रिटायर्ड IAS की नर्मदा परिक्रमा :पूर्व गृह सचिव बोले-युवा आध्यात्मिक यात्रा जरूर करें, इससे जीवन को देखने का बदलता है नजरिया

सेवानिवृत्त गृह सचिव ओमप्रकाश श्रीवास्तव से पत्नी भारती के साथ नर्मदा परिक्रमा कर रहे हैं। वे इन दिनों जबलपुर के पास भेड़ाघाट पहुंचे हैं। इस मौके पर उन्होंने यात्रा, अध्यात्म आदि विषयों पर पीपुल्स समाचा से विस्तार से बात की।
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पूर्व गृह सचिव बोले-युवा आध्यात्मिक यात्रा जरूर करें, इससे जीवन को देखने का बदलता है नजरिया
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    जबलपुर। जिसके एक आदेश पर सैकड़ों अधिकारी कर्मचारी एकत्र हो जाते थे आज वे अपनी पत्नी के साथ अकेले 7 से 8 किलो का वजन लेकर जंगलों, ऊबड़-खाबड़ रास्तों में चल रहे हैं। हम बात कर रहे हैं सेवानिवृत्त आईएएस ओमप्रकाश श्रीवास्तव की। वे अपनी पत्नी भारती के साथ नर्मदा परिक्रमा करते हुए 106वें दिन बुधवार को जबलपुर के कालीधाम पहुंचे हैं।

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    आस्था, अनुशासन औ आत्मिक शांति की खोज

    श्रीवास्तव की सबसे पहले जॉइनिंग दमोह में डिप्टी कलेक्टर के पद पर हुई थी। इसके बाद वे होशंगाबाद, छिंदवाड़ा, भोपाल, खंडवा, जबलपुर, रीवा में अन्य पदों पर पदस्थ रहे। फरवरी 2025 में गृह सचिव पद से सेवानिवृत हुए। जो अब आस्था, अनुशासन और आत्मिक शांति की खोज में नर्मदा परिक्रमा पर निकले हैं। यह यात्रा न केवल धार्मिक है, बल्कि जीवन को नए सिरे से समझने का एक अनुभव भी है। इस दौरान उनके अनुभव, चुनौतियां और भावनाएं बेहद खास हैं।

    प्रस्तुत है उनसे बातचीत के अंश...

     सवाल : आपने नर्मदा परिक्रमा कब और कहां से शुरू की?

     जवाब : हमने नर्मदा परिक्रमा 15 दिसंबर 2025 को नर्मदापुरम से शुरू की।

     सवाल : इस परिक्रमा को पूरा करने में कितना समय लगेगा?

     जवाब : पूरी परिक्रमा में सामान्यत: 3 से 4 महीने लगते हैं। हमारी योजना है कि हम इसे अप्रैल 2026 तक पूर्ण कर लें। हम जल्दबाजी में नहीं हैं, बल्कि हर पड़ाव को महसूस करते हुए चल रहे हैं। हम रोजाना 24 से 25 किलोमीटर यात्रा कर रहे हैं और 2000 किलोमीटर की यात्रा कर चुके हैं।

    सवाल : अब तक की यात्रा में सबसे खास अनुभव क्या रहा?

    जवाब : सबसे खास अनुभव यह रहा कि नर्मदा के किनारे बसे गांवों में लोगों की सादगी, सेवाभाव और अपनापन अद्भुत है। हमें बिना मांगे भोजन और ठहरने की व्यवस्था हो जाती है। जहां से भी हम निकलते हैं लोग हमें खुद बुलाकर भोजन, चाय-पानी की व्यवस्था करते हैं। ऐसा लगता है जैसे नर्मदा मां खुद हमारी व्यवस्था कर रही हैं।

    सवाल : क्या इस यात्रा में कोई कठिनाई आई?

    जवाब : जी, कई चुनौतियां आईं। कहीं रास्ते कठिन थे, तो कहीं ठहरने की सुविधा नहीं मिली। कई बार लंबी दूरी पैदल चलना पड़ा। लेकिन हर कठिनाई के बाद एक नई ऊर्जा मिलती है।

    सवाल : आपकी पत्नी भारती श्रीवास्तव का अनुभव कैसा रहा?

    जवाब (भारती श्रीवास्तव) : यह यात्रा मेरे लिए आत्मिक रूप से बहुत समृद्ध करने वाली रही है। शुरुआत में लगा था कि इतनी लंबी यात्रा कठिन होगी, लेकिन धीरे-धीरे शरीर और मन दोनों अभ्यस्त हो गए। हर दिन एक नई सीख देता है।

    सवाल : नर्मदा परिक्रमा ने आपके जीवन दृष्टिकोण में क्या बदलाव किया?

    जवाब (ओमप्रकाश श्रीवास्तव): इस यात्रा ने सिखाया कि जीवन में बहुत कम चीजों की वास्तव में जरूरत होती है। सादगी, संतोष और प्रकृति के साथ तालमेल ही असली सुख है।

    सवाल : जबलपुर पहुंचने को लेकर क्या भावना है?

    जवाब : जबलपुर नर्मदा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। यहां पहुंचना हमारे लिए खास है, क्योंकि यह यात्रा का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा होने जैसा है। मैं जबलपुर में 6 वर्ष तक पदस्थ रहा। इस दौरान नगर निगम कमिश्नर और अपर कलेक्टर के रूप में लोगों से जीवंत संपर्क रहा। उसी नगर में पुन: आना मेरे लिए घर आने जैसा है। 

    सवाल : युवाओं के लिए आपका क्या संदेश है?

    जवाब : युवाओं को कभी न कभी ऐसी आध्यात्मिक यात्रा जरूर करनी चाहिए। इससे जीवन को देखने का नजरिया बदलता है और मानसिक शांति मिलती है।

    सवाल : नर्मदा परिक्रमा को लेकर के मन में कहां से विचार आया?

    जवाब : नर्मदा परिक्रमा का संकल्प 20 साल पहले सेवाकाल के दौरान ही कर लिया था। सेवानिवृत्ति के बाद पत्नी भारती के साथ नर्मदा परिक्रमा करूंगा।

    सवाल : परिक्रमा के बाद आपका नर्मदा जी के लिए क्या प्लान है ?

    जवाब : नर्मदा परिक्रमा पूरी करने के बाद इस यात्रा की जो अनुभव हैं उसे पर नर्मदा परिक्रमा किताब लिखूंगा। जिसमें यात्रा का पूरा वृतांत समाहित होगा।

    सवाल : परिक्रमा के दौरान अवैध खनन दिखा?

    जवाब : हां कई जगहों पर देखने को मिला। अवैध उत्खनन करने वाले भी हर-हर नर्मदे करते हैं। कई स्थानों पर बोट पड़ी थीं। इससे पता चलता था कि यहां पर अवैध उत्खनन होता है। 

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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