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MP Biosphere Reserves :मप्र में तीन टाइगर रिजर्व को बायोस्फीयर रिजर्व बनाने की तैयारी, यूनेस्को को भेजेंगे डोजियर

मप्र में तीन टाइगर रिजर्व को बायोस्फीयर रिजर्व बनाने की तैयारी है। इसके लिए यूनेस्को को डोजियर भेजे जाएंगे। कान्हा और पेंच का डोजियर अंतिम चरण में है। अगर तीन टाइगर रिजर्व को मंजूरी मिली तो मध्यप्रदेश देश का सबसे बड़ा बायोस्फीयर नेटवर्क वाला राज्य बन जाएगा।
मप्र में तीन टाइगर रिजर्व को बायोस्फीयर रिजर्व बनाने की तैयारी, यूनेस्को को भेजेंगे डोजियर

संतोष चौधरी, भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने कान्हा टाइगर रिजर्व, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व और पेंच टाइगर रिजर्व को बायोस्फीयर रिजर्व का दर्जा दिलाने की कवायद तेज कर दी है। राज्य की नोडल एजेंसी एप्को ने कान्हा और पेंच के लिए यूनेस्को के वर्ल्ड नेटवर्क बायोस्फीयर रिजर्व (WNBR) में शमिल कराने नॉमिनेशन डोजियर को लगभग अंतिम रूप दे दिया है, जबकि बांधवगढ़ को लेकर 26 मई को उच्चस्तरीय बैठक प्रस्तावित है। राज्य सरकार का लक्ष्य अगले तीन माह के भीतर तीनों डोजियर केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के माध्यम से यूनेस्को को भेजने का है। यदि यूनेस्को से मंजूरी मिलती है तो मध्यप्रदेश देश का ऐसा पहला राज्य बन जाएगा, जहां छह बायोस्फीयर रिजर्व होंगे। वर्तमान में प्रदेश में पचमढ़ी बायोस्फीयर रिजर्व, अचानकमार-अमरकंटक बायोस्फीयर रिजर्व और पन्ना बायोस्फीयर रिजर्व को यह दर्जा प्राप्त है।

WNBR से सैद्धांतिक सहमति मिली

जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार ने पहले तीनों टाइगर रिजर्व का प्रारंभिक ड्राफ्ट यूनेस्को की WNBR को भेजा था। वहां से सैद्धांतिक सहमति मिलने के बाद निर्धारित प्रारूप में विस्तृत नॉमिनेशन डोजियर तैयार करने को कहा गया। यूनेस्को की ओर से कुछ तकनीकी सुझाव भी दिए गए थे, जिन्हें शामिल करते हुए डोजियर को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

ये है नेशनल पार्क की खासियत

पेंच:  पौधों की 1500 से ज्यादा प्रजातियां हैं। 70 से ज्यादा औषधिए प्रजातियां भी हैं। यहां सर्प की 30, स्तनधारी की 38, उभयचारी की 7, पक्षियों की 242, मछलियों की 50 प्रजातियां हैं।

कान्हा: सर्प की 55, पक्षियों की 337, स्तनधारियों की 70 और मछलियों की 14 प्रजातियां मौजूद हैं।

बांधवगढ़: यहां रॉयल बंगाल टाइगर सर्वाधिक है। स्तनधारियों की 37 से अधिक , पक्षियों की 250, तितलियों की 80 और सर्प औार पेड़ों की अनेक प्रजातियां है

बायोस्फीयर रिजर्व क्या है?

  • बायोस्फीयर रिजर्व ऐसा संरक्षित क्षेत्र होता है, जहां वन्यजीवों, वनस्पतियों, जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण वैज्ञानिक तरीके से किया जाता है। 
  • इसे संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूनेस्को अपने ‘मैन एंड बायोस्फीयर प्रोग्राम’ के तहत मान्यता देती है। 
  • इसका उद्देश्य प्रकृति संरक्षण और स्थानीय समुदायों के विकास के बीच संतुलन बनाना होता है। 
  • इसमें जंगल, वन्यजीव, औषधीय पौधे, जल स्रोत और पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित रखा जाता है।
  • बायोस्फीयर रिजर्व में रिसर्च, पर्यावरण शिक्षा और इको-टूरिज्म, होम स्टे को भी बढ़ावा दिया जाता है, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार और आर्थिक लाभ मिल सके।
  • यूनेस्को नेटवर्क में शामिल होने से अंतरराष्ट्रीय रिसर्च और फंडिंग के अवसर भी बढ़ते हैं।
  • मध्यप्रदेश को ‘टाइगर स्टेट’ के साथ ‘बायोडायवर्सिटी स्टेट के रूप में नई पहचान मिल सकती है। 

अगले तीन माह में भेजेंगे तीनों प्रस्ताव

कान्हा और पेंच के डोजियर अंतिम चरण में हैं, जबकि बांधवगढ़ को लेकर बैठक के बाद प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। प्रयास है कि तीनों प्रस्ताव अगले तीन माह में यूनेस्को को भेज दिए जाएं।

आलोक नायक, मुख्य वैज्ञानिक अधिकारी,एप्को

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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