सरकारी अस्पतालों की बड़ी उपलब्धि:6 साल में 140+ बोन मैरो ट्रांसप्लांट, बच्चों को मिला नया जीवन

इंदौर के सरकारी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल और महाराजा यशवंतराव अस्पताल (एमवाय अस्पताल) ने बोन मैरो ट्रांसप्लांट के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है।
6 साल में 140+ बोन मैरो ट्रांसप्लांट, बच्चों को मिला नया जीवन
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    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    इंदौर। शहर के सरकारी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल और महाराजा यशवंतराव अस्पताल (एमवाय अस्पताल) ने बोन मैरो ट्रांसप्लांट के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। बीते 6 वर्षों में यहां 140 से अधिक मरीजों का सफल बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया गया है जिनमें 85 बच्चे और 55 वयस्क शामिल हैं। बोन मैरो ट्रांसप्लांट एक जटिल प्रक्रिया होती है, जिसमें शरीर के खराब बोन मैरो को स्वस्थ स्टेम कोशिकाओं से बदला जाता है। यह इलाज थैलेसीमिया, सिकल सेल एनीमिया और ब्लड कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों में बेहद कारगर साबित हो रहा है।

    जटिल मामलों में भी मिली सफलता

    अस्पताल में कई चुनौतीपूर्ण मामलों में भी डॉक्टरों ने सफलता हासिल की है। 11 वर्षीय कौशिक का सफल ट्रांसप्लांट कर उसे नया जीवन दिया गया, वहीं 33 वर्षीय उपेंद्र का भी सफल ट्रांसप्लांट किया गया। इसके अलावा “सेवियर सिबलिंग” तकनीक के जरिए थैलेसीमिया पीड़ित एक बच्ची का इलाज किया गया, जिसमें IVF और एम्ब्रियो टेस्टिंग की मदद ली गई। यह तकनीक जटिल मामलों में उम्मीद की नई किरण बन रही है।

    हर साल बढ़ रहा ट्रांसप्लांट का आंकड़ा

    पिछले कुछ वर्षों में अस्पताल में ट्रांसप्लांट की संख्या लगातार बढ़ रही है। 2023 में 24 बच्चों और 7 वयस्कों का ट्रांसप्लांट हुआ, जबकि 2024 में 20 बच्चों और 11 वयस्कों का सफल इलाज किया गया। 2025 में 13 बच्चों और 8 वयस्कों का ट्रांसप्लांट हुआ। वहीं 2026 में 25 मार्च तक 5 बच्चों और 2 वयस्कों का ट्रांसप्लांट किया जा चुका है।

    कम लागत में मिल रहा बेहतर इलाज

    सरकारी अस्पतालों में यह इलाज निजी अस्पतालों की तुलना में काफी सस्ता उपलब्ध कराया जा रहा है। जहां निजी अस्पतालों में एक बोन मैरो ट्रांसप्लांट पर करीब 20 लाख रुपए तक खर्च आता है, वहीं यहां गरीब और जरूरतमंद मरीजों को राहत मिल रही है। इलाज के लिए आयुष्मान भारत योजना, पीएम केयर फंड और मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान जैसी योजनाओं के जरिए आर्थिक सहायता भी दी जा रही है।

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    अब अनरिलेटेड डोनर्स से भी मिलेगा इलाज

    अब तक बोन मैरो ट्रांसप्लांट केवल सगे संबंधियों से ही संभव होता था लेकिन राष्ट्रीय पंजीकरण के बाद अब अनरिलेटेड डोनर्स भी उपलब्ध हो सकेंगे। इससे उन मरीजों को बड़ा फायदा मिलेगा, जिनके परिवार में उपयुक्त डोनर नहीं है। डॉक्टरों का कहना है कि इसका उद्देश्य हर जरूरतमंद मरीज को बेहतर और सुलभ इलाज उपलब्ध कराना है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकें।

    Dr. Sumit  Shrivastava
    By Dr. Sumit Shrivastava

    सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...

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