बेतवा नदी पर बन रहा पुल अचानक गिरा!6 मजदूरों की मौत, SDRF का रेस्क्यू जारी

हमीरपुर। उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में बड़ा हादसा हो गया। बेतवा नदी पर बन रहे निर्माणाधीन पुल का एक हिस्सा अचानक गिर पड़ा, जिससे वहां काम कर रहे मजदूर मलबे में दब गए। हादसा रात करीब तीन बजे तेज आंधी और बारिश के दौरान हुआ। सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और SDRF की टीम मौके पर पहुंच गई और राहत बचाव अभियान शुरू किया गया। इस हादसे में 6 मजदूरों की जान चली गई है, जबकि कई अन्य मजदूरों के अभी भी फंसे होने की आशंका जताई जा रही है।
तेज तूफान के बीच गिरा पुल का स्लैब
हादसे के समय इलाके में तेज आंधी और बारिश हो रही थी। अचानक पुल का स्लैब भरभराकर नीचे गिर गया। नीचे मौजूद मजदूरों को संभलने तक का मौका नहीं मिला और कई लोग मलबे के नीचे दब गए। आसपास के लोगों ने तुरंत पुलिस और प्रशासन को सूचना दी। यह पुल लालपुर थाना क्षेत्र में बेतवा नदी पर बनाया जा रहा था, जो मोरकंदर परसानी और मवाईजार गांव को जोड़ने वाला था। बताया जा रहा है कि हादसे के समय कुछ मजदूर पुल के नीचे आराम कर रहे थे, तभी अचानक पूरा हिस्सा गिर गया।
रात में ही शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन
घटना की जानकारी मिलते ही कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंच गई। इसके बाद SDRF की टीम को भी बुलाया गया। जेसीबी मशीनों की मदद से मलबा हटाने का काम लगातार जारी है। प्रशासन का कहना है कि बचाव अभियान पूरी तेजी से चलाया जा रहा है ताकि फंसे हुए मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। हमीरपुर के अपर पुलिस अधीक्षक अरविंद कुमार वर्मा ने बताया कि हादसा बेहद दुखद है। उन्होंने कहा कि पुलिस को रात करीब दो बजे सूचना मिली थी कि पुल का स्लैब गिर गया है। मौके पर पहुंचते ही स्थानीय लोगों की मदद से रेस्क्यू शुरू कर दिया गया था। अभी भी कुछ मजदूरों के पिलर में फंसे होने की आशंका है।
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मृतकों की हुई पहचान
हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों की पहचान कर ली गई है। इनमें बांदा और हमीरपुर जिले के मजदूर शामिल हैं। मरने वालों में लोकेन्द्र निषाद, कुलदीप निषाद, सावंत यादव, सभाजीत, पुष्पेंद्र सिंह चौहान और राजेश पाल शामिल हैं। प्रशासन के मुताबिक, तीन मजदूर अभी भी पिलर के पास फंसे हुए हैं। इनमें अवधेश निषाद, कल्लू यादव और राजेश निषाद का नाम सामने आया है। उन्हें बाहर निकालने के लिए लगातार कोशिश की जा रही है। मौके पर टेक्निकल टीम को भी बुलाया गया है जो पुल निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री और निर्माण प्रक्रिया की जांच करेगी। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।
सांसद के प्रयास से बन रहा था पुल
बताया जा रहा है कि यह पुल राज्यसभा सांसद बाबूराम निषाद के प्रयासों से मंजूर हुआ था। पुल बनने से आसपास के कई गांवों के लोगों को आने जाने में सुविधा मिलने वाली थी। लंबे समय से इलाके के लोग इस पुल की मांग कर रहे थे लेकिन निर्माण के दौरान हुए इस हादसे ने कई परिवारों की जिंदगी बदल दी। मजदूरों के घरों में मातम पसरा हुआ है और गांव के लोग भी इस घटना से सदमे में हैं।
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प्रशासन ने दिए जांच के आदेश
हादसे के बाद जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट पर है। वरिष्ठ अधिकारी लगातार मौके का जायजा ले रहे हैं। प्रशासन ने हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं। साथ ही मृतकों के परिवारों को हर संभव मदद देने की बात कही गई है। सबसे बड़ा फोकस मलबे में दबे मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने पर है। प्रशासन का कहना है कि जब तक आखिरी मजदूर को बाहर नहीं निकाल लिया जाता, तब तक रेस्क्यू अभियान जारी रहेगा।











