उत्तर प्रदेश के कानपुर से सामने आए चर्चित लैंबॉर्गिनी हिट एंड रन मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपी तंबाकू कारोबारी के बेटे शिवम मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया है। हादसे के करीब 90 घंटे बाद पुलिस ने उसे हिरासत में लिया। अब उसे कोर्ट में पेश किया जाएगा, जहां पुलिस रिमांड की मांग कर सकती है।
शिवम मिश्रा तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा का बेटा है। घटना के बाद से वह फरार चल रहा था। शुरुआत में इस मामले में कई तरह के दावे किए गए, लेकिन जांच आगे बढ़ने के साथ तस्वीर साफ होती गई।
यह हादसा 8 फरवरी को कानपुर के वीआईपी रोड पर हुआ था। जानकारी के मुताबिक, शिवम मिश्रा अपनी लैंबॉर्गिनी कार से जा रहा था। उसके पीछे एक दूसरी गाड़ी में बाउंसर भी चल रहे थे।
रेव-3 मॉल के पास अचानक कार अनियंत्रित हो गई। तेज रफ्तार में चल रही इस कार ने पहले एक ई-रिक्शा को टक्कर मारी, फिर एक बाइक सवार को और उसके बाद सड़क पर पैदल जा रहे व्यक्ति को भी घायल कर दिया। अंत में कार एक खंभे से टकराकर रुकी। यह पूरी घटना कुछ ही सेकंड में हो गई। इस हादसे में कई लोग घायल हुए। घायल तौफीक की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया था।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो में देखा गया कि बाउंसर ड्राइविंग सीट से एक युवक को गोद में उठाकर बाहर निकाल रहे हैं। इस वीडियो के सामने आने के बाद पुलिस की शुरुआती कार्रवाई पर सवाल उठने लगे।
शुरुआत में पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ केस दर्ज किया था। वहीं, बचाव पक्ष की ओर से दावा किया गया कि हादसे के समय कार शिवम नहीं, बल्कि ड्राइवर मोहन चला रहा था। मोहन ने कोर्ट में सरेंडर कर खुद को चालक बताया, लेकिन अदालत ने उसके दावे को स्वीकार नहीं किया।

पुलिस ने मामले की गहराई से जांच शुरू की। CCTV फुटेज, मौके की मैपिंग, मोबाइल लोकेशन, डिजिटल साक्ष्य और गाड़ी के अंदर मिले फॉरेंसिक संकेतों की जांच की गई।
जांच में सामने आया कि हादसे के समय ड्राइविंग सीट पर शिवम मिश्रा ही बैठा था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, फुटेज में दुर्घटना के बाद कार से बाहर निकलने वाला व्यक्ति शिवम से मिलता-जुलता दिखाई देता है।
तकनीकी सबूतों और चश्मदीदों के बयानों ने भी इसी ओर इशारा किया कि कार तेज रफ्तार में थी और चालक ने नियंत्रण खो दिया था।
ड्राइवर मोहन ने दावा किया था कि वही कार चला रहा था। लेकिन जांच के दौरान उसके बयान में कई विरोधाभास पाए गए। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि मोहन ने ऐसा बयान क्यों दिया और क्या किसी के कहने पर उसने यह जिम्मेदारी ली थी।
जांच टीम यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हादसे से पहले क्या हुआ था, कार किस रफ्तार से चल रही थी और क्या किसी ने चालक को बचाने की कोशिश की।
12 फरवरी को पुलिस ने शिवम मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया। अब उसे कोर्ट में पेश किया जाएगा। पुलिस उसकी कस्टडी रिमांड की मांग कर सकती है, ताकि मामले से जुड़े बाकी पहलुओं की गहराई से जांच की जा सके।
कानपुर का यह मामला फिलहाल पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है।