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भोपाल:13 साल से एक ही घर में अलग रह रहे थे पति-पत्नी, समझाइश के बाद तलाक पर बनी सहमति

भोपाल फैमिली कोर्ट में एक अनोखा मामला सामने आया जहां पति-पत्नी एक ही घर में रहते हुए भी पिछले 13 साल से अलग-अलग पोर्शन में रह रहे थे।
13 साल से एक ही घर में अलग रह रहे थे पति-पत्नी, समझाइश के बाद तलाक पर बनी सहमति

भोपाल फैमिली कोर्ट में एक अनोखा मामला सामने आया जहां पति-पत्नी एक ही घर में रहते हुए भी पिछले 13 साल से अलग-अलग पोर्शन में रह रहे थे। लंबे समय से चले आ रहे इस विवाद का आखिरकार समाधान तब निकला जब कोर्ट की समझाइश के बाद पत्नी तलाक के लिए राजी हो गई।

13 साल से एक ही घर में रह रहे थे अलग

मामले में पति ने कोर्ट से गुहार लगाई थी कि उसकी पत्नी न तो उसके साथ रहना चाहती है और न ही तलाक देने को तैयार है। पति का कहना था कि वह 13 साल से घर के एक हिस्से में अलग रह रही है, उसे भरण-पोषण भी दिया जा रहा है लेकिन इस स्थिति के कारण वह अपने मकान का सही उपयोग भी नहीं कर पा रहा है। कई बार समझाने की कोशिश की गई लेकिन पत्नी साथ रहने को तैयार नहीं हुई। ऐसे में उसने कोर्ट से निवेदन किया कि इस स्थिति से बेहतर है कि दोनों कानूनी रूप से अलग हो जाएं।

पत्नी नहीं चाहती थी तलाकशुदा का टैग

कोर्ट में सुनवाई के दौरान पत्नी ने साफ कहा कि वह पति के साथ किसी भी हालत में नहीं रह सकती लेकिन वह तलाक भी नहीं चाहती क्योंकि उसे ‘तलाकशुदा’ कहलाने का डर है और समाज में लोग उसके बारे में गलत सोचेंगे। कोर्ट ने पहले दोनों पक्षों के बीच सुलह कराने की कोशिश की और पत्नी को रिश्ते को एक मौका देने के लिए समझाया लेकिन जब वह इसके लिए भी तैयार नहीं हुई तो अदालत ने माना कि इस स्थिति में तलाक ही आखिरी विकल्प बचता है।

21 साल की शादी में 15 साल से विवाद

जानकारी के मुताबिक चुनाभट्टी निवासी इस दंपति की शादी को 21 साल हो चुके हैं और पिछले करीब 15 सालों से दोनों के बीच विवाद चल रहा था। करीब 13 साल पहले पत्नी ने भरण-पोषण का केस भी दर्ज कराया था। बीते साल पति ने तलाक की अर्जी लगाते हुए कहा कि या तो पत्नी उसके साथ रहने लगे या फिर उसे तलाक दे दे। पति ने यह भी बताया कि एक ही घर में अलग-अलग रहने के बावजूद रोजाना झगड़े होते हैं जिसका असर उनके बेटे पर भी पड़ रहा है।

बेटे पर पड़ रहा था असर

पति ने कोर्ट में यह भी कहा कि उनका बेटा अब बड़ा हो रहा है और आने वाले समय में जब वह अपना परिवार बसाने की कोशिश करेगा, तब माता-पिता का यह विवाद उसके लिए परेशानी खड़ी कर सकता है। चूंकि बेटा दो महीने बाद 18 साल का होने वाला है इसलिए कोर्ट ने उसकी कस्टडी को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया।

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काउंसलिंग के बाद टूटा गतिरोध

कोर्ट ने पत्नी की काउंसलिंग कर उसके मन में तलाक को लेकर बनी झिझक और भ्रम को दूर करने की कोशिश की। उसे समझाया गया कि तलाक को एक सामाजिक टैबू की तरह न देखें और इस तरह की अनिश्चित स्थिति में रहकर दोनों की जिंदगी और मुश्किल न बनाएं। लगातार समझाइश के बाद आखिरकार पत्नी तलाक के लिए राजी हो गई।

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12 लाख मेंटेनेंस पर बनी सहमति

मामले का समाधान तब हुआ जब पति ने खुद आगे बढ़कर 12 लाख रुपए की मेंटेनेंस राशि देने का प्रस्ताव रखा जिसे पत्नी ने स्वीकार कर लिया। इसके बाद दोनों के बीच आपसी सहमति से तलाक पर सहमति बन गई।

Sumit  Shrivastava
By Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

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