बनियान या इनरवियर सिर्फ एक लेयरिंग कपड़ा नहीं होता। इसका काम शरीर को कंफर्ट देना और हाइजीन बनाए रखना है। यह पसीना सोखती है और त्वचा को सख्त कपड़ों से बचाती है। बनियान शरीर और शर्ट के बीच एक ऐसी परत बनाती है, जो पसीने के दाग और बदबू को कम करती है।
अक्सर पुरुष सालों पुरानी बनियान पहनते रहते हैं क्योंकि वह न फटी होती है और न ही देखने में ज्यादा खराब लगती है। लेकिन सिर्फ फटना ही यह तय नहीं करता कि बनियान इस्तेमाल लायक है या नहीं।
एक्सपर्ट्स के अनुसार, बनियान सीधे त्वचा के संपर्क में रहती है और पसीना सोखती है। लंबे समय तक इस्तेमाल करने से इसके सूती रेशे कमजोर हो जाते हैं। बार-बार पसीना और धुलाई होने से कपड़े की बैक्टीरिया रोकने की क्षमता खत्म हो जाती है।
भले ही बनियान ऊपर से ठीक दिखे, लेकिन उसके अंदर डेड स्किन सेल्स और बैक्टीरिया जमा हो सकते हैं, जो सामान्य धुलाई से भी पूरी तरह नहीं जाते।
पुरानी बनियान का कपड़ा समय के साथ पतला हो जाता है और उसकी फिटिंग खराब हो जाती है। इससे रैशेज, खुजली और स्किन इंफेक्शन का खतरा बढ़ता है। पसीना और नमी जितनी देर फंसी रहती है, बैक्टीरिया और फंगस उतनी तेजी से बढ़ते हैं।
एक्सपर्ट्स के अनुसार, 100% कॉटन की बनियान सबसे अच्छी होती है। यह हवा पास करती है और नमी सोख लेती है।