इलेक्शन डेस्क। 'आप बाहर भी बुलडोजर चलाएंगे, सदन के अंदर भी बुलडोजर चलाएंगे सर ऐसा नहीं होता। ये ताकत की बुलंदी भी पल भर का तमाशा है, जिस डाल पर बैठे हैं वो टूट भी सकती है। इसलिए ख्वाब जरूर देखिए लेकिन ख्वाबों में घर बनाकर रहने की गलती नहीं कीजिएगा।….बोलते हम हैं, दिखाता आपको है' लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के प्रति अविश्वास प्रस्ताव पर तृणमूल कांग्रेस की तरफ से ये लाइनें बोलने वाली सांसद सायोनी घोष सोशल मीडिया सेंशन बनी हुई हैं। जब वे पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह पर तंज कसती हैं तो खूब तालियां बटोरती हैं। जानिए एक फिल्म एक्ट्रेस से राजनीति के मंच तक सायोनी को यह सफलता कैसे मिली।
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पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस समय अगर कोई एक नाम तेजी से चर्चा में है, तो वह है सायोनी घोष। 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले माहौल ऐसा बनता दिख रहा है कि जीत-हार का केंद्र ममता बनर्जी के इर्द-गिर्द ही रहेगा, लेकिन उनके साये में एक नया चेहरा तेजी से उभरकर सामने आया है। यह चेहरा अब सिर्फ पार्टी का हिस्सा नहीं, बल्कि चुनावी रणनीति का अहम किरदार बनता जा रहा है। रैलियों से लेकर डिजिटल प्लेटफॉर्म तक, हर जगह सयानी की मौजूदगी ने एक नई ऊर्जा पैदा कर दी है।
सायोनी घोष का अंदाज पारंपरिक राजनीति से बिल्कुल अलग है। कभी गाना गाकर, कभी शेरो-शायरी के जरिए और कभी तीखे भाषणों के साथ वे सीधे विरोधियों पर हमला बोलती नजर आती हैं। उनके वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं और युवाओं के बीच खासा प्रभाव डाल रहे हैं। वे खुलकर पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को चुनौती देती दिखाई देती हैं। यही वजह है कि रैलियों में उन्हें सुनने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुट रहे हैं और वे तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख क्राउड पुलर बन चुकी हैं।

फिल्मों के स्क्रीन से राजनीति की गलियों तक
सवाल उठता है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि सायोनी घोष अचानक 'टॉक ऑफ द टाउन' बन गईं? दरअसल, उनकी लोकप्रियता का ग्राफ सिर्फ राजनीति में सक्रियता से नहीं, बल्कि उनके बहुआयामी व्यक्तित्व से भी जुड़ा है। एक समय बांग्ला फिल्मों की चुलबुली अभिनेत्री के रूप में पहचानी जाने वाली सयानी अब एक आक्रामक और मुखर राजनीतिक चेहरा बन चुकी हैं। उनका यह बदलाव लोगों को आकर्षित कर रहा है और उन्हें अलग पहचान दे रहा है।
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साल 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान एक ऐसा मोड़ आया जिसने सायोनी की जिंदगी की दिशा बदल दी। उस समय वे फिल्मी दुनिया में व्यस्त थीं, तभी ममता बनर्जी का फोन आया-सायोनी, लड़ना है!। इस एक कॉल के बाद उन्होंने बिना देर किए मेकअप वैन छोड़ी और सीधे चुनावी मैदान में उतर गईं। इस फैसले ने पूरे बंगाल को चौंका दिया और उसी वक्त यह संकेत मिल गया कि वे लंबी रेस की खिलाड़ी साबित हो सकती हैं।

राजनीति में पहला कदम हमेशा आसान नहीं होता। आसनसोल दक्षिण सीट से चुनाव लड़ते हुए सायोनी को अग्निमित्र पॉल के हाथों हार का सामना करना पड़ा। हालांकि इस हार ने उन्हें कमजोर नहीं किया, बल्कि उनकी जुझारू छवि को और मजबूत किया। ममता बनर्जी ने उनकी इसी ‘फाइटिंग स्पिरिट’ को देखते हुए उन्हें तृणमूल कांग्रेस की यूथ विंग का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया, जिससे वे सीधे पार्टी के पावर सेंटर में पहुंच गईं।

2024 के लोकसभा चुनाव में सायोनी को जादवपुर जैसी अहम सीट से उम्मीदवार बनाया गया, जो ममता बनर्जी की राजनीतिक यात्रा से भी जुड़ी रही है। इस सीट से जीत हासिल कर उन्होंने अपनी राजनीतिक साख को और मजबूत किया। अब वे संसद में भी एक तेज-तर्रार वक्ता के रूप में उभर रही हैं और पार्टी के लिए एक भरोसेमंद चेहरा बन गई हैं।
27 जनवरी 1993 को कोलकाता में जन्मी सायोनी घोष ने अपने करियर की शुरुआत अभिनय से की थी। उन्होंने ‘इच्छे दाना’ से टीवी पर कदम रखा और ‘शत्रु’, ‘राजकाहिनी’ तथा ‘ब्योमकेश ओ चिड़ियाखाना’ जैसी फिल्मों में अपनी पहचान बनाई। अभिनय, सिंगिंग और परफॉर्मेंस की दुनिया में स्थापित होने के बाद राजनीति में उनका अचानक आना एक बड़ा बदलाव था, जिसने उन्हें नई पहचान दी।

तृणमूल कांग्रेस में ग्लैमर वर्ल्ड से कई चेहरों को राजनीति में लाया गया, लेकिन उनमें सबसे ज्यादा चमकता नाम आज सायोनी घोष का माना जा रहा है। पार्टी के भीतर और बाहर, दोनों जगह यह चर्चा तेज है कि वे भविष्य में ममता बनर्जी की राजनीतिक विरासत संभाल सकती हैं। हालांकि इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं है, लेकिन उनकी बढ़ती भूमिका और लोकप्रियता इन अटकलों को हवा दे रही है।
सयानी घोष का राजनीतिक सफर विवादों से अछूता नहीं रहा। एक पुराने ट्वीट को लेकर उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ा, वहीं त्रिपुरा में गिरफ्तारी और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की पूछताछ जैसी चुनौतियां भी सामने आईं। इसके बावजूद उन्होंने पीछे हटने के बजाय हर बार मजबूती से वापसी की और अपनी स्थिति को और मजबूत किया।
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संसद से लेकर चुनावी मंच तक, सयानी घोष का अंदाज लोगों को आकर्षित करता है। उनके भाषण, पंचलाइन और लोकगीत गाने का तरीका उन्हें भीड़ से अलग बनाता है। उनके कई भाषण सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके हैं, जिससे उनकी पहचान एक दमदार वक्ता के रूप में बनी है। आज वे सिर्फ एक नेता ही नहीं, बल्कि एक ऐसी शख्सियत बन चुकी हैं जो कला और राजनीति दोनों को साथ लेकर चल रही है, और यही उनकी सबसे बड़ी ताकत है।