कौन थे ‘फरसा वाले बाबा’?गौरक्षकों की बनाई फौज, 15 किलो का फरसा लेकर करते थे गौतस्करों का पीछा

मथुरा। उत्तर प्रदेश के मथुरा में शनिवार सुबह उस समय तनाव फैल गया जब गौरक्षा के लिए चर्चित संत चंद्रशेखर उर्फ ‘फरसा वाले बाबा’ की ट्रक से कुचलकर मौत हो गई। इस खबर के फैलते ही हजारों लोग सड़क पर उतर आए और दिल्ली-आगरा हाईवे जाम कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। भीड़ और पुलिस के बीच झड़प हुई, पथराव हुआ और हालात को काबू में करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज तक करना पड़ा।
समर्थकों का आरोप है कि, गौतस्करों ने जानबूझकर ट्रक से कुचलकर बाबा की हत्या की है। वहीं पुलिस का कहना है कि, यह एक सड़क दुर्घटना हो सकती है और मामले की जांच की जा रही है। लेकिन इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल लोगों के मन में यही है कि आखिर ‘फरसा वाले बाबा’ कौन थे, जिनकी मौत के बाद मथुरा में इतना बड़ा बवाल खड़ा हो गया।
क्या था ‘फरसा वाले बाबा’ का असली नाम
मथुरा के ब्रज क्षेत्र में ‘फरसा वाले बाबा’ के नाम से प्रसिद्ध संत चंद्रशेखर का घर बरसाना रोड के पास छाता क्षेत्र के आजनौख गांव में था। चंद्रशेखर हमेशा अपने हाथ में फरसा (कुल्हाड़ी जैसा शस्त्र) लेकर चलते थे। उनका यह फरसा करीब 15 किलो वजन का बताया जाता है। यही वजह थी कि धीरे-धीरे लोग उन्हें चंद्रशेखर की बजाय ‘फरसा वाले बाबा’ कहकर बुलाने लगे। माथे पर बड़ा लाल तिलक, गेहुआ वस्त्र और हाथ में भारी फरसा यही उनकी पहचान बन गई थी।
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गौरक्षकों की बनाई थी टीम
चंद्रशेखर अकेले नहीं थे। उन्होंने अपने साथ कई युवकों की एक टीम बना रखी थी, जिन्हें लोग गौरक्षक टीम के नाम से जानते थे। बताया जाता है कि, बाबा के साथ अक्सर तीन से चार साथी रहते थे, जिनके कंधों पर तलवार होती थी। बाबा खुद फरसा रखते थे। उनका कहना था कि, कई बार गौतस्करों ने उन पर हमला करने की कोशिश की थी। इसके बाद साथियों ने सुरक्षा के लिए हथियार साथ रखने का फैसला किया। बाबा का दावा था कि उनका उद्देश्य केवल गौवंश की रक्षा करना है।
गौरक्षा को समर्पित था जीवन
फरसा वाले बाबा का जीवन पूरी तरह गौरक्षा को समर्पित बताया जाता है। उनकी दिनचर्या भी काफी अलग थी।
- सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक- गौशाला में गायों की सेवा
- शाम 3 बजे से 6 बजे तक- आसपास के चौराहों और इलाकों में गायों की निगरानी
- रात 10 बजे से सुबह 5 बजे तक- हाईवे पर गश्त
- बाबा अक्सर दिल्ली-मथुरा हाईवे पर रातभर निगरानी करते थे।
उन्हें जैसे ही गौ-तस्करी की सूचना मिलती, वह अपनी टीम के साथ तुरंत मौके पर पहुंच जाते और संदिग्ध वाहनों को रोककर जांच करते थे।
350 से ज्यादा गायों की गौशाला
चंद्रशेखर ने अपने गांव में एक बड़ी गौशाला भी बना रखी थी। इसमें करीब 350 से 400 गाय और नंदी रखे गए थे। इनमें से ज्यादातर गायें ऐसी थीं जो सड़क पर घायल मिली थीं या जिन्हें किसी ने छोड़ दिया था। बाबा का कहना था कि, जहां भी उन्हें आवारा गाय की जानकारी मिलती, वह उसे अपनी गौशाला में ले आते थे।
गौशाला के बाहर एक बोर्ड लगा था जिस पर लिखा था- ‘लाख करो तीर्थ, पूजन करो हजार, गौ माता न बचा सके, सब कुछ है बेकार।’
मृत गायों का भी करते थे अंतिम संस्कार
फरसा वाले बाबा की टीम केवल गायों को बचाने का काम ही नहीं करती थी, बल्कि अगर किसी गाय की मौत हो जाती थी तो उसका विधि-विधान से अंतिम संस्कार भी करती थी। लोग बताते हैं कि, मृत गाय को चंदन, चुनरी और तुलसी के साथ विदाई दी जाती थी। अगर कहीं किसी गाय की मौत हो जाती या वह घायल मिलती, तो लोग फोन करके बाबा को सूचना देते थे और उनकी टीम मौके पर पहुंच जाती थी।
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नमस्कार की जगह कहते थे ‘जय गौमाता’
बाबा की एक अलग आदत भी लोगों के बीच चर्चा में रहती थी। बताया जाता है कि, वह किसी को नमस्कार या प्रणाम नहीं कहते थे। इसके बजाय वह हमेशा जय गौमाता या जय गोपाल कहकर लोगों का अभिवादन करते थे।
सोशल मीडिया पर भी थे सक्रिय
चंद्रशेखर का एक यूट्यूब चैनल भी था। इस चैनल पर वह गौ-सेवा से जुड़े वीडियो साझा करते थे। इन वीडियो में वह कई बार घायल गायों को बचाते हुए, नहर में गिरी गाय को निकालते हुए या दुर्घटना में मरी गाय का अंतिम संस्कार करते हुए नजर आते थे।

कैसे हुई मौत
शनिवार तड़के करीब 4 बजे बाबा को कथित तौर पर गौ-तस्करी की सूचना मिली थी। बताया जा रहा है कि, वह अपनी मोटरसाइकिल से संदिग्ध ट्रकों का पीछा करने निकल पड़े। इसी दौरान उनकी बाइक को ट्रक ने टक्कर मार दी और वह उसकी चपेट में आ गए। समर्थकों का आरोप है कि, यह हादसा नहीं बल्कि गौतस्करों द्वारा की गई हत्या है। वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि, शुरुआती जांच में यह सड़क दुर्घटना लग रही है। हालांकि मामले की जांच जारी है।
मौत के बाद सड़क पर उतरे हजारों लोग
फरसा वाले बाबा की मौत की खबर फैलते ही मथुरा के छाता और कोसीकलां इलाके में भारी आक्रोश फैल गया। हजारों की संख्या में लोग सड़क पर उतर आए और दिल्ली-आगरा नेशनल हाईवे पर जाम लगा दिया। गुस्साई भीड़ और पुलिस के बीच झड़प भी हुई। प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया, जिससे कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। हालात बिगड़ने पर पुलिस को लाठीचार्ज और आंसू गैस का सहारा लेना पड़ा।
समर्थकों की मांग- दोषियों पर हो सख्त कार्रवाई
बाबा के समर्थकों ने मांग की है कि इस मामले में दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए। कई लोगों ने यह भी मांग उठाई है कि, फरसा वाले बाबा को ‘गौपुत्र शहीद’ का दर्जा दिया जाए।
घटना के बाद पूरे इलाके में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। प्रशासन लोगों से शांति बनाए रखने की अपील कर रहा है। पुलिस का कहना है कि घटना के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और जल्द ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आ जाएगी।











