मुंबई। तीन दिनों की लगातार मजबूती के बाद गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में अचानक आई भारी गिरावट ने निवेशकों को चौंका दिया। सप्ताह की शुरुआत में सकारात्मक माहौल के बीच बाजार मजबूती दिखा रहा था, लेकिन दोपहर बाद बिकवाली का ऐसा दबाव बना कि पूरा बाजार लाल निशान में बंद हुआ। दिनभर की उथल-पुथल के बाद बाजार पूंजीकरण में करीब 7 लाख करोड़ रुपए की कमी दर्ज की गई, जो निवेशकों की बढ़ती सतर्कता को दर्शाता है।
दिन की शुरुआत उत्साहजनक रही और शुरुआती कारोबार में दोनों प्रमुख सूचकांक मजबूती के साथ खुले। हालांकि, यह तेजी ज्यादा देर टिक नहीं सकी। कारोबार के दौरान बिकवाली धीरे-धीरे तेज होती गई और अंत तक बाजार पर पूरी तरह हावी हो गई। अंततः सेंसेक्स 1236 अंकों की गिरावट के साथ 82,498.14 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 365 अंक टूटकर 25,454.35 के स्तर पर आ गया। दिन के उच्च स्तर से निचले स्तर तक का सफर बाजार की कमजोरी को साफ तौर पर दर्शाता है।
सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो सबसे बड़ी चोट रियल्टी शेयरों को लगी। निवेशकों की चिंता बढ़ती ब्याज दरों और महंगी फंडिंग लागत को लेकर साफ नजर आई, जिसका असर सीधे इस सेक्टर पर पड़ा। इसके अलावा मीडिया और ऑटो सेक्टर में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। कुल मिलाकर, बाजार में कमजोरी व्यापक रही, लेकिन रियल्टी सेक्टर गिरावट का केंद्र बना रहा।
गिरावट केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी दबाव देखा गया। मिडकैप इंडेक्स और स्मॉलकैप इंडेक्स दोनों में गिरावट ने संकेत दिया कि निवेशकों ने व्यापक स्तर पर जोखिम कम करना शुरू कर दिया है। इसका मतलब यह है कि बाजार की कमजोरी किसी एक सेक्टर या कुछ कंपनियों तक सीमित नहीं थी, बल्कि पूरी बाजार संरचना पर असर पड़ा।
बाजार में गिरावट कई कारणों के संयुक्त असर का परिणाम रही। तीन दिन की तेजी के बाद निवेशकों ने ऊंचे स्तर पर मुनाफावसूली की। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती ने महंगाई की आशंका बढ़ाई। अमेरिकी फेड की ब्याज दर नीति को लेकर अनिश्चितता ने विदेशी निवेश प्रवाह पर दबाव डाला। तकनीकी स्तरों पर निर्णायक ब्रेकआउट न मिलने से ट्रेडर्स सतर्क रहे। साथ ही बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में कमजोरी ने बाजार की दिशा को और नकारात्मक बना दिया।
दिनभर की हलचल से यह साफ है कि बाजार अभी भी वैश्विक संकेतों और ब्याज दरों के रुख पर काफी निर्भर है। ऐसे में निवेशकों के लिए फिलहाल सतर्क रणनीति अपनाना ही बेहतर माना जा रहा है।