हाईटेंशन तारों के नीचे निर्माण पर हाईकोर्ट सख्त, कहा- लोगों की जान के लिए बड़ा खतरा; 25 नवंबर को अगली सुनवाई

जबलपुर। हाईटेंशन बिजली लाइनों के नीचे हो रहे व्यावसायिक और आवासीय निर्माण को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। शुक्रवार को जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजन बेंच ने कहा कि कलेक्टर और नगर तथा ग्राम निवेश विभाग (टीएनसीपी) के बीच समन्वय की कमी के कारण ऐसे निर्माण हो रहे हैं, जो आम लोगों की जान के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। मामले में अदालत ने अनावेदकों को जवाब पेश करने के लिए समय दिया है। अगली सुनवाई 25 नवंबर को निर्धारित की गई है।
हाईटेंशन तारों के नीचे निर्माण की अनुमति पर सवाल
यह जनहित याचिका मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के अधिवक्ता ग्रीष्म जैन और अमित पटेल की ओर से दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि हाईटेंशन बिजली लाइनों के नीचे अवैध बस्तियां और निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। इसके लिए इलेक्ट्रिसिटी एक्ट, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की गाइडलाइंस और भूमि विकास नियम, 2012 के प्रावधानों की अनदेखी किए जाने का दावा किया गया है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, हाईटेंशन तारों के नीचे 15 से 27 मीटर तक के दायरे में निर्माण प्रतिबंधित है। इसके बावजूद टीएनसीपी के संयुक्त संचालक और नगर निगम आयुक्त की ओर से निर्माण कार्यों की अनुमति दिए जाने पर सवाल उठाए गए हैं। याचिका में इन अनुमतियों को नियमों के विपरीत बताया गया है।
मुख्य सचिव समेत 10 पक्षकारों को नोटिस
मामले की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सतीश वर्मा ने पक्ष रखा। सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने राज्य के मुख्य सचिव, शहरी प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव और मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी के प्रबंध निदेशक समेत 10 अनावेदकों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।




















