भारत में सबसे कम बढ़े दाम!पाकिस्तान-नेपाल समेत दुनियाभर में कितने में बिक रहा पेट्रोल-डीजल? BJP ने शेयर की रेट लिस्ट

देश में पेट्रोल-डीजल 3 रुपए महंगा होने के बाद सियासत तेज हो गई है। विपक्ष ने सरकार पर हमला बोला, जबकि भाजपा ने वैश्विक तुलना में भारत को बेहतर बताया। जानिए होर्मुज संकट, अंतरराष्ट्रीय कीमतें और भारत में बढ़ोतरी का असर।
पाकिस्तान-नेपाल समेत दुनियाभर में कितने में बिक रहा पेट्रोल-डीजल? BJP ने शेयर की रेट लिस्ट

नई दिल्ली। शुक्रवार सुबह देशवासियों को एक बड़ा झटका लगा, जब पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3-3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी गई। इसके साथ ही सीएनजी भी 2 रुपए महंगी हो गई। इस फैसले ने जहां आम लोगों की जेब पर असर डाला, वहीं सियासी गलियारों में भी हलचल तेज कर दी। विपक्ष ने इसे ‘जनता पर हंटर’ बताया, जबकि सरकार ने वैश्विक हालात का हवाला देकर अपने फैसले को जायज ठहराया।

चार साल बाद बढ़े दाम

भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में यह बढ़ोतरी करीब चार साल बाद की गई है। सरकारी तेल कंपनियों ने 23 फरवरी 2026 से लेकर 15 मई 2026 तक कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया था, जबकि इस दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल देखा गया।

बताया जा रहा है कि, कंपनियां लंबे समय से घाटे में चल रही थीं और रोजाना करीब 1000 करोड़ रुपए तक का नुकसान झेल रही थीं। ऐसे में कीमतों को बढ़ाना मजबूरी बन गया था। सरकार का कहना है कि, लंबे समय तक कीमतों को स्थिर रखकर उपभोक्ताओं को राहत दी गई, लेकिन अब वैश्विक दबाव के चलते यह कदम उठाना पड़ा।

विपक्ष का हमला- ‘चुनाव खत्म, वसूली शुरू’

ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी होते ही कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। कांग्रेस ने इसे चुनावी राजनीति से जोड़ते हुए आरोप लगाया कि जैसे ही चुनाव खत्म हुए, सरकार ने जनता पर बोझ डालना शुरू कर दिया। विपक्ष ने सोशल मीडिया पर भी इसे ‘जनता पर हंटर चलाना’ बताया और कहा कि अगर चुनाव जारी होते तो शायद कीमतें नहीं बढ़तीं। इस मुद्दे को लेकर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर भी बहस तेज हो गई है।

यह भी पढ़ें: ‘महंगाई मैन मोदी की वसूली शुरू…’ पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ने पर कांग्रेस का हमला, अखिलेश बोले- साइकिल ही विकल्प

भाजपा ने दिखाई दुनियाभर की रेट लिस्ट

भाजपा नेता अमित मालवीय ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए अंतरराष्ट्रीय आंकड़े पेश किए। उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और सप्लाई बाधाओं के बावजूद भारत में ईंधन की कीमतों में सबसे कम बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में रुकावट और कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होने से दुनिया के अधिकांश देशों में कीमतें तेजी से बढ़ी हैं, जबकि भारत ने लंबे समय तक कीमतों को नियंत्रित रखा।

Twitter Post

दुनिया में कहां कितना बढ़ा तेल

23 फरवरी से 15 मई 2026 के बीच विभिन्न देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई।

प्रमुख देशों में कीमतों में बढ़ोतरी (प्रतिशत में)

देश

पेट्रोल

डीजल

म्यांमार

+89.7%

+112.7%

मलेशिया

+56.3%

+71.2%

पाकिस्तान

+54.9%

+44.9%

यूएई

+52.4%

+86.1%

अमेरिका

+44.5%

+48.1%

फिलीपींस

+40.6%

+53.8%

श्रीलंका

+38.2%

+41.8%

नेपाल

+38.2%

+58.5%

दक्षिण अफ्रीका

+33.1%

+63.6%

कनाडा

+31.9%

+32.8%

न्यूज़ीलैंड

+30.7%

+88.6%

थाईलैंड

+29.7%

+32.4%

फ्रांस

+20.9%

+31.0%

ब्रिटेन

+19.2%

+34.2%

ऑस्ट्रेलिया

+18.5%

+43.1%

जापान

+9.7%

+11.2%

भारत

+3.2%

+3.4%

सऊदी अरब

0.0%

0.0%

इस लिस्ट के अनुसार, भारत में बढ़ोतरी अन्य देशों की तुलना में काफी कम रही है।

होर्मुज संकट और वैश्विक असर

ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष है। ईरान से जुड़े तनाव के कारण होर्मुज स्ट्रेट, जो दुनिया के करीब 25% कच्चे तेल की सप्लाई का प्रमुख मार्ग है, प्रभावित हुआ है। इस मार्ग में रुकावट आने से तेल के जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई और सप्लाई चेन बाधित हो गई। इसका असर सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ा, जहां कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं। इस वैश्विक संकट का असर लगभग हर देश में देखा गया और ईंधन की कीमतों में भारी उछाल दर्ज किया गया।

Petrol And Diesel Price Hike

आम जनता पर क्या होगा असर

हालांकि, अंतरराष्ट्रीय तुलना में भारत में बढ़ोतरी कम है, लेकिन आम लोगों के लिए यह राहत की खबर नहीं है। पेट्रोल-डीजल के महंगे होने से ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ेगी, जिसका असर रोजमर्रा की चीजों पर पड़ेगा। सब्जियां, दूध, किराना और अन्य जरूरी सामान महंगे हो सकते हैं। इसके अलावा सीएनजी के दाम बढ़ने से सार्वजनिक परिवहन और ऑटो-रिक्शा किराए में भी बढ़ोतरी हो सकती है।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। एक तरफ लोग महंगाई को लेकर नाराजगी जता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार समर्थक वैश्विक आंकड़े साझा कर इसे सही ठहराने की कोशिश कर रहे हैं। यह मुद्दा अब सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और जनभावनाओं से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन गया है।

Manisha Dhanwani
By Manisha Dhanwani

मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

Latest Posts