
इंदौर। शहर के रेलवे स्टेशन के यार्ड में खड़ी ट्रेन में 8 जून को महिला का टुकड़ों में शव मिला था। अज्ञात महिला के शव की पहचान बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। इसी के साथ जीआरपी थाना पुलिस ने सनसनीखेज अंधे कत्ल का खुलासा भी कर दिया है। इस हत्याकांड का खुलासा करने में 60 साल के बुजुर्ग आरोपी की मूक बधिर पत्नी ने अहम भूमिका निभाई।
इंदौर के बाद ऋषिकेश में मिले थे शव के हिस्से
जानकारी के मुताबिक, 8 जून, 2024 को रेलवे स्टेशन के यार्ड में खड़ी ट्रेन में महिला का टुकड़ों में शव मिला था। यह शव इंदौर-महू-नागदा के बीच चलने वाले पैसेंजर ट्रेन में अलग-अलग टुकड़े कर के रखा गया था। शव के टुकड़े रेगजीन के ट्रॉली बैग और बोरे में बंद कर रखे गए थे। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची जीआरपी ने मामले की जांच शुरू कर दी थी, लेकिन महिला के कई अंग तब नहीं मिले थे। अब ये बाकी के हिस्से ऋषिकेश में मिले हैं। शव के बाकी के हिस्से 10 जून को रेल्वे स्टेशन ऋषिकेश (उत्तराखंड) में मिल थे। इंदौर से ऋषिकेश जाने वाली योग नगरी ऋषिकेश एक्सप्रेस ट्रेन में बोरी में बंधा रखा मिला।
हाथ पर गुदा नाम से हुई महिला की शिनाख्त
शव के हाथ पर मीरा बेन गोपाल भाई का गुदा हुआ गोदना मिला। जीआरपी थाना इंदौर द्वारा अपराध क्रमांक 133/2024 धारा 302,201 भादवि का पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया। जांच में महिला के गुजराती होने की जानकारी मिली, साथ ही पुलिस ने इस नाम की गुमशुदा महिलाओं की डिटेल खंगाली। तलाश में थाना बिलपांक जिला रतलाम की गुमशुदा महिला मीराबाई पति भंवरलाल डामर का हुलिया एवं गुमशुदगी का मिलान होने पर परिजनों से संपर्क किया। मृतिका के पास के मिले सामान व हाथ का गुदना बताकर भंवरलाल ने मृतिका को अपनी पत्नी मीरा बाई होना बताया। इसके बाद पुलिस आरोपी की तलाश करते हुए संदेही कमलेश पिता रामप्रसाद पटेल (60) निवासी ग्राम पिपरोनिया थाना बाला बेहट जिला ललितपुर (उप्र) के बारे में सूचना मिला। यह 15 सालों से हीरा मील की चाल थाना देवास गेट उज्जैन में रहता है।
मूक बधिर ने खोला राज
पुलिस ने संदेही कमलेश की मूक बधिर पत्नी से घटना के संबध में जानकारी प्राप्त की। इसके लिए मूक बधिर विशेषज्ञ की सहायता ली गई। जबकि आरोपी द्वारा घटना के संबध में गलत जानकारी दी जा रही थी। लेकिन घटना के साक्ष्यों के आधार पर उसने हत्या करना स्वीकार कर लिया।
ऐसे दिया था वारदात को अंजाम
पुलिस ने बताया कि गुरुवार 6 जून को मीरा बेन ने अपने पति और बेटियों से कहा था कि वह उज्जैन और वहां से मथुरा जाएगी। उज्जैन में मथुरा जाने वाली ट्रेन का इंतजार कर रही थी। तभी आरोपी कमलेश पिता रामप्रकाश कुर्मी ने उसे देख लिया। महिला ने अपनी बात बताई तो कमलेश ने कहा कि मथुरा की ट्रेन निकल चुकी है। तुम मेरे घर चलो वहां खाना खा लेना। इसके बाद दूसरी ट्रेन में बैठा दूंगा।
आरोपी कमलेश ने महिला को बहला फुसलाकर अपने घर ले आया और रातभर अपने घर में रखा। 7 जून की सुबह आरोपी कमलेश ने शारीरिक संबध बनाने के लिए मृतिका मीरा को नींद की गोली खाने में मिलाकर खिला दी, जिससे मृतिका को बेहोशी आने लगी, आरोपी ने मृतिका मीरा के साथ शारीरिक संबध बनाने का प्रयास करने लगा, लेकिन मीरा पूरी तरह बेहोश नहीं हुई थी, इसलिए उसने उसका विरोध कर चिल्लाने लगी। तभी ने कमलेश ने लोहे के टुकड़े से मीरा बेन के चेहरे पर मार दिया। जिससे वह बेहोश हो गई।
आरोपी कमलेश ने रस्सी से गला घोटकर मीरा बाई की हत्या कर दी। उसकी लाश को ठिकाने लगाने के लिए उसने बाजार से एक लोहे का सतुर (छुरा) खरीदा और शरीर काटकर बैग तथा बोरियों में भरकर रखा, ताकि पहचान न हो सके। अलग-अलग तीन पैकिंग की, जिसमें से दो पैकिंग 8 जून को सुबह उज्जैन पर रुकी हुई इंदौर नागदा पैसेंजर ट्रेन में बैग एवं बोरी सीट के नीचे जमाकर रखा तथा बाद में शाम को एक पैकिंग इंदौर देहरादून ट्रेन के उसी स्थान पर खड़ी होने पर कोच की कपलिंग में रख घर में छिप गया।
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