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भोपाल:हिट एंड रन मामलों में टॉप पर एमपी, पांच साल में 60 हजार से ज्यादा हादसे; मुआवजा देने में भी सुस्ती

हिट एंड रन के मामलों में मध्यप्रदेश लगातार शीर्ष राज्यों में बना हुआ है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि वर्ष 2024 में प्रदेश में 12 हजार 453 हिट एंड रन मामले दर्ज किए गए। पिछले पांच वर्षों में प्रदेश में ऐसे मामलों की संख्या 60 हजार के पार पहुंच चुकी है। रिपोर्ट के अनुसार, देशभर में हिट एंड रन दुर्घटनाओं का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है।
हिट एंड रन मामलों में टॉप पर एमपी, पांच साल में 60 हजार से ज्यादा हादसे; मुआवजा देने में भी सुस्ती
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अशोक गौतम, भोपाल। वर्ष 2020 में देश में 53,623 मामले दर्ज हुए थे, जो 2024 में बढ़कर 68,584 तक पहुंच गए। अगर हम 2024 के आंकड़ों की बात करें तो प्रदेश में हिंट एंड रन के 12 हजार 453 मामले सामने आए हैं, वहीं दूसरे नंबर पर 11 हजार 209 हादसों के साथ उत्तर प्रदेश है। महाराष्ट्र में 6 हजार 485 और बिहार में 5 हजार 759 हादसे हुए हैं। इससे साफ है कि हिट एंड रन की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं और चिंता का विषय बनी हुई हैं।

एमपी में हर दिन 34 से ज्यादा हिट एंड रन हादसे

2023 में प्रदेश में सबसे ज्यादा 14,093 मामले दर्ज हुए। मौत पर 2 लाख और गंभीर घायल को 50 हजार रुपए मुआवजा दिया गया। केंद्र ने बीमा कंपनियों और जिला समितियों को सख्त निर्देश दिए है। इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि प्रदेश में हिट एंड रन की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। हर दिन औसतन 34 से ज्यादा हादसे होना गंभीर स्थिति को दर्शाता है। लगातार बढ़ते मामलों ने प्रशासन और सरकार की चिंता बढ़ा दी है।

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मुआवजा देने में भी धीमी रफ्तार

केंद्र सरकार ने अप्रैल 2022 से हिट एंड रन मोटर दुर्घटना पीड़ित प्रतिकर योजना लागू की है। इसके तहत दुर्घटना में मौत होने पर दो लाख रुपए और गंभीर रूप से घायल होने पर 50 हजार रुपए देने का प्रावधान है। लोकसभा में पेश रिपोर्ट के अनुसार, दावों के निपटारे की प्रक्रिया अभी भी काफी धीमी है। मध्यप्रदेश में वर्ष 2025-26 के दौरान 929 दावे दर्ज हुए, लेकिन इनमें से केवल 425 मामलों में ही भुगतान हो पाया। इससे पहले वर्ष 2024-25 में 231 दावे दर्ज हुए थे, जिनमें से केवल 133 का ही भुगतान हो सका।

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सरकार के प्रयास

रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार ने योजना में संशोधन कर जिला सड़क सुरक्षा समितियों और राज्य सड़क सुरक्षा परिषदों को निगरानी की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी है। बीमा कंपनियों को लंबित दावों का तेजी से निपटारा करने, दस्तावेज अपलोड करने और जिला स्तर पर समन्वय बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। इन प्रयासों के बावजूद जमीनी स्तर पर अपेक्षित सुधार अभी भी नजर नहीं आ रहा है। सरकार लगातार व्यवस्था को बेहतर बनाने की कोशिश कर रही है।

दावा भुगतान की प्रक्रिया बहुत धीमी 

पीड़ित द्वारा आवेदन करने पर दावा जांच अधिकारी को आवेदन प्राप्त होने की तारीख से एक महीने के भीतर निर्णय करना होता है। इसके बाद दावा निपटान अधिकारी को दावों को स्वीकृत कर आदेश जनरल इंश्योरेंस काउंसिल को भेजने के लिए 15 दिन का समय दिया जाता है। इसके बाद जनरल इंश्योरेंस काउंसिल को 15 दिन के भीतर पीड़ित के खाते में ऑनलाइन राशि ट्रांसफर करनी होती है। यह पूरी प्रक्रिया तय समय सीमा में पूरी होनी चाहिए, लेकिन प्रोसेस में देरी देखने को मिल रही है।

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ये हैं कानूनी प्रावधान

भारत में हिट एंड रन के मामले भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 106 के तहत आते हैं। इसमें चालक की कार्रवाई के आधार पर अलग-अलग दंड का प्रावधान है। धारा 106(1) के तहत यदि कोई चालक लापरवाही से वाहन चलाने के कारण किसी की मृत्यु का कारण बनता है, लेकिन घटना की सूचना तुरंत पुलिस अधिकारी या मजिस्ट्रेट को देता है, तो उसे 5 साल तक की कैद और जुर्माना हो सकता है। वहीं धारा 106(2) के तहत यदि चालक दुर्घटना स्थल से भाग जाता है और अधिकारियों को सूचना दिए बिना फरार हो जाता है, तो सजा बढ़कर 10 साल तक की कैद और भारी जुर्माना हो सकती है।

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...

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