ईरान जंग के बीच अमेरिका का शक्ति प्रदर्शन :कैलिफोर्निया से लॉन्च हुई ‘डूम्सडे’ मिसाइल मिनटमैन-III; हिरोशिमा बम से कई गुना ताकतवर

वॉशिंगटन डीसी। मिडिल ईस्ट में जारी भीषण तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव के बीच अमेरिका ने अपनी सबसे शक्तिशाली बैलिस्टिक मिसाइलों में से एक मिनटमैन-III (Minuteman-III) इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण कर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
मंगलवार (3 मार्च 2026) की रात कैलिफोर्निया के तट से इस मिसाइल को लॉन्च किया गया। अमेरिकी स्पेस फोर्स के मुताबिक, यह परीक्षण कैलिफोर्निया के वेंडेनबर्ग स्पेस फोर्स बेस से किया गया, जहां से रात करीब 11 बजे मिसाइल को दागा गया। इस मिसाइल में परमाणु हथियार नहीं लगाया गया था, लेकिन यह दुनिया के सबसे घातक हथियारों में गिनी जाती है और इसे अक्सर “डूम्सडे मिसाइल” कहा जाता है।
क्यों चर्चा में है मिनटमैन-III मिसाइल परीक्षण?
अमेरिका का यह परीक्षण ऐसे समय हुआ है जब मिडिल ईस्ट में युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है। इसी बीच अमेरिका द्वारा परमाणु क्षमता वाली बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण कई सवाल खड़े कर रहा है।
हालांकि, अमेरिकी सेना का कहना है कि यह परीक्षण कई साल पहले से निर्धारित था और इसका मौजूदा युद्ध से कोई सीधा संबंध नहीं है। फिर भी रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि, ऐसे समय में यह परीक्षण रणनीतिक संदेश भी देता है कि अमेरिका अपनी सैन्य ताकत और परमाणु क्षमता को लेकर पूरी तरह तैयार है।
कैलिफोर्निया से कैसे किया गया मिसाइल परीक्षण
अमेरिकी स्पेस फोर्स के अनुसार यह परीक्षण GT-254 मॉडल की मिसाइल के जरिए किया गया। इस निहत्थे परीक्षण रॉकेट को वेंडेनबर्ग स्पेस फोर्स बेस से लॉन्च किया गया और यह प्रशांत महासागर के ऊपर हजारों किलोमीटर की दूरी तय करते हुए पश्चिम-मध्य प्रशांत क्षेत्र में निर्धारित लक्ष्य तक पहुंचा। इस पूरे परीक्षण की निगरानी एयर फोर्स ग्लोबल स्ट्राइक कमांड और अमेरिकी स्पेस फोर्स ने की।
576वें फ्लाइट टेस्ट स्क्वाड्रन के कमांडर लेफ्टिनेंट कर्नल कैरी रे ने बताया कि, इस परीक्षण के जरिए मिसाइल सिस्टम के विभिन्न तकनीकी हिस्सों की कार्यक्षमता और प्रदर्शन का मूल्यांकन किया गया।
यह भी पढ़ें: मिडिल ईस्ट में तबाही का छठा दिन : क्या इजरायल के परमाणु केंद्र पर होगा हमला? ईरान की चेतावनी से बढ़ी टेंशन
क्या है मिनटमैन-III मिसाइल
मिनटमैन-III अमेरिका की सबसे पुरानी लेकिन सबसे भरोसेमंद इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) मानी जाती है। यह मिसाइल 1970 के दशक से अमेरिकी सेना के पास मौजूद है और आज भी अमेरिका की परमाणु रक्षा प्रणाली का अहम हिस्सा है। इस मिसाइल को विशेष रूप से परमाणु हथियार ले जाने के लिए डिजाइन किया गया था और यह हजारों किलोमीटर दूर तक हमला करने में सक्षम है। अमेरिकी रक्षा रणनीति में इसे न्यूक्लियर ट्रायड का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
न्यूक्लियर ट्रायड क्या है?
अमेरिका की परमाणु रक्षा रणनीति तीन हिस्सों पर आधारित है:
|
हिस्सा |
विवरण |
|
जमीन आधारित मिसाइल |
ICBM जैसे मिनटमैन-III |
|
समुद्र आधारित मिसाइल |
परमाणु पनडुब्बियों से लॉन्च होने वाली मिसाइलें |
|
हवाई हमले |
परमाणु हथियार ले जाने वाले बमवर्षक विमान |
इस तीन स्तरीय प्रणाली को ही न्यूक्लियर ट्रायड कहा जाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि, अगर अमेरिका पर कभी परमाणु हमला होता है तो वह तुरंत जवाबी हमला करने में सक्षम रहेगा।
मिनटमैन-III मिसाइल की खासियत
यह मिसाइल तकनीकी रूप से बेहद उन्नत मानी जाती है और इसकी कई विशेषताएं इसे खतरनाक बनाती हैं।
|
फीचर |
जानकारी |
|
मिसाइल प्रकार |
तीन चरण वाली बैलिस्टिक मिसाइल |
|
ईंधन |
सॉलिड फ्यूल |
|
लंबाई |
लगभग 18.3 मीटर |
|
वजन |
करीब 79,432 पाउंड |
|
रेंज |
लगभग 9,600 से 13,000 किमी |
|
स्पीड |
करीब 24,000 किमी/घंटा (मैक 23) |
|
अधिकतम ऊंचाई |
1,120 किमी |
|
सटीकता |
लगभग 240 मीटर |
|
पेलोड |
1 से 3 री-एंट्री व्हीकल |
हिरोशिमा बम से 20 गुना ज्यादा ताकत
विशेषज्ञों के अनुसार मिनटमैन-III मिसाइल में ऐसे परमाणु वॉरहेड लगाए जा सकते हैं जिनकी ताकत हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम से लगभग 20 गुना अधिक होती है। हालांकि, हालिया परीक्षण में किसी भी प्रकार का परमाणु हथियार नहीं लगाया गया था। यह सिर्फ तकनीकी परीक्षण था।
एक मिनट में लॉन्च होने की क्षमता
इस मिसाइल को मिनटमैन नाम इसलिए दिया गया क्योंकि यह एक मिनट के अंदर लॉन्च के लिए तैयार हो सकती है। सॉलिड फ्यूल से चलने के कारण इसे तुरंत दागा जा सकता है, जबकि लिक्विड फ्यूल वाली मिसाइलों को तैयार करने में ज्यादा समय लगता है।
अमेरिका के पास कितनी मिनटमैन-III मिसाइलें?
रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका के पास करीब 400 मिनटमैन-III मिसाइलें हैं। ये मिसाइलें अमेरिका के अलग-अलग सैन्य अड्डों पर भूमिगत साइलो में तैनात हैं। इनका मुख्य उद्देश्य रूस और चीन जैसे देशों के खिलाफ परमाणु संतुलन बनाए रखना है।
2030 तक बदली जाएगी यह मिसाइल
अमेरिका अगले कुछ वर्षों में इस मिसाइल को नई पीढ़ी की Sentinel ICBM से बदलने की योजना बना रहा है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, 2030 तक मिनटमैन-III को धीरे-धीरे सेवा से हटाया जाएगा। लेकिन तब तक इसकी विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए नियमित परीक्षण जारी रहेंगे।
मिडिल ईस्ट में युद्ध का माहौल
अमेरिका के मिसाइल परीक्षण के साथ ही मिडिल ईस्ट में युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं। अमेरिका और इजरायल ने हाल ही में ईरान पर कई हमले किए थे, जिनमें ईरान के शीर्ष नेतृत्व और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। इसी संघर्ष के दौरान ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर सामने आई। इसके बाद पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया।
ईरान ने इजरायल पर किया जवाबी हमला
ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल पर मिसाइल हमले किए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने इजरायल के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। पूरे क्षेत्र में आर्थिक और सैन्य ढांचे को नष्ट करने की धमकी दी। अमेरिकी ठिकानों पर भी हमले की चेतावनी दी। इस बीच लेबनान में सक्रिय हिजबुल्ला संगठन ने भी इजरायल के खिलाफ हमले शुरू कर दिए।
लेबनान और बेरुत में भी हमले
इजरायली सेना ने हिजबुल्ला को निशाना बनाते हुए लेबनान की राजधानी बेरुत में भी कई हमले किए। इससे पूरे मिडिल ईस्ट में संघर्ष का दायरा और बढ़ गया है।
खामेनेई का शोक समारोह स्थगित
ईरान में जारी संघर्ष की वजह से सरकार को कई कार्यक्रम रद्द करने पड़े। सरकारी टीवी ने घोषणा की कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के लिए आयोजित शोक समारोह को भी स्थगित करना पड़ा। 1989 में अयातुल्ला रुहोल्ला खोमैनी के अंतिम संस्कार में लाखों लोग शामिल हुए थे, लेकिन मौजूदा हालात में ऐसा संभव नहीं हो पाया।
क्या अमेरिका ने शक्ति प्रदर्शन किया?
हालांकि अमेरिकी सेना ने कहा कि यह परीक्षण पहले से तय था, लेकिन कई रक्षा विशेषज्ञ इसे रणनीतिक शक्ति प्रदर्शन मान रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, युद्ध के बीच ऐसा परीक्षण विरोधियों को संदेश देता है। अमेरिका अपनी परमाणु क्षमता दिखाना चाहता है। यह प्रतिरोधक रणनीति (Deterrence Strategy) का हिस्सा हो सकता है।
अमेरिका का आधिकारिक बयान
एयर फोर्स ग्लोबल स्ट्राइक कमांड ने अपने बयान में कहा कि, मंगलवार का परीक्षण नियमित था और कई साल पहले से निर्धारित था। इसका उद्देश्य मिसाइल सिस्टम की सटीकता और विश्वसनीयता को जांचना था। अधिकारियों ने यह भी कहा कि, ऐसे परीक्षण अमेरिका की जमीनी परमाणु क्षमता को मजबूत करने में मदद करते हैं।
दुनिया के लिए क्या मायने रखता है यह परीक्षण
अमेरिका द्वारा इस तरह की मिसाइल का परीक्षण वैश्विक राजनीति में कई संकेत देता है। प्रमुख संदेश-
- अमेरिका अपनी परमाणु शक्ति बनाए रख रहा है।
- सैन्य तकनीक लगातार अपडेट की जा रही है।
- वैश्विक संघर्ष के बीच सैन्य तैयारी बरकरार है।
हालांकि, कई विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे परीक्षण वैश्विक तनाव को और बढ़ा सकते हैं।











