मध्यप्रदेश के विजयपुर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा का चुनाव ग्वालियर हाईकोर्ट ने शून्य घोषित कर दिया है। अदालत ने यह फैसला बीजेपी नेता और पूर्व मंत्री रामनिवास रावत की चुनाव याचिका पर सुनाया।
रामनिवास रावत ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि उपचुनाव के दौरान मुकेश मल्होत्रा ने नामांकन पत्र के साथ दिए गए हलफनामे में अपने खिलाफ दर्ज सभी आपराधिक मामलों की जानकारी नहीं दी।
इस फैसले पर कांग्रेस की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील विवेक तन्खा ने कहा कि इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि अदालत से यह अनुरोध किया गया है कि केवल कुछ जानकारी गलत देने का मतलब यह नहीं है कि चुनाव में धांधली हुई है। उन्हें उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट से मुकेश मल्होत्रा को राहत मिलेगी।
मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि एक साल पहले विजयपुर की जनता ने कांग्रेस को जनादेश दिया था और मुकेश मल्होत्रा को भारी मतों से जिताया था। उन्होंने कहा कि पार्टी इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगी और उन्हें न्याय मिलने का भरोसा है।
मुकेश मल्होत्रा ने 2 मई 2024 को कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की थी। उन्होंने मुरैना जिले में आयोजित प्रियंका गांधी की चुनावी सभा के दौरान पार्टी जॉइन की थी।
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विधानसभा चुनाव 2023 में मुकेश मल्होत्रा विजयपुर सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरे थे। उस समय क्षेत्र के आदिवासी समुदाय ने उनका समर्थन किया और उन्हें करीब 45 हजार वोट मिले थे।
मुकेश मल्होत्रा लंबे समय से विजयपुर क्षेत्र की राजनीति में सक्रिय हैं। इससे पहले वे बीजेपी में थे और सरकार ने उन्हें सहारिया प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाकर राज्य मंत्री का दर्जा दिया था। हालांकि विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने भाजपा छोड़ दी थी।
विजयपुर विधानसभा क्षेत्र में सहारिया आदिवासी समाज के 70 हजार से अधिक वोट बताए जाते हैं। इसी समीकरण को देखते हुए कांग्रेस ने उपचुनाव में मुकेश मल्होत्रा को उम्मीदवार बनाया था।