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हम रात 2 बजे तक मामले की निगरानी कर रहे थे!मालदा घटना पर सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल सरकार को जमकर फटकारा...

स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि न्यायिक अधिकारियों को मौके से निकालने के लिए हाई लेवल पर हस्तक्षेप करना पड़ा। बताया गया कि कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा डीजीपी से संपर्क किए जाने के बाद देर रात अधिकारियों को सुरक्षित निकाला जा सका।
मालदा घटना पर सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल सरकार को जमकर फटकारा...
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    नई दिल्ली/कोलकाता। पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में चुनावी प्रक्रिया से जुड़े SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) कार्य के दौरान न्यायिक अधिकारियों पर हुए हमले के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की है। गुरुवार को सुनवाई करते हुए CJI सूर्यकांत ने राज्य सरकार पर कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए। 

    उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से आपके राज्य का हर अधिकारी राजनीतिक भाषा बोलता है, साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि कोर्ट स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए था।

    बंगास सरकार के वकील को जमकर लताड़ा

    इस मामले की सुनवाई सीजेआई सूर्यकांत के साथ जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचौली की बेंच कर रही थी। सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार के वकील को फटकार लगाते हुए सीजेआई ने कहा कि कोर्ट को पूरी जानकारी है कि उपद्रवी कौन थे। साथ ही में उन्होंने पुलिस की प्रणाली पर भी सवाल उठाए थे।

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    कलेक्टर रात 11 बजे तक घटनास्थल नहीं पहुंचे- CJI

    उन्होंने बताया कि वे रात 2 बजे तक स्थिति की निगरानी कर रहे थे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि रात 11 बजे तक जिला कलेक्टर मौके पर नहीं पहुंचे, जिसके चलते न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर उन्हें खुद मौखिक रूप से सख्त निर्देश जारी करने पड़े।

    क्या हुआ था मालदा में?

    दरअसल, बुधवार को मालदा के कालियाचक इलाके में SIR का काम कर रहे न्यायिक अधिकारियों पर स्थानीय लोगों ने हमला कर दिया था। ये अधिकारी अंतिम मतदाता सूची से बाहर किए गए करीब 50 लाख लोगों के दावों और आपत्तियों की जांच कर रहे थे। इसी दौरान प्रदर्शनकारियों की भीड़ ने वहां पहुंचकर विरोध शुरू कर दिया और देखते ही देखते हालात बेकाबू हो गए। दोपहर करीब 3:30 बजे शुरू हुआ यह प्रदर्शन रात तक जारी रहा, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने अधिकारियों को करीब 9 घंटे तक घेरकर रखा।

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    DGP से संपर्क करने के बाद निकले अधिकारी

    स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि न्यायिक अधिकारियों को मौके से निकालने के लिए हाई लेवल पर हस्तक्षेप करना पड़ा। बताया गया कि कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा डीजीपी से संपर्क किए जाने के बाद देर रात अधिकारियों को सुरक्षित निकाला जा सका। हालांकि, वहां से निकलते समय भी उनकी गाड़ियों पर पथराव किया गया, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

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    यह घटनाएं किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं- EC

    इस घटना की चुनाव निर्वाचन आयोगन ने भी कड़ी निंदा की है। आयोग की ओर से पेश वकील ने इसे भीड़तंत्र करार देते हुए कहा कि इस तरह की घटनाएं किसी भी हालत में स्वीकार नहीं की जा सकतीं। वहीं सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी अदालत में कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर न्यायिक अधिकारियों को इस काम में लगाया गया है, तब इस तरह की घटना बेहद गंभीर और अस्वीकार्य है।

    फिलहाल, इस मामले ने राज्य की कानून-व्यवस्था और चुनावी प्रक्रिया की सुरक्षा को लेकर बड़ी बहस छेड़ दी है। सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद अब सभी की नजर इस पर टिकी है कि राज्य सरकार आगे क्या कदम उठाती है और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है।

    Aakash Waghmare
    By Aakash Waghmare

    आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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