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विधायक संजय पाठक केस : मप्र हाईकोर्ट ने पूछा-जब मोबाइल में नंबर सेव नहीं था, तो फिर डायल कैसे हुआ?

भाजपा विधायक संजय पाठक के आपराधिक अवमानना मामले पर हाईकोर्ट ने पूछा है कि जब जज का मोबाइल नंबर सेव नहीं था तो फिर डायल कैसा हुआ? इसके साथ ही डिवीजन बेंच ने इस मामले पर फैसला सुरक्षित रखा है। संजय पाठक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी पेश हुए।
 मप्र हाईकोर्ट ने पूछा-जब मोबाइल में नंबर सेव नहीं था, तो फिर डायल कैसे हुआ?
फाइल फोटो

जबलपुर। भाजपा विधायक संजय पाठक के खिलाफ दर्ज किए गए आपराधिक अवमानना के मामले पर मप्र हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई है। एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान पूछा कि जब विधायक के मोबाइल में जस्टिस विशाल मिश्रा का नंबर सेव नहीं था, तो नंबर कैसे डायल हो गया? जवाब में विधायक पाठक की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि जज बनने से पहले जस्टिस मिश्रा वकील थे और उनका नंबर किसी के भी पास हो सकता है। करीब 45 मिनट तक चली सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने अपना फैसला सुरक्षित रखने के निर्देश दिए।

11 महीने पहले किया था खुलासा

गौरतलब है कि जस्टिस विशाल मिश्रा ने 1 सितंबर 2025 को खुलासा किया था कि विधायक संजय पाठक ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की है। इस खुलासे के बाद भी विधायक पर कोई कार्रवाई न होने पर कटनी में रहने वाले आशुतोष दीक्षित ने एक याचिका दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने उस याचिका का तो पटाक्षेप कर दिया था, लेकिन विधायक के खिलाफ आपराधिक अवमानना का मामला दर्ज किया था।

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दो बार कोर्ट में हाजिर हुए विधायक पाठक

इस मामले पर 6 अप्रैल को नोटिस जारी होने के बाद हाईकोर्ट के निर्देश पर 21 अप्रैल, 14 मई के बाद बुधवार को भी विधायक संजय पाठक हाईकोर्ट में हाजिर हुए। श्री पाठक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल खरे व अधिवक्ता शमिला इरम फातिमा ने कहा कि गलती से लगे कॉल के लिए उनके मुवक्किल अपना माफीनामा पेश कर चुके हैं।

कॉल डिटेल से साफ हो जाएगी स्थिति

वहीं आशुतोष मनु दीक्षित की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने कहा कि इस मामले में जस्टिस मिश्रा की ऑर्डरशीट और संजय पाठक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रोहतगी में विरोधाभास है। ऑर्डरशीट में लिखा है कि मुकदमे के बारे में चर्चा करने संपर्क करने की कोशिश की गई, वहीं रोहतगी कह रहे हैं कि पाठक ने कॉल जरूर किया था, लेकिन घंटी जाते ही उसे डिसकनेक्ट कर दिया गया। कामत ने दावा किया कि 30 अगस्त की कॉल डिटेल्स बुलाए जाने पर यह स्पष्ट हो जाएगा कि पाठक ने मिस्ड कॉल किया था या फिर उन्होंने बात की थी।

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Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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