NEET 2026 :दिवंगत मां का अधूरा सपना पूरा करने निकले 71 साल के अशोक बहार, पास करना चाहते हैं NEET

जहां ज्यादातर छात्र 17-18 साल की उम्र में NEET परीक्षा देकर डॉक्टर बनने का सपना देखते हैं, वहीं अशोक ने 70 साल की उम्र में परीक्षा देकर सबको चौंका दिया। लखनऊ के आलमबाग इलाके के रहने वाले अशोक बहार ने NEET-UG 2026 परीक्षा सिर्फ एक डिग्री के लिए नहीं, बल्कि अपनी दिवंगत मां का सपना पूरा करने के लिए दी है। उनका कहना है कि मां हमेशा चाहती थीं कि बेटा डॉक्टर बने, लेकिन जिंदगी की जिम्मेदारियों के बीच यह सपना अधूरा रह गया। अब रिटायरमेंट के बाद उन्होंने इसे पूरा करने की ठानी है, पढ़िएं उनकी पूरी कहानी।
मेरे पास अनुभव और समझ है लेकिन डिग्री नहीं
अशोक बहार ने बताया कि मेडिकल फील्ड से उनका पुराना जुड़ाव रहा है। सालों से उन्होंने दवाइयों और इलाज से जुड़ी काफी जानकारी हासिल की, लेकिन बिना मेडिकल डिग्री के वह औपचारिक रूप से मरीजों का इलाज नहीं कर सकते। उन्होंने कहा, मेरे पास अनुभव और समझ तो है, लेकिन डॉक्टर कहलाने के लिए डिग्री जरूरी है। इसलिए मैंने NEET देने का फैसला किया।
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मार्केटिंग हेड से लेकर मेडिकल की राह
अशोक बहार पहले एक खाद बनाने वाली कंपनी में मार्केटिंग हेड के पद पर काम कर चुके हैं। उन्होंने साल 2000 में प्री-रिटायरमेंट ले लिया था।दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने पहले लॉ और बिजनेस की पढ़ाई की थी। उनके पास LLB और MBA जैसी डिग्रियां हैं। इसके बावजूद डॉक्टर बनने का सपना उनके मन में हमेशा जिंदा रहा।
पत्नी अमेरिका में डॉक्टर, परिवार से मिला पूरा साथ
अशोक बहार की पत्नी डॉ. मंजुल बहार स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं और फिलहाल अमेरिका में हैं। परिवार के कई सदस्य भी मेडिकल फील्ड से जुड़े हुए हैं। अशोक कहते हैं कि परिवार ने कभी उनकी उम्र को बाधा नहीं माना। उल्टा सभी ने उन्हें इस फैसले के लिए प्रोत्साहित किया। यही वजह रही कि उन्होंने फिर से किताबें उठाईं और NEET की तैयारी शुरू कर दी।
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पिछले साल तमिलनाडु के इन बुजुर्गों ने भी रचा इतिहास
अशोक बहार की कहानी अकेली नहीं है। इससे पहले तमिलनाडु में 60, 67 और 68 साल की उम्र के तीन बुजुर्ग NEET परीक्षा पास कर चुके हैं। इनमें दो लोग पेशे से वकील रहे हैं, लेकिन अब उन्होंने वकालत छोड़कर डॉक्टर बनने का फैसला किया है। वे मेडिकल कॉलेज में MBBS में एडमिशन लेकर नई शुरुआत करने जा रहे हैं।
सीखने की कोई उम्र नहीं
68 वर्षीय एक उम्मीदवार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि डॉक्टर बनने का सपना बचपन से था, लेकिन जिंदगी की भागदौड़ में वह पूरा नहीं हो सका। रिटायरमेंट के बाद उन्होंने दोबारा पढ़ाई शुरू की और दिन-रात मेहनत कर परीक्षा पास की। उनका कहना है कि अब वे डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करना चाहते हैं।
उम्र नहीं, जज्बा मायने रखता है
इन कहानियों ने साबित कर दिया है कि सीखने और सपने पूरे करने की कोई उम्र नहीं होती। जहां एक तरफ लाखों युवा NEET की तैयारी कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अशोक बहार जैसे लोग यह संदेश दे रहे हैं कि अगर इरादे मजबूत हों, तो जिंदगी के किसी भी मोड़ पर नई शुरुआत की जा सकती है।











