क्या पायलट ने जानबूझकर बंद किए फ्यूल स्विच?अहमदाबाद प्लेन क्रैश पर इटली की रिपोर्ट ने खोले अहम राज

अहमदाबाद से लंदन जा रही एअर इंडिया फ्लाइट AI171 के भीषण हादसे को लेकर विदेशी मीडिया ने बड़ा दावा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, जांच में तकनीकी खराबी के सबूत नहीं मिले हैं और कॉकपिट रिकॉर्डिंग से फ्यूल स्विच बंद करने की बात सामने आई है। हालांकि, पायलट संगठनों ने इस दावे पर कड़ा ऐतराज जताया है।
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अहमदाबाद प्लेन क्रैश पर इटली की रिपोर्ट ने खोले अहम राज
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    लंदन/नई दिल्ली। 12 जून की दोपहर, अहमदाबाद एयरपोर्ट से उड़ान भरते ही एअर इंडिया की फ्लाइट AI171 चंद सेकंड में मलबे में तब्दील हो गई। 260 लोगों की जान लेने वाला यह हादसा सिर्फ एक विमान दुर्घटना नहीं था, बल्कि भारत की एविएशन सेफ्टी, जांच प्रक्रिया और अंतरराष्ट्रीय दबावों को लेकर कई गंभीर सवाल छोड़ गया। अब विदेशी मीडिया की नई रिपोर्ट ने इस हादसे को लेकर बहस को और तेज कर दिया है।

    टेकऑफ के 32 सेकंड बाद तबाही

    एअर इंडिया की बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर फ्लाइट अहमदाबाद से लंदन गैटविक जा रही थी। विमान ने उड़ान भरने के करीब 32 सेकंड बाद ही दोनों इंजनों की ताकत खो दी और एक मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल से टकरा गया। इस हादसे में विमान में सवार 242 में से 241 लोगों की मौत हो गई, जबकि जमीन पर मौजूद 19 लोगों की भी जान चली गई। सिर्फ एक यात्री इस दुर्घटना में जीवित बच पाया।

    नई रिपोर्ट में क्या दावा किया गया?

    इटली के प्रमुख अखबार कोरिएरे डेला सेरा ने पश्चिमी विमानन एजेंसियों के सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि, जांच में अब तक किसी तरह की तकनीकी खराबी के सबूत नहीं मिले हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर की साफ की गई ऑडियो रिकॉर्डिंग से यह स्पष्ट हुआ कि, किस पायलट ने फ्यूल स्विच को रन से कटऑफ की स्थिति में किया, जिससे दोनों इंजन बंद हो गए।

    शक की सुई कैप्टन पर क्यों?

    रिपोर्ट में कहा गया है कि, सबसे पहले बायां इंजन बंद हुआ, जहां आमतौर पर विमान का कप्तान बैठता है। इसके बाद दायां इंजन बंद हुआ। आखिरी पलों में को-पायलट क्लाइव कुंदर का कंट्रोल स्टिक ऊपर की ओर था, जिससे संकेत मिलता है कि वह विमान को ऊपर उठाने की कोशिश कर रहे थे, जबकि कप्तान सुमीत सभरवाल का कंट्रोल स्थिर बताया गया है।

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    कॉकपिट रिकॉर्डिंग में क्या सुना गया?

    ब्लैक बॉक्स रिकॉर्डिंग में एक पायलट दूसरे से पूछता सुनाई देता है, आपने इंजन क्यों बंद किए? इसके जवाब में दूसरा पायलट कहता है, मैंने नहीं किया। हालांकि, रिपोर्ट में यह साफ नहीं किया गया है कि यह बातचीत किस पायलट के बीच हुई।

    भारतीय एजेंसियों की चुप्पी

    इस रिपोर्ट पर भारत के एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) और नागरिक उड्डयन मंत्रालय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। वहीं अमेरिकी जांच एजेंसी NTSB ने भी इस मामले में भारतीय एजेंसी से संपर्क करने की बात कही है।

    पायलट संगठनों और परिवार का विरोध

    भारतीय पायलट संघ और कैप्टन सुमीत सभरवाल के परिवार ने रिपोर्ट पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि, हादसे का दोष एक मृत पायलट पर डालना अनुचित है। उन्होंने बोइंग, एअरलाइन, ट्रेनिंग सिस्टम और अन्य संभावित कारणों की गहन जांच की मांग की है।

    अमेरिका में दोबारा हुई जांच

    दिसंबर में AAIB की टीम वॉशिंगटन गई थी, जहां NTSB की लैब में ब्लैक बॉक्स डेटा का दोबारा विश्लेषण किया गया। अमेरिकी विशेषज्ञों ने बोइंग 787 पर कई सिम्युलेटर टेस्ट किए, लेकिन उन्हें ऐसा कोई तकनीकी कारण नहीं मिला जिससे दोनों इंजन अपने आप बंद हो सकें।

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    अंतरराष्ट्रीय दबाव का एंगल

    रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि, पश्चिमी देशों ने भारतीय एयरलाइंस की सुरक्षा रेटिंग की समीक्षा की चेतावनी दी थी। जानकारी के अनुसार, अगर पायलट की गलती मानी जाती है तो इसे स्वीकार्य बलिदान के तौर पर देखा जा रहा है, ताकि अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान न पहुंचे।

    मुआवजा और कानूनी विवाद

    इसी बीच ब्रिटिश अखबार द इंडिपेंडेंट ने दावा किया है कि, एअर इंडिया ने पीड़ित परिवारों को अतिरिक्त मुआवजे के बदले भविष्य में केस न करने का प्रस्ताव दिया है। एयरलाइन परिवारों को अतिरिक्त 10 लाख रुपए की अंतिम राशि देकर समझौते की पेशकश कर रही है। कुछ मामलों में यह 20 लाख रुपए तक है। 130 से ज्यादा परिवारों की लीगल टीम ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है, क्योंकि जांच अभी पूरी नहीं हुई है।

    सुप्रीम कोर्ट की सख्ती

    सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से तीन हफ्ते में जांच रिपोर्ट पेश करने को कहा है। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया है कि, AAIB की रिपोर्ट के बाद कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी की जरूरत पर फैसला किया जाएगा।

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    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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