पीपुल्स संवाददाता, जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने इन्दौर के उस वकील को जवाब देने के निर्देश दिए हैं, जिस पर वहां के एक मजिस्ट्रेट से अभद्रता करने का आरोप है। एक आपराधिक अवमानना मामले पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने कोर्ट में हाजिर हुए वकील को यह भी कहा कि वो अपना जवाब बनाकर पहले किसी सीनियर एडवोकेट को जरूर दिखाएं, उसके बाद ही उसे दाखिल करें। मामले की अगली सुनवाई 28 अप्रैल को निर्धारित करके बेंच ने वकील को फिर से हाजिर होने कहा है।
यह मामला इन्दौर के अधिवक्ता मधुर तिवारी के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई करने हाईकोर्ट को भेजा गया है। प्रकरण के अनुसार अधिवक्ता मधुर तिवारी ने 18 दिसंबर 2025 को न्यायिक दण्डाधिकारी प्रथम श्रेणी मृणाल मोहित की अदालत में एक मुकदमे की पेशी पर हाजिर हुए थे। उन पर आरोप है कि सुनवाई के दौरान उन्होंने न सिर्फ मजिस्ट्रेट के साथ अभद्रता की, बल्कि उन्हें धमकाया भी था। इस पर अधिवक्ता के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई किए जाने की प्रार्थना करके यह मामला हाईकोर्ट को भेजा गया है। इस मामले पर बीते 26 फरवरी को हाईकोर्ट ने अधिवक्ता मधुर तिवारी को नोटिस जारी किए थे।
मामले पर मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान अधिवक्ता मधुर तिवारी हाजिर हुए। उन्होंने कहा कि उन पर जो भी आरोप लगे हैं, वो सभी गलत हैं। उनके खिलाफ दुर्भावनापूर्ण तरीके से कार्रवाई की जा रही है। इस पर बेंच ने कहा कि वे अपनी पूरी बात अपने जवाब में लिखें।
सुनवाई के दौरान अधिवक्ता मधुर तिवारी हाजिर तो हुए, लेकिन वे बैण्ड और गाउन पहने हुए थे। सीजे ने उनसे कहा कि अवमानना मामले की पेशी में वो ऐसा नहीं कर सकते। जब श्री तिवारी बैण्ड उतारने लगे, तब सीजे ने उन्हें रोक दिया। बेंच ने उनसे पूछा कि वो कितने साल से वकालत कर रहे हैं? वकील श्री तिवारी द्वारा 5 साल बताए जाने पर बेंच ने उनसे पूछा कि उन्होंने सीधे वकालत शुरू की या किसी सीनियर के अण्डर थे? जवाब में कहा कि उन्होंने सीधे प्रैक्टिस शुरू की है। इस पर बेंच ने उन्हें कहा कि वो जो भी जवाब बनाएं, वो किसी सीनियर एडवोकेट को जरूर दिखाएं।