जबलपुर। एक पैथोलॉजिस्ट को दो लैबों तक सीमित करने के राज्य सरकार के फैसले को चुनौती देने वाले मामलों पर मप्र हाईकोर्ट में बुधवार को सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने कहा कि अनरजिस्टर्ड लैब में अयोग्य लोगों द्वारा दी जा रहीं गलत रिपोर्ट को लेकर सरकार की चिंता जायज है। लोगों को लैब की सही रिपोर्ट मिलना उनका हक है। बेंच ने सभी पक्षों से पूछा है कि पैथोलॉजी लैब से मिलने वाली रिपोर्ट को लेकर और क्या सुधार किया जा सकता है? बेंच ने सभी पक्षों को सुधार के संबंध में सुझाव देने कहा है, ताकि उन्हें अमल में लाने सरकार को भेजा जा सके। मामलों पर 12 मई को आगे सुनवाई होगी।
हाईकोर्ट में ये मामले महाकौशल एसोसिएशन ऑफ पैथोलॉजिस्ट, एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट मेडिकल प्रैक्टिशनर्स भोपाल, मेडिकल लैब टेक्नीशियन एसोसिएशन, इण्डियन मेडिकल एसोसिएशन और एसोसिएशन ऑफ नर्सिंग होम्स जबलपुर की ओर से दाखिल किए गए हैं। ये सभी मामले सरकार द्वारा जारी उस आदेश से संबंधित हैं, जिसमें एक पैथोलॉजिस्ट को सिर्फ दो लैब में ही सीमित किया गया था। कुछ याचिकाकर्ताओं द्वारा सरकार के आदेश को सही बताया गया, जबकि कुछ उसका विरोध कर रहे हैं।
याचिकाकर्ता महाकौशल एसोसिएशन ऑफ पैथोलॉजिस्ट का कहना है कि मप्र सरकार ने 22 अक्टूबर 2024 को एक आदेश जारी किया था। उसमें साफ तौर पर कहा गया था कि लैब का संचालन सिर्फ वही पैथोलॉजिस्ट कर सकते हैं, जिनके पास पैथोलॉजी में पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री हो। याचिका में आरोप है कि सरकार द्वारा बनाए गए नियम का जमीनी स्तर पर पालन नहीं हो पा रहा है। कई जिलों में गैर-योग्य टेक्नीशियन और अपंजीकृत लोग खुलेआम लैब चलाकर लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं।
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा- ‘यह आम धारणा है कि टेक्नीशियन दिन भर सैंपल की जांच करते हैं और पैथोलॉजिस्ट शाम को लैब में आकर रिपोर्ट पर साइन कर देते हैं। सरकार की मंशा पैथोलॉजिस्ट के अधिकारों को कम करने की नहीं है, बल्कि वह (सरकार) तो चाह रही कि मरीजों को सही रिपोर्ट मिले। रिकॉर्ड पर मौजूद एक दस्तावेज से पता चल रहा है कि एक पैथोलॉजिस्ट 26 लैबों में रिपोर्ट बनाकर दे रहे हैं, जो अलग-अलग जिलों में है। यह कैसे संभव है कि एक व्यक्ति एक ही दिन में अलग-अलग लैबों में जाकर रिपोर्ट साइन कर रहे हैं। यदि ऐसा हो रहा है तो यह चिंताजनक है।’