
मंडला। कान्हा टाइगर रिजर्व से एक बार फिर चिंताजनक खबर सामने आई है। यहां बाघों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। महज चार दिनों के भीतर एक ही बाघिन के तीन शावकों की मौत हो गई है। यह मामला अमाही बाघिन (टी-141) से जुड़ा है, जिसके चार शावक थे। अब इनमें से तीन की मौत हो चुकी है और सिर्फ एक शावक बचा है। इस घटना के बाद पार्क की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
शनिवार शाम सरही जोन में एक मादा शावक का शव मिला। यह अमाही बाघिन के तीसरे शावक की मौत थी। इससे पहले दो शावकों की मौत 21 और 24 अप्रैल को हो चुकी थी। वन विभाग ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और आगे की जांच के लिए स्कूल ऑफ वाइल्डलाइफ फॉरेंसिक एंड हेल्थ (SWFH)भेजा गया है। यहां विशेषज्ञों की टीम मौत के असली कारणों की गहराई से जांच करेगी।
इससे पहले जिन दो शावकों की मौत हुई थी, उनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने सभी को चौंका दिया था। अधिकारियों के मुताबिक, दोनों के पेट पूरी तरह खाली थे। इससे यह आशंका जताई गई कि उनकी मौत भूख के कारण हुई। अब तीसरे शावक की मौत के बाद यह सवाल और गहरा गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, करीब 12 महीने के शावक पूरी तरह से स्वतंत्र नहीं होते। वे शिकार करना नहीं सीख पाते और पूरी तरह अपनी मां पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में अगर मां कमजोर हो जाए या शिकार करने में असमर्थ हो, तो शावकों की जान पर सीधा खतरा बन जाता है। इस मामले में भी यही स्थिति सामने आती दिख रही है।
जानकारी के मुताबिक, अमाही बाघिन खुद भी काफी कमजोर हो चुकी है। यही वजह मानी जा रही है कि वह अपने शावकों के लिए पर्याप्त शिकार नहीं कर पा रही थी। वन विभाग ने अब बाघिन को अलग से खाना देना शुरू कर दिया है, ताकि उसकी सेहत सुधारी जा सके।
कान्हा के उप संचालक (कोर) प्रकाश कुमार वर्मा ने बताया कि लगातार हो रही मौतों के कारणों की गहराई से जांच के लिए शव को एसडब्ल्यूएफएच भेजा जा रहा है और सभी निर्धारित प्रोटोकॉल पूरे किए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बचे हुए शावक और बाघिन की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।
कान्हा टाइगर रिजर्व में इस महीने यह चौथी बाघ से जुड़ी मौत है। 5 अप्रैल को एक मादा बाघ टी-122 की मौत हुई थी। इसके बाद 21 और 24 अप्रैल को दो शावकों की जान गई और अब तीसरे शावक की भी मौत हो गई। इतना ही नहीं, 24 अप्रैल को ही पास के बालाघाट जिले के बैहर वन क्षेत्र में भी एक बाघ का शव मिला था। इन घटनाओं ने पूरे क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
कान्हा में बाघों की मौत के आंकड़े डराने वाले हैं। अकेले अप्रैल महीने में ही अब तक 4 बाघों की जान जा चुकी है। वहीं, पिछले 8 महीनों का रिकॉर्ड देखें तो रिजर्व में 10 बाघ और 5 तेंदुओं की मौत हो चुकी है।