मध्य प्रदेश के रायसेन के दशहरा मैदान में शनिवार से तीन दिवसीय राष्ट्रीय उन्नत कृषि महोत्सव एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत हुई। कार्यक्रम का शुभारंभ देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री मोहन यादव और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में हुआ। इस आयोजन का उद्देश्य किसानों को आधुनिक तकनीकों, उन्नत खेती और आय बढ़ाने के नए रास्तों से जोड़ना है।
इस महोत्सव में देशभर से आए किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर आधुनिक और तकनीक आधारित कृषि की ओर प्रेरित किया जा रहा है। ड्रोन तकनीक, स्मार्ट खेती, मिट्टी परीक्षण और माइक्रो इरिगेशन जैसे कई विषयों पर लाइव डेमो और प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं। यह आयोजन केवल एक प्रदर्शनी नहीं बल्कि किसानों के लिए सीखने और अपने खेतों में बदलाव लाने का एक बड़ा अवसर बनकर सामने आया है। यहां किसानों को बताया जा रहा है कि कैसे कम जमीन में भी ज्यादा उत्पादन और बेहतर आय हासिल की जा सकती है।
महोत्सव का पैमाना काफी बड़ा है। यहां 300 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें कृषि यंत्र, उर्वरक, बीज, सिंचाई तकनीक और स्टार्टअप इनोवेशन से जुड़ी जानकारी दी जा रही है। पूरे आयोजन स्थल को तीन बड़े हैंगरों में विभाजित किया गया है। पहले हैंगर में कृषि यंत्रीकरण और तकनीकी नवाचार, दूसरे में पशुपालन और ग्रामीण विकास, जबकि तीसरे में मुख्य कार्यक्रम, सेमिनार और सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। हर स्टॉल पर किसानों को सीधे विशेषज्ञों से बात करने और नई तकनीकों को समझने का मौका मिल रहा है।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि सरकार का मुख्य लक्ष्य किसानों की आय बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि केवल खेती करना ही पर्याप्त नहीं बल्कि उसे लाभदायक बनाना जरूरी है। उन्होंने किसानों को समझाया कि एक या दो एकड़ जमीन में भी आधुनिक तकनीकों के जरिए सालाना आय को कई गुना बढ़ाया जा सकता है। बीज चयन से लेकर बाजार तक की पूरी प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसानों की जिंदगी में बदलाव नहीं आ पाया, तो पद पर बने रहने का कोई मतलब नहीं है।
महोत्सव के दौरान एक अहम घोषणा भी सामने आई। वैज्ञानिकों ने मध्य प्रदेश के चार जिलों-रायसेन, विदिशा, सीहोर और देवास के लिए विशेष कृषि रोडमैप तैयार किया है। इस रोडमैप में यह बताया जाएगा कि किस क्षेत्र में कौन सी फसल सबसे बेहतर होगी, कौन से पौधे स्थानीय मिट्टी के लिए उपयुक्त हैं और किस तरह किसान अपनी जमीन का अधिकतम उपयोग कर सकते हैं। यह पहल किसानों को क्षेत्र विशेष के अनुसार खेती की दिशा तय करने में मदद करेगी।
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में किसानों के लिए एक नई पहल की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अब सेना की छावनियों में स्थानीय किसानों द्वारा उगाई गई जैविक फल और सब्जियां खरीदी जाएंगी। इससे न केवल जवानों को ताजा और बेहतर खाद्य सामग्री मिलेगी बल्कि आसपास के किसानों को भी स्थायी बाजार उपलब्ध होगा। उन्होंने यह भी कहा कि सेना की कैंटीन में श्री अन्न यानी ज्वार, बाजरा और रागी जैसे अनाज को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। यह कदम किसानों की आय बढ़ाने और देश में पोषण सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कार्यक्रम में यह बात बार-बार सामने आई कि भविष्य की खेती केवल परंपरागत तरीकों से नहीं चलेगी। तकनीक का इस्तेमाल अब अनिवार्य हो चुका है। ड्रोन के जरिए फसल पर छिड़काव, सेंसर आधारित सिंचाई और मोबाइल से खेत की निगरानी जैसे कई उदाहरण यहां प्रस्तुत किए गए। किसानों को यह भी बताया गया कि कैसे वे डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए अपनी फसल के लिए बेहतर बाजार तलाश सकते हैं।
महोत्सव में पशुपालन को भी विशेष महत्व दिया गया है। यहां गिर, साहीवाल और थारपारकर नस्ल की गायों के साथ-साथ जमुनापारी, सिरोही और बारबरी नस्ल की बकरियों का प्रदर्शन किया जा रहा है। इसके अलावा कड़कनाथ मुर्गी पालन और आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों जैसे बायोफ्लॉक और एक्वापोनिक्स मॉडल भी किसानों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। विशेषज्ञ किसानों को पशु स्वास्थ्य, टीकाकरण और पोषण प्रबंधन के बारे में भी जानकारी दे रहे हैं, जिससे वे अपनी आय के नए स्रोत विकसित कर सकें।

यह महोत्सव केवल देखने तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें किसानों के लिए प्रशिक्षण सत्र, स्टार्टअप प्रेजेंटेशन और वैज्ञानिकों के साथ संवाद की भी व्यवस्था की गई है। किसान यहां सीधे विशेषज्ञों से सवाल पूछ सकते हैं और अपनी समस्याओं का समाधान पा सकते हैं। इससे उन्हें अपने खेतों में नई तकनीकों को अपनाने में मदद मिलेगी।