अवैध कब्जों पर एक्शन मोड!KGMU में बनी 6 मजारें लावारिस घोषित, चलेगा बुलडोजर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में बनी मजारों को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है। विश्वविद्यालय की जांच समिति ने परिसर में मौजूद 6 मजारों को लावारिस घोषित कर दिया है। जांच में पाया गया कि इन मजारों का कोई अधिकृत प्रबंधन या वैध समिति मौजूद नहीं है। कई बार नोटिस जारी करने और सुनवाई का अवसर देने के बावजूद कोई पक्ष आवश्यक दस्तावेज पेश नहीं कर सका। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन ढांचों को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रशासन का कहना है कि अस्पताल परिसर में बने इन ढांचों से स्वास्थ्य सेवाओं और मरीजों की आवाजाही प्रभावित हो रही थी।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद शुरू हुई जांच
KGMU परिसर में बनी मजारों की जांच पिछले वर्ष शुरू की गई थी। यह कार्रवाई कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में महिला डॉक्टर के साथ हुई घटना के बाद तेज हुई। मामले पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के मेडिकल संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में KGMU प्रशासन ने पूरे परिसर का निरीक्षण कराया। जांच के दौरान परिसर में कई धार्मिक ढांचे पाए गए, जिनमें 8 मजारें शामिल थीं। प्रशासन ने इनके संचालन और वैधता से जुड़े दस्तावेज मांगे थे।
कई नोटिस के बावजूद नहीं मिला जवाब
जांच समिति ने जनवरी 2026 में पहला नोटिस जारी किया था। यह नोटिस संभावित संचालकों और संबंधित लोगों को भेजा गया। साथ ही मजारों के पास भी सूचना चस्पा की गई। फरवरी में दोबारा नोटिस जारी किए गए और रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से भी जानकारी मांगी गई, लेकिन अधिकांश पत्र वापस लौट आए। केवल एक मजार की ओर से जवाब प्राप्त हुआ लेकिन उसमें भी कोई वैध दस्तावेज या अधिकृत समिति का विवरण प्रस्तुत नहीं किया गया। अप्रैल में व्यक्तिगत सुनवाई रखी गई लेकिन उस दिन भी कोई प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ।
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अस्पताल के रास्तों के बीच बनी थीं मजारें
जांच समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि ये मजारें अस्पताल परिसर के भीतर मरीजों और एंबुलेंस की आवाजाही वाले रास्तों के बीच स्थित थीं। इससे कई बार गंभीर मरीजों के आवागमन में दिक्कतें पैदा होती थीं। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि कुछ स्थानों पर ऐसी गतिविधियां देखी गईं, जिन्हें अस्पताल परिसर के अनुरूप नहीं माना जा सकता। समिति के अनुसार कई ढांचों में ईंट, टाइल्स और नई निर्माण सामग्री का इस्तेमाल पाया गया, जिससे इनके हाल के वर्षों में बने होने की आशंका जताई गई।
प्रशासन ने हटाने की प्रक्रिया शुरू की
जांच पूरी होने के बाद KGMU प्रशासन ने इन मजारों को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने जिला प्रशासन और पुलिस विभाग से अतिरिक्त सुरक्षा बल उपलब्ध कराने की मांग की है। जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को भी भेज दी गई है। प्रशासन का कहना है कि कानून के तहत कार्रवाई करते हुए इन ढांचों को किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित किया जाएगा। साथ ही पुराने और नए दोनों स्थानों पर सूचना बोर्ड लगाए जाएंगे, ताकि किसी प्रकार का भ्रम न रहे।
बीजेपी नेता के पत्र के बाद बढ़ी कार्रवाई
इस मामले को लेकर बीजेपी नेता अभिजित मिश्रा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर विश्वविद्यालय परिसर में सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण होने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर बने ऐसे ढांचे सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार में बाधा बन रहे हैं।
प्रशासन ने दिए सख्त कार्रवाई के संकेत
KGMU प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कार्रवाई के दौरान बाधा डालने की कोशिश करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। विश्वविद्यालय का कहना है कि अस्पताल परिसर को सुरक्षित, व्यवस्थित और मरीजों के लिए अधिक सुविधाजनक बनाना उसकी प्राथमिकता है। पुलिस बल उपलब्ध होते ही अवैध घोषित ढांचों को हटाने की कार्रवाई शुरू की जा सकती है।











