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सामूहिक प्रयास से महिलाएं बनीं घर के लिए आर्थिक सहारा

भिंड में स्वसहायता समूह से 109 महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर, सिलाई-कढ़ाई व सैनेट्री पैड बनाकर बदली जिंदगी
सामूहिक प्रयास से महिलाएं बनीं घर के लिए आर्थिक सहारा

लाजपत अग्रवाल-ग्वालियर। कोरोना के दंश ने जब कई परिवार उजाड़ दिए तब संगिनी महिला स्वसहायता समूह ने आर्थिक दृष्टि से उजड़ चुके परिवारों के लिए मदद का हाथ बढ़ाया। जिन परिवारों के कमाने वाले मुखिया चले गए उनको रेखा शुक्ला गजना (अटेर) की महिला ने सिलाई-कढ़ाई के अलावा सैनेट्री नेपकिन बनाना सिखाया। धीरे-धीरे 109 महिलाएं इस काम से जुड़ गईं। खास बात यह है कि रेखा शुक्ला लखपति दीदी में शुमार भी हो चुकी हैं।

समूह गजना से बढ़कर महाराजपुरा (ग्वालियर) तक पहुंच गया। कुछ महिलाओं ने सैनेट्री नैपकिन बनाना शुरू किया, तो कई महिलाओं ने गांव में घर-घर में नैपकिन पहुंचाने का काम किया। शुरूआती दिनों में झिझक दिखी फिर गांव की महिलाओं ने बाजार की अपेक्षा घर पहुंचने वाली महिलाओं से नैपकिन खरीदना शुरू कर दिया। कोरोना से पहले रेखा शुक्ला शुद्ध घरेलू महिला थीं, लेकिन अब स्थानीय लोगों के बीच स्वच्छता के मामले में ब्रांड एम्बेसडर बन चुकी हैं।

गरीब महिलाओं को घर पर जाकर दे रहीं पैड

संगनी महिला समूह द्वारा तैयार किए जाने वाले सैनेट्री नैपकिन की लागत प्रति नैपकिन 10 रुपए निर्धारित की है। यह भी देखने में आया है कि आर्थिक रूप से जर्जर महिलाओं को इन नैपकिन को घरों पर जाकर नि:शुल्क दिया गया।

प्रति सदस्य 5 हजार कमा लेती हैं महिलाएं

जीरो से शुरू हुआ संगनी ग्राम महिला सहायता समूह खर्चे निकालकर 50 लाख रुपए कमा रहा है। सभी के बीच 5-5 हजार के मान से पगार भी तय कर ली गई है। इस नवाचार के पीछे सरकार का कोई सहयोग नहीं लिया गया है।

संगिनी समूह की कर्मठता और लगन से हर महिला अपने परिवार के लिए आर्थिक सहारा बन चुकी है। - रेखा शुक्ला, गजना (अटेर )

कोरोना काल में परिवार जब संकट में था तो रेखा शुक्ला और उमा शर्मा जैसी महिलाएं हम लोगों के लिए सहारा बन गईं। - रजनी सिंह, भिंड

People's Reporter
By People's Reporter

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