
श्रीवास्तव की सबसे पहले जॉइनिंग दमोह में डिप्टी कलेक्टर के पद पर हुई थी। इसके बाद वे होशंगाबाद, छिंदवाड़ा, भोपाल, खंडवा, जबलपुर, रीवा में अन्य पदों पर पदस्थ रहे। फरवरी 2025 में गृह सचिव पद से सेवानिवृत हुए। जो अब आस्था, अनुशासन और आत्मिक शांति की खोज में नर्मदा परिक्रमा पर निकले हैं। यह यात्रा न केवल धार्मिक है, बल्कि जीवन को नए सिरे से समझने का एक अनुभव भी है। इस दौरान उनके अनुभव, चुनौतियां और भावनाएं बेहद खास हैं।
जवाब : हमने नर्मदा परिक्रमा 15 दिसंबर 2025 को नर्मदापुरम से शुरू की।
जवाब : पूरी परिक्रमा में सामान्यत: 3 से 4 महीने लगते हैं। हमारी योजना है कि हम इसे अप्रैल 2026 तक पूर्ण कर लें। हम जल्दबाजी में नहीं हैं, बल्कि हर पड़ाव को महसूस करते हुए चल रहे हैं। हम रोजाना 24 से 25 किलोमीटर यात्रा कर रहे हैं और 2000 किलोमीटर की यात्रा कर चुके हैं।
जवाब : सबसे खास अनुभव यह रहा कि नर्मदा के किनारे बसे गांवों में लोगों की सादगी, सेवाभाव और अपनापन अद्भुत है। हमें बिना मांगे भोजन और ठहरने की व्यवस्था हो जाती है। जहां से भी हम निकलते हैं लोग हमें खुद बुलाकर भोजन, चाय-पानी की व्यवस्था करते हैं। ऐसा लगता है जैसे नर्मदा मां खुद हमारी व्यवस्था कर रही हैं।
जवाब : जी, कई चुनौतियां आईं। कहीं रास्ते कठिन थे, तो कहीं ठहरने की सुविधा नहीं मिली। कई बार लंबी दूरी पैदल चलना पड़ा। लेकिन हर कठिनाई के बाद एक नई ऊर्जा मिलती है।
जवाब (भारती श्रीवास्तव) : यह यात्रा मेरे लिए आत्मिक रूप से बहुत समृद्ध करने वाली रही है। शुरुआत में लगा था कि इतनी लंबी यात्रा कठिन होगी, लेकिन धीरे-धीरे शरीर और मन दोनों अभ्यस्त हो गए। हर दिन एक नई सीख देता है।
जवाब (ओमप्रकाश श्रीवास्तव): इस यात्रा ने सिखाया कि जीवन में बहुत कम चीजों की वास्तव में जरूरत होती है। सादगी, संतोष और प्रकृति के साथ तालमेल ही असली सुख है।
जवाब : जबलपुर नर्मदा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। यहां पहुंचना हमारे लिए खास है, क्योंकि यह यात्रा का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा होने जैसा है। मैं जबलपुर में 6 वर्ष तक पदस्थ रहा। इस दौरान नगर निगम कमिश्नर और अपर कलेक्टर के रूप में लोगों से जीवंत संपर्क रहा। उसी नगर में पुन: आना मेरे लिए घर आने जैसा है।
जवाब : युवाओं को कभी न कभी ऐसी आध्यात्मिक यात्रा जरूर करनी चाहिए। इससे जीवन को देखने का नजरिया बदलता है और मानसिक शांति मिलती है।
जवाब : नर्मदा परिक्रमा का संकल्प 20 साल पहले सेवाकाल के दौरान ही कर लिया था। सेवानिवृत्ति के बाद पत्नी भारती के साथ नर्मदा परिक्रमा करूंगा।
जवाब : नर्मदा परिक्रमा पूरी करने के बाद इस यात्रा की जो अनुभव हैं उसे पर नर्मदा परिक्रमा किताब लिखूंगा। जिसमें यात्रा का पूरा वृतांत समाहित होगा।
जवाब : हां कई जगहों पर देखने को मिला। अवैध उत्खनन करने वाले भी हर-हर नर्मदे करते हैं। कई स्थानों पर बोट पड़ी थीं। इससे पता चलता था कि यहां पर अवैध उत्खनन होता है।