नई दिल्ली। केंद्रीय चुनाव आयोग ने आगामी 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टियों को कड़े दिशा- निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने पार्टियों को इलेक्शन से पहले पॉलिटिकल विज्ञापनों पर खर्च से पहले मीडिया सर्टिफिकेशन एंड मॉनिटरिंग कमेटी (MCMC) से परमिशन लेना अनिवार्य होगा। यह निर्देश 5 राज्यों के लिए जारी किए गए हैं।
यह निर्देश असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनावों के साथ-साथ छह राज्यों में होने वाले उपचुनावों पर भी लागू होगा। आयोग के अनुसार, बिना प्रमाणन के कोई भी राजनीतिक विज्ञापन टीवी, रेडियो, सार्वजनिक स्थानों पर ऑडियो-वीडियो डिस्प्ले, ई-पेपर, बल्क SMS, वॉयस मैसेज, इंटरनेट और विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रसारित नहीं किया जा सकेगा।
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चुनाव आयोग ने MCMC को पेड न्यूज और ऑनलाइन प्रचार सामग्री पर कड़ी नजर रखने के निर्देश भी दिए हैं। आयोग का मानना है कि सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए चुनावी पारदर्शिता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। इसी के तहत उम्मीदवारों को नामांकन के समय अपने सभी आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट्स की जानकारी देना भी अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि उनकी गतिविधियों की निगरानी की जा सके।
असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया द्वारा घोषित प्रोग्राम के मुताबिक, इस बार चुनाव प्रक्रिया अपेक्षाकृत कम चरणों में पूरी की जाएगी, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंधन को सरल बनाया जा सके। जिससे वोट काउंटिंग में भी आसानी हो सके।
पश्चिम बंगाल में इस बार दो चरणों में मतदान होगा, जिसमें 23 और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। वहीं तमिलनाडु में 23 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान संपन्न कराया जाएगा। इसके अलावा केरल, असम और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को सिंगल फेज में वोटिंग होगी। पांचों राज्यों के चुनाव परिणाम 4 मई को एक साथ घोषित किए जाएंगे।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने 15 मार्च को प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए इस चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की थी। चुनाव आयोग के अनुसार इस बार कुल 17.4 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे, जो इन राज्यों की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बड़ी भागीदारी को दर्शाता है।
इसके अलावा, चुनावी खर्च को लेकर भी आयोग ने सख्ती दिखाई है। रिप्रेंजेंशन ऑफ द पीपुल एक्ट, 1951 की धारा 77(1) और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत अब राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को चुनाव समाप्त होने के 75 दिनों के भीतर अपने सभी खर्चों का विस्तृत ब्यौरा देना होगा। इसमें डिजिटल प्रचार, सोशल मीडिया विज्ञापन, कंटेंट निर्माण और अकाउंट मैनेजमेंट से जुड़े सभी खर्च शामिल होंगे।
चुनाव आयोग के इन नए दिशा-निर्देशों को चुनावी प्रक्रिया को अधिक निष्पक्ष, पारदर्शी और नियंत्रित बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। इससे न केवल फर्जी और भ्रामक प्रचार पर लगाम लगेगी, बल्कि मतदाताओं को भी सही और प्रमाणित जानकारी मिल सकेगी।