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रात में दिखेगा सूरज?क्या है अमेरिका का 'रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल' स्टॉर्टअप; जिसमें लगेंगे 50 हजार शीशे

इस तकनीक का इस्तेमाल सस्ता नहीं होगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी एक मिरर की रोशनी के लिए करीब 4.6 लाख रुपये यानी लगभग 5,000 डॉलर प्रति घंटे तक शुल्क ले सकती है। 
क्या है अमेरिका का 'रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल' स्टॉर्टअप; जिसमें लगेंगे 50 हजार शीशे
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    क्या रात में सूर्य जैसी रोशनी देखना संभव है? सुनने में यह किसी साइंस फिक्शन फिल्म जैसा लगता है, लेकिन अब इसे हकीकत बनाने की तैयारी शुरू हो चुकी है। अमेरिका की कंपनी रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल  एक ऐसे अनोखे प्रोजेक्ट पर काम कर रही है, जिसके तहत अंतरिक्ष में बड़े-बड़े शीशे भेजकर रात में भी सूरज की रोशनी पृथ्वी तक पहुंचाई जाएगी।

    स्थापित किए जाएंगे 50 हजार बड़े शीशे

    कंपनी का लक्ष्य है कि पृथ्वी के चारों ओर करीब 50,000 बड़े मिरर स्थापित किए जाएं। ये मिरर अंतरिक्ष में रहकर सूरज की रोशनी को रिफ्लेक्ट करेंगे और रात के समय धरती के चुने हुए हिस्सों को रोशन करेंगे। शुरुआत में कंपनी एक छोटे प्रोटोटाइप के साथ प्रयोग करेगी, जिसमें लगभग 60 फीट चौड़ा मिरर होगा। यह मिरर करीब 3 मील के इलाके को रोशन करने में सक्षम बताया जा रहा है। जमीन से देखने पर यह किसी चमकते तारे या पूर्णिमा के चांद जैसा दिखाई दे सकता है।

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    4.6 लाख रुपए चुकाना होंगे

    इस तकनीक का इस्तेमाल सस्ता नहीं होगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी एक मिरर की रोशनी के लिए करीब 4.6 लाख रुपये यानी लगभग 5,000 डॉलर प्रति घंटे तक शुल्क ले सकती है। यह कीमत उन ग्राहकों के लिए होगी जो सालभर का लंबा अनुबंध करेंगे। ऐसे में यह सेवा शुरुआती दौर में केवल बड़े उद्योगों या विशेष परियोजनाओं के लिए ही संभव नजर आती है।

    CEO ने दी जानकारी

    कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी Ben Nowack का कहना है कि इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य भविष्य के लिए वैकल्पिक ऊर्जा समाधान तैयार करना है। उनका मानना है कि अगर यह तकनीक सफल होती है, तो यह फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता कम करने में मदद कर सकती है और दूर-दराज के इलाकों में भी रोशनी पहुंचाई जा सकती है।

    28 मिलियन डॉलर मिल चुका

    इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए कंपनी को अब तक करीब 28 मिलियन डॉलर की फंडिंग मिल चुकी है। यदि शुरुआती परीक्षण सफल रहते हैं, तो आने वाले वर्षों में हजारों सैटेलाइट लॉन्च किए जा सकते हैं। यह प्रोजेक्ट भले ही अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन अगर यह सफल होता है तो दुनिया के लिए रात और दिन के फर्क को हमेशा के लिए बदल सकता है।

    Aakash Waghmare
    By Aakash Waghmare

    आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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