धार भोजशाला पर हाईकोर्ट का फैसला आज :1200 पुलिसकर्मी तैनात, 12 लेयर में बंटी सुरक्षा व्यवस्था

इंदौर/धार। धार की भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद मामले में आज मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच अहम फैसला सुना सकती है। वर्षों पुराने इस संवेदनशील मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद डबल बेंच ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। फैसले को देखते हुए धार और इंदौर प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। शुक्रवार होने के कारण संवेदनशीलता और बढ़ गई है, क्योंकि इसी दिन मुस्लिम समाज परिसर में जुमे की नमाज अदा करता है।
सोशल मीडिया पर भी प्रशासन की नजर
प्रशासन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी लगातार निगरानी रख रहा है। अफवाह, भड़काऊ पोस्ट या आपत्तिजनक सामग्री साझा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने और अपुष्ट जानकारी साझा नहीं करने की अपील की गई है। एसपी सचिन शर्मा ने पुलिस कंट्रोल रूम पहुंचकर तैयारियों की समीक्षा की। प्रशासन ने दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने और अफवाहों से बचने की अपील की है।
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सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी बातें
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1200 पुलिसकर्मी तैनात, 12 लेयर सुरक्षा घेरा
फैसले के मद्देनजर प्रशासन ने धार शहर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। जिलेभर से करीब 1200 पुलिसकर्मियों को बुलाया गया है। शहर की सुरक्षा 12 लेयर में की गई है, ताकि किसी भी स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
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RAF और रिजर्व पुलिस बल भी अलर्ट पर
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रिजर्व पुलिस बल और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) को भी तैनात किया गया है। पुलिस कंट्रोल रूम से लगातार पूरे शहर की मॉनिटरिंग की जा रही है। एसपी सचिन शर्मा ने कंट्रोल रूम पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा की और पुलिस अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए।
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2022 में हाईकोर्ट पहुंचा था मामला
यह विवाद 2022 में तब हाईकोर्ट पहुंचा, जब रंजना अग्निहोत्री और अन्य ने हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से याचिका दायर की। याचिका में भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय करने और हिंदू समाज को पूर्ण अधिकार देने की मांग की गई थी।
हिंदू पक्ष की प्रमुख मांगें
- नियमित पूजा-अर्चना का अधिकार
- परिसर में नमाज पर रोक
- ट्रस्ट गठन
- ब्रिटिश म्यूजियम से मां वाग्देवी की प्रतिमा वापस लाना
- ASI ने किया था 98 दिन का सर्वे
2024 में ASI ने भोजशाला परिसर का 98 दिन तक वैज्ञानिक सर्वे किया था। इसके बाद 23 जनवरी 2026 को वसंत पंचमी पर सुप्रीम कोर्ट ने दिनभर पूजा-अर्चना की अनुमति दी थी। हाईकोर्ट में 6 अप्रैल से नियमित सुनवाई शुरू हुई, जो 12 मई तक चली।
हिंदू पक्ष ने क्या तर्क दिए?
हिंदू पक्ष ने भोजशाला को मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर और विद्या केंद्र बताया। अधिवक्ताओं ने ASI सर्वे, शिलालेख, स्थापत्य अवशेष और वसंत पंचमी पर वर्षों से चली आ रही पूजा परंपरा का हवाला दिया। अधिवक्ता मनीष गुप्ता ने परमार राजा भोज के ग्रंथ ‘समरांगण सूत्रधार’ का जिक्र करते हुए कहा कि भोजशाला की संरचना मंदिर निर्माण के प्राचीन मानकों से मेल खाती है।
मुस्लिम पक्ष ने उठाए सवाल
मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट में कहा कि परिसर लंबे समय से कमाल मौला मस्जिद के रूप में इस्तेमाल होता रहा है और धार्मिक स्वरूप तय करने का अधिकार सिविल कोर्ट के पास है।
वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने ASI सर्वे रिपोर्ट की तस्वीरों और वीडियोग्राफी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अयोध्या मामले की तरह यहां कोई स्थापित मूर्ति मौजूद नहीं है।











