7 बार सांसद, 3 बार की पूर्व CM...कितनी पेंशन की हकदार हैं ममता बनर्जी? समझिए पूरा गणित

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। भाजपा ने पहली बार राज्य में प्रचंड बहुमत हासिल करते हुए 206 सीटें जीत ली हैं। इसके साथ ही पार्टी ने दो-तिहाई बहुमत के साथ सरकार बनाने का रास्ता साफ कर लिया है। वहीं, (टीएमसी) महज 80 सीटों पर सिमट गई है। यह नतीजा लंबे समय से सत्ता में रहीं ममता बनर्जी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
ममता बनर्जी की पेंशन पर चर्चा तेज
चुनावी हार के बाद अब ममता बनर्जी की पेंशन को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि, वे पहले ही कई बार स्पष्ट कर चुकी हैं कि वे कोई भी सरकारी वेतन या पेंशन स्वीकार नहीं करेंगी। यह उनका निजी फैसला है, जबकि कानूनी तौर पर वे इन सभी लाभों की पात्र हैं।
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सात बार की सांसद, क्या कहते हैं नियम?
ममता बनर्जी सात बार सांसद रह चुकी हैं। मौजूदा नियमों के मुताबिक 5 साल का कार्यकाल पूरा करने पर 31,000 प्रतिमाह बेसिक पेंशन मिलती है, और हर अतिरिक्त वर्ष पर ₹2,500 और जुड़ते हैं। ऐसे में 25-30 साल के संसदीय अनुभव के आधार पर उनकी संभावित सांसद पेंशन ₹80,000 से ₹1,00,000 प्रति माह के बीच हो सकती थी।
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विधायक और मुख्यमंत्री के रूप में भी लाभ
सांसद रहने के अलावा ममता बनर्जी विधायक और मुख्यमंत्री भी रह चुकी हैं। पश्चिम बंगाल के नियमों के अनुसार, पूर्व विधायकों को भी पेंशन मिलती है, जिसकी गणना अलग तरीके से होती है। वर्तमान में विधायकों का वेतन पैकेज करीब ₹1.21 लाख प्रतिमाह है। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री के तौर पर उन्हें आजीवन चिकित्सा सुविधा, Z+ सुरक्षा, स्टाफ और दफ्तर से जुड़ी सुविधाएं मिलती हैं।
दोहरी पेंशन का क्या है नियम
नियमों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति सांसद और विधायक दोनों रहा हो तो वह एक ही पेंशन चुन सकता है आमतौर पर वही जो अधिक लाभकारी हो। ममता बनर्जी के मामले में सांसद पेंशन ज्यादा फायदेमंद रहती। अगर वे पेंशन लेने का फैसला करतीं, तो पूर्व मुख्यमंत्री के लाभों के साथ उनकी कुल मासिक पेंशन ₹1 लाख से अधिक हो सकती थी।
निजी फैसला, फिर भी चर्चा जारी
हालांकि ममता बनर्जी का रुख साफ है कि वे पेंशन नहीं लेंगी, लेकिन चुनावी हार के बाद यह मुद्दा फिर सुर्खियों में आ गया है। यह बहस फिलहाल संभावनाओं और नियमों तक सीमित है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे लेकर चर्चा जारी है।











