बालोद। जिले में अन्य पिछड़ा वर्ग से जुड़े सेन समाज की जिला स्तरीय बैठक में कई नए सामाजिक नियम लागू करने का निर्णय लिया गया है। समाज की आबादी राज्य में लगभग सवा दो लाख बताई जाती है, जिनमें से करीब 70 प्रतिशत लोग पारंपरिक रूप से सैलून का कार्य करते हैं। जिला अध्यक्ष संतोष कौशिक ने बताया कि बैठक में समाज में बढ़ती सगाई टूटने की घटनाओं पर गंभीर चर्चा हुई, जिसके बाद कुछ नए दिशा-निर्देश तय किए गए। इन नियमों का उद्देश्य पारिवारिक विवादों को कम करना और वैवाहिक संबंधों को स्थिर बनाना बताया गया।
बैठक में सबसे अहम फैसला यह लिया गया कि सगाई के बाद होने वाले दूल्हा-दुल्हन अब मोबाइल फोन पर निजी रूप से बातचीत नहीं करेंगे। अध्यक्ष संतोष कौशिक के अनुसार, समाज की पुरानी नियमावली में ऐसा कोई प्रावधान नहीं था, लेकिन हाल के वर्षों में टूटते रिश्तों की वजह जानने पर यह सामने आया कि सगाई के बाद फोन पर होने वाली बातचीत कई बार विवाद का कारण बनती है। ऐसे में अब यह तय किया गया है कि यदि किसी जरूरी कारण से बातचीत करनी हो, तो वह माता-पिता की मौजूदगी में ही की जाएगी।
समाज की बैठक में पारंपरिक विवाह रस्मों से जुड़े कुछ बदलाव भी किए गए हैं। समाज के प्रवक्ता उमेश कुमार सेन ने बताया कि अब विवाह के दौरान दुल्हन की बहनों द्वारा दूल्हे का जूता छिपाने की रस्म नहीं होगी, क्योंकि इससे दोनों पक्षों के बीच विवाद की स्थिति उत्पन्न होती है। इसके अलावा सगाई समारोह में मेहमानों की संख्या 15 से 20 लोगों तक सीमित रखने, विवाह के दौरान मुहूर्त का विशेष ध्यान रखने तथा प्लास्टिक के बजाय पत्तल में भोजन परोसने जैसे निर्णय भी लिए गए हैं।
बैठक में एक सख्त सामाजिक नियम भी लागू किया गया है। तय किया गया कि यदि समाज का कोई सदस्य अन्य धर्म अपनाता है, तो उसके साथ रोटी-बेटी का संबंध समाप्त कर दिया जाएगा। सेन समाज के प्रदेश संगठन मंत्री गौरी शंकर श्रीवास ने बताया कि बालोद जिले में लिए गए इन फैसलों की जानकारी उन्हें है और वे चाहते हैं कि भविष्य में इन्हें प्रदेश स्तर पर भी लागू किया जाए। उनका कहना है कि सगाई टूटने की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है।
इन फैसलों को लेकर समाज के भीतर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। बालोद की 20 वर्षीय साक्षी ने इस निर्णय का समर्थन करते हुए कहा कि यदि मोबाइल बातचीत रिश्ते टूटने का कारण बन रही है, तो ऐसे नियम परिवार और समाज दोनों के हित में हो सकते हैं। वहीं, पेशे से पत्रकार पूनम ऋतु सेन ने इस पर पुनर्विचार की जरूरत बताई है। उनका कहना है कि विवाह जीवन का महत्वपूर्ण निर्णय है और इसमें भावी जीवनसाथी को समझने का अवसर मिलना चाहिए। ऐसे में सगाई के बाद बातचीत पर पूर्ण प्रतिबंध व्यक्तिगत स्वतंत्रता के दृष्टिकोण से एक बड़ा प्रश्न खड़ा करता है।