Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

कान्हा टाइगर रिजर्व में भूख से मर रहे बाघ के शावक !4 दिन में 3 की मौत, अब आखिरी बच्चे पर टिकी सबकी नजर

कान्हा से आई चौंकाने वाली खबर- महज 4 दिन में अमाही बाघिन के 3 शावकों की मौत ने मचा दिया हड़कंप। शुरुआती जांच में भूख की आशंका, सिर्फ एक शावक बचा और बाघिन भी कमजोर। सच्चाई जानने के लिए शव जबलपुर भेजे गए हैं-अब सबकी नजर फोरेंसिक रिपोर्ट पर टिकी है।
4 दिन में 3 की मौत, अब आखिरी बच्चे पर टिकी सबकी नजर

मंडला। कान्हा टाइगर रिजर्व से एक बार फिर चिंताजनक खबर सामने आई है। यहां बाघों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। महज चार दिनों के भीतर एक ही बाघिन के तीन शावकों की मौत हो गई है। यह मामला अमाही बाघिन (टी-141) से जुड़ा है, जिसके चार शावक थे। अब इनमें से तीन की मौत हो चुकी है और सिर्फ एक शावक बचा है। इस घटना के बाद पार्क की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।

तीसरे शावक का शव मिलने से हड़कंप

शनिवार शाम सरही जोन में एक मादा शावक का शव मिला। यह अमाही बाघिन के तीसरे शावक की मौत थी। इससे पहले दो शावकों की मौत 21 और 24 अप्रैल को हो चुकी थी। वन विभाग ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और आगे की जांच के लिए स्कूल ऑफ वाइल्डलाइफ फॉरेंसिक एंड हेल्थ (SWFH)भेजा गया है। यहां विशेषज्ञों की टीम मौत के असली कारणों की गहराई से जांच करेगी।

पहले दो शावकों की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

इससे पहले जिन दो शावकों की मौत हुई थी, उनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने सभी को चौंका दिया था। अधिकारियों के मुताबिक, दोनों के पेट पूरी तरह खाली थे। इससे यह आशंका जताई गई कि उनकी मौत भूख के कारण हुई। अब तीसरे शावक की मौत के बाद यह सवाल और गहरा गया है।

ये भी पढ़ें: मन की बात : 133वें एपिसोड में पीएम नरेंद्र मोदी बोले- जनगणना दुनिया का सबसे बड़ा अभियान, 1.20 करोड़ घरों की लिस्टिंग पूरी

मां पर ही होते हैं निर्भर

विशेषज्ञों के अनुसार, करीब 12 महीने के शावक पूरी तरह से स्वतंत्र नहीं होते। वे शिकार करना नहीं सीख पाते और पूरी तरह अपनी मां पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में अगर मां कमजोर हो जाए या शिकार करने में असमर्थ हो, तो शावकों की जान पर सीधा खतरा बन जाता है। इस मामले में भी यही स्थिति सामने आती दिख रही है।

बाघिन की हालत भी कमजारे

जानकारी के मुताबिक, अमाही बाघिन खुद भी काफी कमजोर हो चुकी है। यही वजह मानी जा रही है कि वह अपने शावकों के लिए पर्याप्त शिकार नहीं कर पा रही थी। वन विभाग ने अब बाघिन को अलग से खाना देना शुरू कर दिया है, ताकि उसकी सेहत सुधारी जा सके।

अधिकारी बोले- हर पहलू से हो रही जांच

कान्हा के उप संचालक (कोर) प्रकाश कुमार वर्मा ने बताया कि लगातार हो रही मौतों के कारणों की गहराई से जांच के लिए शव को एसडब्ल्यूएफएच भेजा जा रहा है और सभी निर्धारित प्रोटोकॉल पूरे किए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बचे हुए शावक और बाघिन की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।

Breaking News

एक महीने में चौथी बाघ मौत

कान्हा टाइगर रिजर्व में इस महीने यह चौथी बाघ से जुड़ी मौत है। 5 अप्रैल को एक मादा बाघ टी-122 की मौत हुई थी। इसके बाद 21 और 24 अप्रैल को दो शावकों की जान गई और अब तीसरे शावक की भी मौत हो गई। इतना ही नहीं, 24 अप्रैल को ही पास के बालाघाट जिले के बैहर वन क्षेत्र में भी एक बाघ का शव मिला था। इन घटनाओं ने पूरे क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

आठ महीनों में 10 बाघों की मौत

कान्हा में बाघों की मौत के आंकड़े डराने वाले हैं। अकेले अप्रैल महीने में ही अब तक 4 बाघों की जान जा चुकी है। वहीं, पिछले 8 महीनों का रिकॉर्ड देखें तो रिजर्व में 10 बाघ और 5 तेंदुओं की मौत हो चुकी है।

Sona Rajput
By Sona Rajput

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...

Latest Posts