर्मदा के दक्षिण तट पर अजेरा गांव में स्थित रेवा-कुब्जा संगम को धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व वाला तीर्थ बताया गया है। मान्यता है कि यहां तर्पण और स्नान करने से पितरों को लाभ मिलता है। स्थानीय धार्मिक मान्यताओं में इस संगम का महत्व मोक्ष नगरी गया के समान बताया गया है।

नर्मदा पुराण में संगम का उल्लेख

श्री नर्मदा पुराण के 21वें अध्याय के चौथे श्लोक का हवाला देते हुए नर्मदा पुराण वाचक पंडित हरि शरणम महाराज सीताराम पांडे ने रेवा-कुब्जा संगम के महत्व की जानकारी दी। उनके अनुसार, मार्कंडेय ऋषि ने धर्मराज युधिष्ठिर को कुब्जा संगम का महत्व बताते हुए कहा था कि भगवान शंकर ने स्वयं कार्तिकेय और माता पार्वती को इसके महत्व के बारे में बताया था।

शास्त्रों में भगवान शंकर के कथन के रूप में कुब्जा और नर्मदा के संगम के महत्व का वर्णन मिलता है। इसमें श्रद्धालुओं को गया, गंगा और सरस्वती जाने के बजाय कुब्जा और नर्मदा के संगम के महत्व को जानने की बात कही गई है।

कई तीर्थों के समान बताया गया महत्व

नर्मदा पुराण के अनुसार, कुब्जा संगम पर काशी, प्रयाग, पुष्कर, गंगासागर, केदार, कनखल, प्रभास, हरिश्चंद्रपुर, श्रीशैल, महेंद्र, मलय, गोकर्ण, महाबल, कलिंजर, नीलकंठ, त्र्यंबक, रुद्रकोटि, हिमालय और भैरव समेत कई तीर्थों का महत्व बताया गया है।

पंडित हरि शरणम महाराज के मुताबिक, धार्मिक मान्यता में यहां शरीर छोड़ने वाले व्यक्ति के शिवलोक में रहने और इस संगम के महत्व को सुनने-कहने वालों के पूजित होने का उल्लेख मिलता है।

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सरस्वती ने यहां की थी तपस्या

अजेरा के रेवा-कुब्जा संगम से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं में मां सरस्वती का भी उल्लेख मिलता है। बताया जाता है कि नारद जी के उपदेश पर माता सरस्वती ने यहां तपस्या की थी। मान्यता है कि मरीचिक मुनि द्वारा दिए गए दो जन्मों के श्राप से उन्हें यहीं मुक्ति मिली थी। इसी वजह से इस स्थान को मां सरस्वती की तपोभूमि भी कहा जाता है।

अमावस्या और पूर्णिमा पर पहुंचते हैं श्रद्धालु

अजेरा का रेवा-कुब्जा संगम सोहागपुर से करीब 22 किलोमीटर और शोभापुर से करीब 12 किलोमीटर उत्तर दिशा में नर्मदा नदी के दक्षिणी तट पर स्थित है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, यहां प्रत्येक अमावस्या और पूर्णिमा पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। पितृपक्ष के दौरान तर्पण और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए भी यहां श्रद्धालुओं के पहुंचने की परंपरा बताई जाती है। नर्मदा तट पर होने के कारण नर्मदा परिक्रमा करने वाले श्रद्धालु भी इस स्थान पर पहुंचते हैं।

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धर्मशाला और सड़क निर्माण की मांग

गैय्या वाले महात्मा आत्मानंद जी महाराज के मुताबिक, रेवा-कुब्जा संगम पर श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बनी रहती है। उन्होंने नर्मदा परिक्रमा वासियों के विश्राम के लिए गौघाटा पर धर्मशाला निर्माण की जरूरत बताई।

उन्होंने मुख्य मार्ग से घाट तक सीमेंट सड़क बनाए जाने की भी मांग की, ताकि बारिश के दौरान भी श्रद्धालुओं को नर्मदा तट तक पहुंचने में परेशानी न हो। स्थानीय लोगों का कहना है कि सुविधाएं बढ़ने से यहां आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर व्यवस्था मिल सकेगी।

Neelam Tiwari
By Neelam Tiwari

नीलम तिवारी - सोहागपुर के वरिष्ठ पत्रकार, 40 वर्षों से निष्पक्ष, जनसरोकार और ग्रामीण मुद्दों की निर्...Read More

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