
वॉशिंगटन के वॉशिंगटन हिल्टन होटल में 1981 और 2026 दोनों बार राष्ट्रपति की मौजूदगी में गोलीबारी हुई। 1981 में रीगन सीधे हमले का शिकार हुए थे, जबकि इस बार ट्रंप सुरक्षित रहे। सीक्रेट सर्विस ने तुरंत कार्रवाई कर संदिग्ध को हिरासत में ले लिया। दोनों घटनाओं ने दिखाया कि हाई सिक्योरिटी के बावजूद खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
वॉशिंगटन हिल्टन होटल का नाम एक बार फिर डर और दहशत से जुड़ गया है। यह वही जगह है जहां 30 मार्च 1981 को तत्कालीन राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन पर जानलेवा हमला हुआ था। उस दिन होटल के बाहर अचानक चली गोलियों ने पूरे अमेरिका को हिला दिया था। अब लगभग 45 साल बाद उसी जगह पर फिर गोलीबारी की घटना सामने आई है। इस बार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बड़े कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। होटल में मौजूद हजारों लोगों के बीच अचानक गोलियों जैसी आवाजें सुनाई दीं। इस घटना ने पुरानी घटना को याद दिला दिया। लोगों को लगा कि इतिहास खुद को दोहरा रहा है। यही कारण है कि इस होटल की पहचान अब सिर्फ एक लक्जरी जगह नहीं, बल्कि एक संवेदनशील सुरक्षा स्थल के रूप में भी हो गई है।
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30 मार्च 1981 को रोनाल्ड रीगन होटल में एक कार्यक्रम के बाद बाहर निकल रहे थे। तभी जॉन हिंकले जूनियर नाम के शख्स ने उन पर गोली चला दी। उसने 22 कैलिबर की रिवॉल्वर का इस्तेमाल किया था। इस हमले में रीगन गंभीर रूप से घायल हो गए थे, हालांकि उनकी जान बच गई। उनके साथ सीक्रेट सर्विस एजेंट, पुलिस अधिकारी और प्रेस सचिव भी घायल हुए थे। प्रेस सचिव जेम्स ब्रैडी की हालत सबसे ज्यादा गंभीर रही और वह जीवनभर के लिए विकलांग हो गए। इस घटना के बाद अमेरिका में राष्ट्रपति सुरक्षा को लेकर बड़े बदलाव किए गए। सीक्रेट सर्विस की रणनीति और सुरक्षा घेरा पहले से कहीं ज्यादा मजबूत किया गया। लेकिन यह घटना आज भी अमेरिकी इतिहास की सबसे बड़ी सुरक्षा चूक में गिनी जाती है।
25 अप्रैल 2026 की रात होटल में व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर चल रहा था। इस कार्यक्रम में करीब 2600 लोग मौजूद थे और माहौल पूरी तरह सामान्य था। तभी अचानक गोलियों जैसी तेज आवाजें सुनाई दीं। पहले लोगों को लगा कि यह कोई तकनीकी गड़बड़ी है, लेकिन जल्द ही स्थिति स्पष्ट हो गई। होटल की लॉबी और बॉलरूम के बाहर 4 से 6 राउंड फायरिंग जैसी आवाजें आईं। इसके बाद अफरा-तफरी मच गई और लोग अपनी सुरक्षा के लिए टेबल के नीचे छिपने लगे। सीक्रेट सर्विस तुरंत सक्रिय हुई। आनन फानन में डोनाल्ड ट्रंप और मेलानिया ट्रंप को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। कुछ ही मिनटों में पूरे इलाके को सील कर दिया गया और संदिग्ध को हिरासत में ले लिया गया। राहत की बात यह रही कि इस घटना में कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है।
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दो अलग-अलग दौर की इन घटनाओं ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या वीवीआईपी सुरक्षा पूरी तरह सुरक्षित है? 1981 के बाद सुरक्षा व्यवस्था को बेहद मजबूत बनाया गया था, लेकिन इसके बावजूद 2026 में ऐसी घटना होना चिंता का विषय है। विशेषज्ञ मानते हैं कि खतरा हर समय बना रहता है और सुरक्षा एजेंसियों को लगातार अपडेट रहना जरूरी है। इस घटना ने यह भी दिखाया कि किसी भी हाई-प्रोफाइल इवेंट में जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता। हालांकि सीक्रेट सर्विस की जल्द कार्रवाई ने एक बड़ी घटना को टाल दिया। लेकिन सवाल यही है कि अगर संदिग्ध अंदर तक पहुंच गया, तो सुरक्षा में कहीं न कहीं चूक जरूर हुई है।