वॉशिंगटन डीसी। ग्लोबल एनर्जी पॉलिटिक्स में एक बार फिर अमेरिका ने अपनी मौजूदगी का जोरदार दावा किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वॉशिंगटन डीसी में आयोजित ‘Champion of Coal’ कार्यक्रम में भारत के साथ हुए ट्रेड डील को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि, यह समझौता अमेरिका को दुनिया का सबसे बड़ा एनर्जी एक्सपोर्टर बनाने की दिशा में अहम कदम है। ट्रंप के मुताबिक, इस डील से अमेरिकी कोयले का निर्यात रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचेगा। हालांकि, भारत ने साफ कर दिया है कि उसकी ऊर्जा नीति किसी दबाव पर नहीं, बल्कि पूरी तरह राष्ट्रीय हित पर आधारित है।
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि, अमेरिका इस समय दुनिया में नंबर-वन एनर्जी प्रोड्यूसर है। उन्होंने दावा किया कि, बीते कुछ सालों में अमेरिका ने ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की है। अब अमेरिका केवल घरेलू जरूरतों तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक बाजार में एक बड़े एनर्जी सप्लायर के रूप में उभर रहा है।
ट्रंप ने कहा, हम एक बड़े एनर्जी एक्सपोर्टर बन रहे हैं। अमेरिका का कोयला दुनिया में सबसे अच्छी गुणवत्ता वाला है और अब इसकी मांग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेजी से बढ़ रही है।
ट्रंप ने भारत के साथ हुए ट्रेड एग्रीमेंट को खास तौर पर रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि, नई दिल्ली के साथ हुआ यह समझौता अमेरिकी कोयले को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रीमियम प्रोडक्ट के तौर पर स्थापित करने की रणनीति का हिस्सा है।
उनके मुताबिक, भारत जैसे बड़े और तेजी से बढ़ते एनर्जी कंज्यूमर के साथ डील अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम है। ट्रंप ने कहा कि, इस समझौते से अमेरिकी कोयले के शिपमेंट में तेजी आएगी और अमेरिका की एक्सपोर्ट कैपेसिटी और मजबूत होगी।
भारत के साथ-साथ ट्रंप ने जापान और दक्षिण कोरिया का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि, हाल के महीनों में इन देशों के साथ भी ऐतिहासिक ट्रेड डील की गई हैं। इन समझौतों का मकसद अमेरिकी कोयले और ऊर्जा संसाधनों को एशियाई बाजारों तक बड़े पैमाने पर पहुंचाना है।
ट्रंप के अनुसार, इन देशों के साथ हुए समझौते अमेरिका के एनर्जी फुटप्रिंट को ग्लोबल लेवल पर फैलाने में मदद करेंगे।
‘Champion of Coal’ कार्यक्रम में ट्रंप ने साफ तौर पर कोयले को अमेरिका की ऊर्जा नीति का अहम स्तंभ बताया। उन्होंने कहा कि, कोयला न केवल सस्ता और भरोसेमंद स्रोत है, बल्कि गुणवत्ता के मामले में भी अमेरिकी कोयले का कोई मुकाबला नहीं है। ट्रंप ने जोर देकर कहा कि, अमेरिका का लक्ष्य कोयले को फिर से वैश्विक ऊर्जा बाजार में मजबूत स्थान दिलाना है।
जहां एक तरफ अमेरिका ऊर्जा निर्यात बढ़ाने की बात कर रहा है, वहीं भारत ने ट्रेड डील में अपने संवेदनशील क्षेत्रों को पूरी तरह सुरक्षित रखा है। इस समझौते के तहत भारत ने गेहूं, चावल, मक्का, सोयाबीन, दूध, पनीर, पोल्ट्री, मांस और अन्य कृषि उत्पादों पर अमेरिका को किसी तरह की टैरिफ छूट नहीं दी है।
ये उत्पाद भारत के छोटे और सीमांत किसानों की आजीविका से सीधे जुड़े हैं। भारत सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि कृषि और डेयरी सेक्टर पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
ट्रंप के बयान ऐसे समय आए हैं जब भारत ने अपनी ऊर्जा नीति को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। 9 फरवरी को विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा था कि, भारत के ऊर्जा से जुड़े फैसले पूरी तरह राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं।
उन्होंने बताया कि, तेल और गैस की खरीद का निर्णय सरकार नहीं, बल्कि तेल कंपनियां बाजार स्थितियों के आधार पर करती हैं। इन फैसलों में कीमत, उपलब्धता, जोखिम, परिवहन और लॉजिस्टिक्स जैसे कई पहलुओं पर विचार किया जाता है।
मिस्री ने यह भी कहा कि, भारत एक विकासशील और आयात-निर्भर देश है। ऐसे में ऊर्जा आयात का सीधा असर महंगाई और आम लोगों पर पड़ता है। यही कारण है कि भारत किसी एक देश पर निर्भर रहने के बजाय विविध स्रोतों से ऊर्जा खरीदने की नीति अपनाता है। उन्होंने साफ कहा कि, भविष्य में भी भारत वही फैसले लेगा जो देश की अर्थव्यवस्था और जनता के हित में होंगे।