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‘वंदे मातरम्’ विवाद :कांग्रेस पार्षदों पर FIR की तैयारी, CM डॉ मोहन यादव ने की जीतू पटवारी के इस्तीफे की मांग

इंदौर में ‘वंदे मातरम्’ विवाद के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस पार्षदों पर FIR की तैयारी चल रही है, जबकि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने PCC चीफ जीतू पटवारी से इस्तीफे की मांग की है। पुलिस जांच जारी है और मामले ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है।
कांग्रेस पार्षदों पर FIR की तैयारी, CM डॉ मोहन यादव ने की जीतू पटवारी के इस्तीफे की मांग

मध्य प्रदेश के इंदौर में ‘वंदे मातरम्’ को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक और कानूनी मोड़ ले चुका है। नगर निगम परिषद में कांग्रेस पार्षदों द्वारा राष्ट्रगीत गाने से इनकार करने के बाद मामला लगातार गरमाता जा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम में अब पुलिस भी सक्रिय हो गई है और संबंधित पार्षदों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की तैयारी की जा रही है। घटना के सामने आने के बाद न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि प्रदेश स्तर की राजनीति में भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। भारतीय जनता पार्टी ने इसे राष्ट्रसम्मान से जोड़ते हुए कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं कांग्रेस के भीतर भी इस मामले को लेकर असहजता दिखाई दे रही है।

क्या है पूरा विवाद?

यह पूरा मामला 8 अप्रैल को नगर निगम परिषद की बैठक के दौरान सामने आया। बजट चर्चा के बीच जब ‘वंदे मातरम्’ गाने की बात आई, तो कांग्रेस की पार्षद फौजिया शेख अलीम और रुबीना इकबाल ने इसे गाने से इनकार कर दिया। बताया जाता है कि फौजिया शेख ने यह सवाल उठाया कि ऐसा कौन सा कानून है, जो ‘वंदे मातरम्’ गाना अनिवार्य बनाता है। इसी दौरान माहौल गरम हो गया और भाजपा पार्षदों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। वहीं दूसरी पार्षद रुबीना इकबाल ने भी नाराजगी जताते हुए पार्टी लाइन से अलग बयान दिए, जिससे विवाद और गहरा गया।

FIR की तैयारी, पुलिस ने शुरू की जांच

घटना के बाद भाजपा पार्षदों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इसके आधार पर अब पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। शुक्रवार को नगर निगम सभापति मुन्नालाल यादव सहित कई पार्षद एमजी रोड इंदौर पुलिस स्टेशन पहुंचे और अपने बयान दर्ज कराए। पुलिस ने परिषद हॉल की डिजिटल रिकॉर्डिंग भी जब्त कर ली है, जिससे घटना की सटीक स्थिति स्पष्ट हो सके।

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CM डॉ मोहन यादव का सख्त रुख

इस विवाद पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि जनप्रतिनिधि होने के बावजूद कुछ पार्षद राष्ट्रगीत गाने से इनकार कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने सीधे तौर पर कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए जीतू पटवारी से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि पार्टी को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह इस तरह के व्यवहार को क्यों बढ़ावा दे रही है। सीएम ने यह भी कहा कि अगर इस मामले में पार्टी कोई ठोस कार्रवाई नहीं करती है, तो प्रदेश अध्यक्ष को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए।

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सदस्यता रद्द होने की भी संभावना

इस पूरे विवाद के बीच प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई की तैयारी हो रही है। संभागायुक्त सुदाम खाड़े ने पार्षदों की सदस्यता समाप्त करने की मांग पर कानूनी राय मांगी है। अगर जांच में यह साबित होता है कि राष्ट्रगीत का अपमान हुआ है या परिषद में अनुशासनहीन व्यवहार किया गया है, तो संबंधित पार्षदों की सदस्यता समाप्त की जा सकती है। इसके अलावा पार्टी स्तर पर भी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।

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सोशल मीडिया पोस्ट से बढ़ा तनाव

मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब हिंदू जागरण मंच के जिला संयोजक सुमित हार्डिया ने सोशल मीडिया पर विवादित पोस्ट कर इनाम की घोषणा कर दी। इस बयान के बाद शहर का माहौल और ज्यादा तनावपूर्ण हो गया है। हार्डिया ने पोस्ट की थी कि वंदे मातरम का अपमान करने वाली कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम का जो भी बहन मुंह काला करेगी। उसे 51 हजार रुपये का इनाम दिया जाएगा। इस बयान के सामने आने के बाद शहर में माहौल और तनावपूर्ण हो गया है।

बीजेपी का कांग्रेस पर हमला

इस मुद्दे को लेकर भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। पूर्व मंत्री उषा ठाकुर ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ देश की आजादी का प्रतीक है और इसका सम्मान करना हर नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान और व्यवहार न केवल राष्ट्र के प्रति अनादर दर्शाते हैं बल्कि समाज में गलत संदेश भी देते हैं। भाजपा ने इसे कांग्रेस की विचारधारा से जोड़ते हुए सवाल खड़े किए हैं।

Sona Rajput
By Sona Rajput

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...

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