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यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर खड़ा नजर आ रहा है। एक ओर जहां अमेरिका युद्ध खत्म कराने के लिए कूटनीतिक दबाव बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने खुलासा किया है कि, अमेरिका ने दोनों देशों को जून 2026 तक युद्ध समाप्त करने की डेडलाइन दी है। इस समयसीमा के भीतर शांति समझौता नहीं होने पर दोनों पक्षों पर और कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।
इसी बीच रूस ने यूक्रेन के ऊर्जा ढांचे पर अब तक के सबसे बड़े हमलों में से एक को अंजाम दिया है, जिससे लाखों नागरिक प्रभावित हुए हैं।
राष्ट्रपति जेलेंस्की ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि, अमेरिकी प्रशासन चाहता है कि युद्ध गर्मियों से पहले समाप्त हो जाए। उनके मुताबिक, अगर तय समयसीमा तक शांति समझौता नहीं होता है, तो अमेरिका दोनों देशों पर और ज्यादा दबाव डालेगा। इसके नतीजे गंभीर हो सकते हैं।
अमेरिका का मानना है कि, लंबे समय तक चल रहे इस युद्ध से वैश्विक सुरक्षा, ऊर्जा बाजार और आर्थिक स्थिरता पर बुरा असर पड़ रहा है।
अबू धाबी बैठक रही बेनतीजा
4 और 5 फरवरी को संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी में अमेरिका की मध्यस्थता में त्रिपक्षीय शांति वार्ता हुई थी। हालांकि, इस बैठक से कोई बड़ा राजनीतिक समझौता सामने नहीं आया। दोनों देश अपने-अपने रुख पर कायम रहे, खासकर डोनबास क्षेत्र को लेकर।
अमेरिका में अगली बैठक
अब अमेरिका ने सुझाव दिया है कि, अगली त्रिपक्षीय बैठक पहली बार अमेरिकी धरती पर आयोजित की जाए। संभावना है कि यह बैठक मियामी में होगी, जिसमें जेलेंस्की खुद शामिल हो सकते हैं। यूक्रेन ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है।
डोनबास क्षेत्र इस युद्ध का सबसे संवेदनशील और जटिल मुद्दा बना हुआ है।
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रूस की मांग |
यूक्रेन का रुख |
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यूक्रेन सेना हटाए |
सिरे से इनकार |
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क्षेत्रीय नियंत्रण |
संप्रभुता से समझौता नहीं |
जेलेंस्की ने साफ कहा कि, डोनबास पर फैसला केवल राष्ट्राध्यक्षों की सीधी बैठक में ही संभव है। उन्होंने कहा, यह मुद्दा जस का तस है और यही सबसे बड़ी चुनौती है।
शांति वार्ता के दावों के बीच रूस ने यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर सैन्य हमला किया।
हमले का विवरण
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हमला |
विवरण |
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ड्रोन |
400 से ज्यादा |
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मिसाइल |
लगभग 40 |
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लक्ष्य |
पावर ग्रिड, बिजली संयंत्र, सबस्टेशन |
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प्रभावित इलाके |
वोलिन, लविव, रिव्ने, विन्नित्सिया |
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नागरिक नुकसान |
रिहायशी इमारतों पर भी हमले |
जेलेंस्की ने कहा कि, रूस ठंड को हथियार बनाकर यूक्रेन की जनता को झुकाने की कोशिश कर रहा है।
रिव्ने में एक रिहायशी इमारत को निशाना बनाए जाने से नागरिकों में भारी दहशत है। कई इलाकों में बिजली आपूर्ति ठप हो गई है, अस्पतालों और जरूरी सेवाओं पर असर पड़ा है। यूक्रेनी प्रशासन आपातकालीन मरम्मत में जुटा है, लेकिन हालात बेहद चुनौतीपूर्ण हैं।
अबू धाबी में हुई त्रिपक्षीय बैठक से कोई ठोस राजनीतिक समाधान नहीं निकल सका, लेकिन इस दौरान एक महत्वपूर्ण मानवीय सफलता जरूर हासिल हुई। बैठक के बाद दोनों देशों के बीच कैदियों की अदला-बदली पर सहमति बनी, जिसके तहत कुल करीब 314 कैदियों को रिहा किया गया। इसमें रूस और यूक्रेन, दोनों पक्षों से 157-157 सैनिकों की वापसी शामिल है। इसे आने वाली शांति वार्ताओं के लिए एक सकारात्मक संकेत और विश्वास बहाली की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
अमेरिका ने युद्धविराम लागू होने की स्थिति में निगरानी की जिम्मेदारी निभाने की इच्छा जताई है। हालांकि, इस व्यवस्था को लेकर भी रूस और यूक्रेन के विचार अलग-अलग हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि, विश्वसनीय निगरानी तंत्र के बिना स्थायी शांति संभव नहीं।
डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति बनने से पहले युद्ध जल्द खत्म करने का दावा किया था। बाद में 100 दिनों और फिर अगस्त 2025 की समयसीमा तय की गई, लेकिन सफलता नहीं मिली। अब जून 2026 की डेडलाइन को अंतिम और निर्णायक माना जा रहा है। जेलेंस्की ने संकेत दिए कि, यह समयसीमा अमेरिकी राजनीतिक कैलेंडर से भी जुड़ी हो सकती है।