विचित्र किंतु सत्य :750 वैरायटी दिखाने में लग जाता था पूरा दिन, इसलिए एक पेड़ पर लगा दिए 234 तरह के आम, अगले साल इसी पेड़ पर 500 किस्म के फल लगेंगे

नरेश भगोरिया। ये आम का मौसम है। बाजार में देश के कई हिस्सों से अलग-अलग तरह के आम बिकने आ रहे हैं। आम के इस सीजन में आमों की खास बात चल पड़ी है। लखनऊ का केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान आम के एक पेड़ के कारण चर्चा में हैं। इस संस्थान के परिसर में एक पेड़ पर 234 तरह के आम की वैरायटी लगी हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जब इस संस्थान का दौरा किया तो वे खुद इस जानकारी पर आश्चर्यचकित थे।
देश ही नहीं, विदेशों के आम भी लगे इस पेड़ पर
बागवानी संस्थान के आम के पेड़ पर भारत के दशहरी, चौसा, लखनऊ सफेदा, लखनऊ सुनहरा, बैंगनपल्ली, तोतापुरी, हाइब्रिड समृद्धि, अफीम आम्रपाली, लंगड़ा जैसे देसी किस्मों के साथ विदेशी किस्मों के आम भी फल रहे हैं। यह कहा जा सकता है कि एक पेड़ से पूरे भारत के आमों का स्वाद लिया जा सकता है। इसके अलावा विदेशों के एल्डन, टॉमी एटकिन, सेनसेशन जैसे आमों की वैरायटी भी देखने को मिल रही है।
750 वैरायटी दिखाने में पूरा दिन लग जाता था
एक पेड़ पर 234 वैरायटी के आम लगाने का आइडिया कैसे आया यह पूछने पर बागवानी संस्थान के साइंटिस्ट बताते हैं कि यहां सेंट्रल मेंगो रिसर्च स्टेशन भी है, जिसे 1972 में स्थापित किया गया था। 350 एकड़ के कैंपस में 750 वैरायटी के आम लगे हैं। जब कोई अतिथि आता था तो उन्हें आम दिखाने ले जाने पर पूरा दिन लग जाता था। ऐसे में आइडिया आया कि क्यों न एक पेड़ पर कई तरह की वैरायटी लगाई जाए। इससे अतिथियों को कम समय में ज्यादा वैरायटी दिखाई जा सकती है।
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52 फीट के पेड़ को 16 फीट का किया, फिर ग्राफ्टिंग
संस्थान के वैज्ञानिकों और उनकी टीम ने 55 साल पुराने आम के पेड़ को 52 फीट से काट कर 16 फीट का किया। इसके कुछ दिनों बाद इसकी अलग-अलग शाखाखों में अन्य किस्मों के आम की कलम की ग्राफ्टिंग की। करीब 16 महीनों में एक पेड़ पर अलग-अलग वैरायटी के फल लगने लगे।
आम उत्पादाकों के लिए बेहतर प्रयोग
कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने आम उत्पादकों के लिए इसे बेहतर प्रयोग बताया है। वैज्ञानिकों से चर्चा में यह बात सामने आई कि आम उत्पादक अपने पेड़ों पर यह प्रयोग करेंगे तो ज्यादा फायदा ले सकते हैं। जैसे अलग-अलग किस्मों के आम के फल, फूल अलग-अलग समय पर आते हैं।यदि एक ही किस्म के पेड़ लगे हैं तो मौसम बिगड़ने पर सभी फूल झड़ जाते हैं। इसी तरह फलों के अलग-अलग समय पर मैच्योर होने पर अलग-अलग समय पर इन्हें बेचा जा सकता है। ये भी पढ़ें: Deepika Nagar Case Noida : कान से खून, पेट में घाव...ऐसी है दीपिका नागर की पोस्टमार्टम रिपोर्ट
आगे क्या
संस्थान में इस पेड़ पर 500 तरह के आम लगाने की योजना पर काम चल रहा है। जुलाई 2027 तक इस काम को पूरा करने का समय तय किया गया है। उम्मीद की जा रही है कि उसके बाद पेड़ पर 500 वैरायटी के आम देखे जा सकेंगे।
विजिटर्स को ध्यान में रखकर किया था प्रयोग
हमने विजिटर्स को ध्यान में रखकर एक पेड़ पर 200 से ज्यादा वैरायटी के आम लगाने का प्रयोग किया था, इससे समय की बचत होती, लेकिन केंद्रीय कृषि मंत्री की सलाह है कि इसका आर्थिक रूप से भी लाभ लिया जा सकता है। किसान या आम उत्पादक इसे अपना सकते हैं।
डॉ. एचएस सिंह, प्रिंसिपल साइंटिस्ट, बागवानी संस्थान लखनऊ












