जेल में हुई दोस्ती, बाहर आकर बना हनीट्रैप गैंग:क्या श्वेता-अलका ने कारोबारियों और नेताओं को बनाया शिकार?

इंदौर के चर्चित हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग कांड में पुलिस जांच के दौरान चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। शराब कारोबारी हितेंद्र सिंह चौहान उर्फ चिंटू ठाकुर से एक करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने वाले गिरोह की मास्टरमाइंड भोपाल निवासी श्वेता विजय जैन बताई जा रही है। पुलिस जांच में सामने आया है कि श्वेता और शराब तस्करी से जुड़ी अलका दीक्षित की दोस्ती जिला जेल में हुई थी और वहीं से पूरे हनीट्रैप नेटवर्क की पटकथा तैयार हुई।
क्राइम ब्रांच के अनुसार जेल से बाहर आने के बाद दोनों ने मिलकर नेताओं, कारोबारियों और रसूखदार लोगों को जाल में फंसाकर ब्लैकमेलिंग और उगाही का धंधा शुरू कर दिया। पुलिस का दावा है कि यह गैंग पिछले करीब दो वर्षों से सक्रिय था और कई हाईप्रोफाइल लोगों को अपना शिकार बना चुका है। हालांकि बदनामी के डर से कई पीड़ित सामने नहीं आ रहे हैं।
छह दिन की पुलिस रिमांड पर आरोपी
डीसीपी (क्राइम) राजेश त्रिपाठी के मुताबिक मंगलवार को श्वेता जैन, अलका दीक्षित, जयदीप दीक्षित, लाखन चौधरी और जितेंद्र पुरोहित को कोर्ट में पेश किया गया। अदालत ने सभी आरोपियों को छह दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।
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“फंसाओ और वसूली करो” बना गैंग का तरीका
पुलिस जांच में सामने आया है कि अलका पहले से अनैतिक गतिविधियों और शराब तस्करी से जुड़ी रही है। आरोप है कि श्वेता के इशारे पर अलका ने लोगों को जाल में फंसाना शुरू किया और फिर फोटो-वीडियो के जरिए ब्लैकमेल कर रकम वसूली जाती थी।
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भाजपा पदाधिकारी बताकर करता था शिकार की तलाश
पुलिस के अनुसार आरोपी लाखन चौधरी मूल रूप से खंडवा-पीथमपुर क्षेत्र का रहने वाला है और खुद को भाजपा पदाधिकारी बताता था। वह प्रॉपर्टी कारोबार की आड़ में लोगों से संपर्क करता और संभावित शिकार तलाशता था।
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पुलिसकर्मी और कथित मीडियाकर्मी की भूमिका भी जांच में
पूछताछ में प्रधान आरक्षक विनोद शर्मा ने अलका से संपर्क होने की बात स्वीकार की है। पुलिस को शक है कि वह आरोपियों को ब्लैकमेलिंग और दबाव बनाने के तरीके बता रहा था।
कई बड़े नाम सामने आने की आशंका
क्राइम ब्रांच अब आरोपियों के मोबाइल फोन, चैट, सोशल मीडिया कनेक्शन और बैंक लेनदेन की जांच कर रही है। पुलिस को आशंका है कि आने वाले दिनों में कई हाईप्रोफाइल नाम सामने आ सकते हैं।












